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फरीदाबाद की जीवन नगर पार्ट-2 में बुलडोजर का खौफ, 15 लाख में बना मकान बनते ही चिपका नोटिस, मजदूर परिवारों की नींद उड़ीहरियाणा
16 जून 2026, 1:07 pm (47 दिन पहले)· 3

फरीदाबाद की जीवन नगर पार्ट-2 में बुलडोजर का खौफ, 15 लाख में बना मकान बनते ही चिपका नोटिस, मजदूर परिवारों की नींद उड़ी

फरीदाबाद की जीवन नगर पार्ट-2 समेत 10 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों में DTP इंफोर्समेंट ने नोटिस चस्पा कर दिए हैं, जिससे मेहनत की कमाई से घर बनाने वाले परिवारों में दहशत फैल गई है।

फरीदाबाद की जीवन नगर पार्ट-2 कॉलोनी में इन दिनों हर घर के बाहर चिपका एक कागज लोगों की नींद उड़ाए हुए है। यह कोई आम सूचना नहीं, बल्कि वह नोटिस है जिसके बाद उन परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा मंडरा रहा है, जिन्होंने सालों की मजदूरी और पाई-पाई जोड़कर अपना आशियाना खड़ा किया था। अब उन्हें डर है कि कभी भी उनकी आंखों के सामने बुलडोजर चल सकता है।

अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सख्ती

फरीदाबाद में अवैध रूप से बस रही कॉलोनियों के खिलाफ DTP इंफोर्शमेंट ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने 10 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों में नोटिस चस्पा किए हैं और इन्हीं में जीवन नगर पार्ट-2 भी शामिल है। नोटिस मिलते ही प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने दिन-रात की मेहनत और मजदूरी से कमाए पैसों से घर बनाए हैं, ऐसे में कार्रवाई की आशंका उन्हें भीतर तक हिला रही है।

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बिहार के बिपिन प्रसाद की आपबीती

TrendKia से बातचीत में स्थानीय निवासी बिपिन प्रसाद ने बताया कि वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और तीन साल से जीवन नगर पार्ट-2 में रह रहे हैं। उनके मुताबिक मकान बनाने में करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए और तीन दिन पहले उनके घर पर नोटिस चिपका दिया गया। उन्होंने कहा कि वे मजदूरी करते हैं और एक-एक पैसा जोड़कर यह घर बनाया है, जबकि बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं और अब समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा।

बिपिन प्रसाद ने यह भी बताया कि उन्होंने एक डीलर से जमीन खरीदी थी, लेकिन डीलर ने कभी नहीं बताया कि यह कॉलोनी अवैध है। उल्टा उससे कहा गया था कि मकान बनाइए और आराम से रहिए। उन्होंने 55 गज में मकान बनाया है। प्रशासन आया, नोटिस चिपकाया और चला गया। उनका कहना है कि इलाके में आज भी रास्ते कच्चे हैं और कॉलोनी पूरी तरह विकसित तक नहीं हुई है।

कच्ची गलियां और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

जीवन नगर पार्ट-2 की हालत भी लोगों की परेशानी और बढ़ा रही है। जहां नोटिस लगाए गए हैं, वहां अधिकांश गलियां कच्ची हैं और सड़कें उबड़-खाबड़ हैं। बरसात के दिनों में तो लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। इन बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद परिवारों ने यहां अपने घर खड़े किए, लेकिन अब नोटिस आने के बाद उनके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

जिनके घर बच गए, वे भी सहमे

स्थानीय निवासी भैरव प्रसाद ने बताया कि उनके मकान पर नोटिस तो नहीं लगा, फिर भी वे इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत मानते हैं। उनके अनुसार लोगों ने एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाए हैं और उन्हें तो यह तक पता नहीं था कि जमीन सरकारी है या कॉलोनी अवैध। वे उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले हैं और कहते हैं कि लोग मेहनत की कमाई लगाकर यहां बसे हैं।

एक अन्य निवासी रामनिवास प्रजापति ने बताया कि उनके घर पर नोटिस नहीं है, लेकिन कई मकानों पर नोटिस लगाए गए हैं और कई पर नहीं। उनके मुताबिक यह कॉलोनी अभी पास नहीं हुई है और डीलर कम कीमत का लालच देकर लोगों को प्लॉट बेच देते हैं। उन्होंने बताया कि यहां प्लॉट का रेट 20 से 22 हजार रुपये प्रति गज तक चल रहा है और लोगों ने सस्ते में नहीं, बल्कि अपनी हैसियत के मुताबिक पैसे चुकाकर जमीन खरीदी है।

अपने हाथों से बनाया घर, बनते ही नोटिस

डबुआ कॉलोनी के रहने वाले विक्रमा भगत मिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जिस मकान पर नोटिस चिपकाया गया है, करीब 15 लाख रुपये का वह घर उन्होंने अपने हाथों से बनाकर तैयार किया है। उनके मुताबिक मकान बनकर तैयार हुआ और उसके तुरंत बाद उस पर नोटिस लग गया। जीवन नगर पार्ट-2 में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी लगाकर घर बनाने वाले इन परिवारों का आगे क्या होगा। नोटिस के बाद ये लोग असमंजस और डर के माहौल में दिन काट रहे हैं।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद की किन कॉलोनियों में नोटिस लगे हैं?
DTP इंफोर्समेंट ने 10 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों में नोटिस चस्पा किए हैं, जिनमें जीवन नगर पार्ट-2 भी शामिल है।
बिपिन प्रसाद ने अपने मकान पर कितना खर्च किया था?
बिहार के रहने वाले बिपिन प्रसाद के मुताबिक मकान बनाने में करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए और तीन दिन पहले उस पर नोटिस चिपका दिया गया।
इस इलाके में प्लॉट का रेट क्या है?
रामनिवास प्रजापति के अनुसार यहां प्लॉट का रेट 20 से 22 हजार रुपये प्रति गज तक चल रहा है और कॉलोनी अभी पास नहीं हुई है।
लोग नोटिस को गलत क्यों मान रहे हैं?
निवासियों का कहना है कि उन्होंने मेहनत की कमाई से घर बनाए और उन्हें यह तक नहीं पता था कि जमीन सरकारी है या कॉलोनी अवैध, क्योंकि डीलर ने यह कभी नहीं बताया।
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