नवी मुंबई के एक जाने-माने होटल पार्क इन बाय रैडिसन का फूड लाइसेंस दो कीड़े मिलने की वजह से निलंबित कर दिया गया, और यह मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम लागू करते वक्त व्यावहारिक सोच जरूरी है, हालांकि जन स्वास्थ्य के साथ किसी तरह की ढिलाई मंजूर नहीं होगी.
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एफडीए ने अपने विशेष निरीक्षण अभियान के तहत होटल में अचानक जांच की. इस जांच में होटल के परिसर में दो कीड़े मिले, जिसके आधार पर एफडीए ने होटल का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया. यह होटल उन 100 होटलों की सूची में शामिल है जिनके लाइसेंस एफडीए ने हाल ही में निलंबित किए हैं. होटल प्रबंधन ने इस फैसले को गलत बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, और मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे तथा एक अन्य न्यायाधीश की खंडपीठ के सामने पहुंचा.
वकील बोले, कॉकरोच की गिनती मुद्दा नहीं
होटल की तरफ से पेश हुए वकील मयूर खांडेपारकर ने अदालत में दलील दी कि एफडीए ने लाइसेंस निलंबित करने के पीछे पर्याप्त लिखित वजहें नहीं दी हैं. उन्होंने अदालत से कहा, 'एक कॉकरोच मिला या 10 कॉकरोच मिले, यह मुद्दा नहीं है.' उनकी दलील थी कि सिर्फ निरीक्षण चेकलिस्ट में कुछ खामियां मिल जाने भर से लाइसेंस रद्द करना ठीक नहीं है, और छोटी-मोटी कमियों पर इतनी कड़ी कार्रवाई करना अनुचित है.
जब कोर्ट रूम में ही उड़ती दिखी मक्खी
दिलचस्प यह रहा कि सुनवाई के बीच में ही अदालत के भीतर एक मक्खी उड़ती नजर आई. इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए बताया कि पिछले हफ्ते उनकी मेज पर भी एक बड़ा कीड़ा बैठा हुआ था, और अभी भी अदालत में एक मक्खी मौजूद है. इसके बाद उन्होंने कहा, 'हम भारत में हैं, इसलिए हमें व्यावहारिक नजरिया अपनाना होगा.' यही नहीं, उन्होंने सरकारी वकील की तरफ मुखातिब होकर सीधे कहा, 'मैडम, हम भारत में हैं. आपको भी व्यावहारिक रुख अपनाना होगा.'
एफडीए का पक्ष, स्वास्थ्य से समझौता नहीं
वहीं दूसरी तरफ एफडीए की ओर से पेश हुईं सरकारी वकील नेहा भिड़े ने विभाग की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत से जुड़ा मसला है, इसलिए इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती. उनका कहना था कि यही वजह है कि एफडीए को सख्ती से पेश आना पड़ता है.
अदालत ने अपनी ही कैंटीन पर उठाए सवाल
इसी बहस के दौरान हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि क्या सरकारी कैंटीनों की भी उसी तरह जांच हो रही है जैसी निजी होटलों की हो रही है. अदालत ने यहां तक पूछ लिया कि क्या खुद बॉम्बे हाईकोर्ट की कैंटीन का भी कभी निरीक्षण हुआ है. जवाब में सरकारी वकील ने बताया कि बीएमसी की कैंटीन का लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका है, और पिछले साल मंत्रालय भवन की कैंटीन पर भी छापा पड़ा था जिसके बाद उसका लाइसेंस भी निलंबित हुआ था. इसके बाद अदालत ने खुद हाईकोर्ट की कैंटीन का निरीक्षण करने का आदेश दिया और शुक्रवार तक इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा है.
अब दूसरे रेस्तरां भी पहुंचे अदालत
पार्क इन होटल का मामला सामने आने के बाद यह विवाद सिर्फ एक होटल तक सीमित नहीं रहा. हाईकोर्ट के पास ही स्थित मशहूर पूर्णिमा उडुपी रेस्तरां ने भी अपने लाइसेंस निलंबन के खिलाफ अदालत में याचिका दाखिल की है, और उम्मीद है कि इस पर शुक्रवार तक सुनवाई होगी. रेस्तरां का आरोप है कि अधिकारियों ने मनमाने ढंग से कार्रवाई की और रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की गई, साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून के तहत तय की गई प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
राज्यभर में तेज हुआ निरीक्षण अभियान
दरअसल एफडीए ने इस साल 40 से ज्यादा नए फूड सेफ्टी अधिकारियों की नियुक्ति की है, और इसके बाद से पूरे महाराष्ट्र में निरीक्षण अभियान काफी तेज कर दिया गया है. इसी अभियान के तहत मुंबई के कई बड़े और नामी क्लबों के लाइसेंस भी निलंबित किए जा चुके हैं, जिनमें क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया यानी सीसीआई, एमआईजी क्रिकेट क्लब, आरके जुहू जिमखाना, अपर्णा जुहू जिमखाना और विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब का नाम शामिल है. एफडीए के मुताबिक इन जगहों पर हुए निरीक्षण में कई तरह की खामियां सामने आई हैं, जैसे कीड़ों का संक्रमण, खाद्य पदार्थों का खराब भंडारण, जर्जर हो चुका ढांचा, तापमान नियंत्रण की कमी और कर्मचारियों की स्वच्छता में लापरवाही.



















