हरियाणा के फरीदाबाद जिले में जमीन अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। सोतई गांव में चल रहा यह धरना प्रदर्शन अब 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां आंदोलनकारी ग्रामीण अपनी जमीन के हक की लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस अनिश्चितकालीन प्रदर्शन में अब एक अनूठा और बेहद भावनात्मक पहलू देखने को मिल रहा है। धरना स्थल पर जुटी ग्रामीण महिलाएं भक्ति गीतों और भजन-कीर्तन के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वे ईश्वर से भ्रष्ट व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना कर रही हैं ताकि अन्नदाताओं की जायज समस्याओं का जल्द से जल्द निस्तारण हो सके।
दिन-रात चौबीसों घंटे चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन
सोतई गांव में बना यह धरना मंच अब इलाके के ग्रामीणों के लिए हक और इंसाफ का प्रतीक बन चुका है। आंदोलनकारियों ने पूरी व्यवस्था को बेहद शांतिपूर्ण लेकिन अडिग बनाए रखा है। यहां आंदोलन दिन-रात यानी चौबीसों घंटे लगातार जारी रहता है। दिन के समय जहां महिलाएं और बुजुर्ग मोर्चे पर डटे रहते हैं, वहीं नौकरीपेशा ग्रामीण अपनी ड्यूटी पूरी करके सीधे धरना स्थल पर पहुंचते हैं। स्थानीय निवासी राजकुमार ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे रोजाना आठ घंटे की नौकरी करते हैं। अपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद वे घर जाने के बजाय सीधे धरना स्थल पर पहुंच जाते हैं और किसानों के साथ बैठते हैं। उनका कहना है कि यह उनके अपने हक और जमीन की लड़ाई है, जिसे वे किसी भी कीमत पर अधूरा नहीं छोड़ सकते।
ग्रामीण महिलाओं की दो टूक, पैसा मिलने तक नहीं हटेंगे
धरने में बैठी महिलाओं का संकल्प भी पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। सोतई गांव की रहने वाली विद्या ने बताया कि वे सभी केवल अपनी जमीन के हक के लिए यहां जमा हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी भूमि का पूरा भुगतान नहीं मिल जाता, तब तक वे इस स्थान से नहीं हटेंगी। वे भजन-कीर्तन के माध्यम से ईश्वर से अधिकारियों को सही सोच और सद्बुद्धि देने की गुहार लगा रही हैं। वहीं विमला देवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह उनके अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन जब उनकी जमीन का तय पैसा देगा, तभी वे अपनी धरती सौंपेंगी और बिना मुआवजा मिले कोई भी ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं है।
पीएमओ की समीक्षा बैठक से बंधी उम्मीदें और आशंकाएं
आंदोलनकारी किसानों की नजरें अब सीधे दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ में होने वाली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। किसान नेता बबलू हुड्डा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद अब 23 सितंबर को फरीदाबाद के सभी संबंधित अधिकारियों को पीएमओ में तलब किया गया है। किसानों को उम्मीद है कि इस आमने-सामने की बैठक में प्रधानमंत्री फरीदाबाद के प्रशासनिक अफसरों से धरने के वास्तविक कारणों की जानकारी लेंगे और मामले का उचित समाधान निकालेंगे।
बबलू हुड्डा के अनुसार, बैठक के दौरान अधिकारियों से यह पूछा जाएगा कि उनके पास सोतई गांव की जमीन को विवादित ठहराने के लिए आखिर कौन से कागजात या दस्तावेज मौजूद हैं। किसानों का मानना है कि इस बैठक से पूरे मामले का सच और झूठ पूरी तरह खुलकर सामने आ जाएगा। हालांकि, आंदोलनकारियों के मन में एक आशंका यह भी बनी हुई है कि कहीं अधिकारी बैठक में कोई गलत, भ्रामक या मनगढ़ंत रिपोर्ट पेश न कर दें। इसी वजह से ग्रामीणों ने मांग रखी है कि इस तरह की उच्चस्तरीय समीक्षा में किसानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे वे सीधे अफसरों के सामने अपना पक्ष और जमीनी हकीकत दर्ज करा सकें।
जेवर एयरपोर्ट सड़क मार्ग से प्रभावित महमदपुर के किसानों का भी दर्द
इस अधिग्रहण और मुआवजे की समस्या का दायरा केवल सोतई गांव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई अन्य गांव भी इसकी चपेट में हैं। सोतई से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित महमदपुर गांव के निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाली सड़क परियोजना का रास्ता उनके गांव से होकर भी गुजरा है। मुकेश कुमार के अनुसार, इस पूरे सड़क प्रोजेक्ट में उनके परिवार की एकमात्र कृषि भूमि चली गई।
मुकेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार के पास 112 साल की गिरदावरी का पुराना रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत में मुकदमा भी दायर किया हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन के अड़ियल रवैये के आगे उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई और आज तक उन्हें अपनी इकलौती जमीन का एक रुपया भी मुआवजा नहीं मिल सका है। वे भी न्याय की उम्मीद में सोतई के इस धरने में शामिल होकर अपने हक की मांग उठा रहे हैं।


















