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फरीदाबाद में अंग्रेजों के दौर का 125 साल पुराना पुल आज भी मजबूत, दशक भर पहले बना नया पुल जर्जरहरियाणा
28 सित॰ 2026, 1:53 pm (22 मिनट पहले)· 0

फरीदाबाद में अंग्रेजों के दौर का 125 साल पुराना पुल आज भी मजबूत, दशक भर पहले बना नया पुल जर्जर

फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में अंग्रेजों के समय का बना 125 साल पुराना पुल आज भी बेहद मजबूत है, जबकि उसके पास ही एक दशक पहले बना नया पुल जर्जर होने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और असामाजिक तत्वों द्वारा पहुंचाई जा रही क्षति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के फतेहपुर बिल्लौच गांव में दिल्ली-आगरा सिंचाई नहर पर खड़ा अंग्रेजों के शासनकाल का करीब 125 साल पुराना पुल आज भी अपनी मजबूती की मिसाल पेश कर रहा है। इसके ठीक बगल में लगभग 10 साल पहले बनाए गए नए पुल की हालत बदतर हो चुकी है और वह अब जगह-जगह से टूटने लगा है। नए पुल पर अब सीमेंट की परतें उखड़ने लगी हैं और अंदर की लोहे की छड़ें बाहर झांकने लगी हैं। इस अजीब विरोधाभास को देखकर स्थानीय लोगों ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, और हर किसी के मन में यह सवाल है कि इतने दशक पुराना ढांचा आज भी सुरक्षित कैसे है जबकि नया ढांचा इतनी जल्दी जवाब दे रहा है।

ऐतिहासिक संदर्भ और पुराने निर्माण की मजबूती

इस पूरे मामले पर स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा ने चर्चा के दौरान ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया और बताया कि कैसे पुराने समय में कामकाज का तरीका अलग था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई थी, तब देश की वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत हिस्सेदारी थी और उस दौर में व्यवस्थाएं अलग तरह से चलती थीं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में ईमानदारी और आपसी सहयोग की भावना हुआ करती थी, जिसके कारण उस दौर में किए गए निर्माण कार्य आज भी अपनी मजबूती के साथ खड़े नजर आते हैं।

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पुराने और नए पुल की स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क

अंग्रेजों के समय के ढांचे की तारीफ करते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि इस ऐतिहासिक पुल पर इतने लंबे समय बाद भी एक खरोंच तक नहीं आई है, जबकि इसे बने हुए एक सदी से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इसके उलट, महज 7-8 साल पहले तैयार किया गया नया पुल अभी से जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस नए पुल की पगडंडी को प्राकृतिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि इसे जानबूझकर उखाड़ा गया है। इलाके में कुछ युवाओं द्वारा नशा करने की आदत और इस लत के चलते सार्वजनिक संपत्तियों को पहुंचाए जा रहे नुकसान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। देश की बड़ी युवा आबादी को नशे के जाल से बचाने और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, क्योंकि नशे की हालत में लोग इस तरह के सार्वजनिक निर्माणों को भी तहस-नहस कर रहे हैं।

बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों के अनुभव

इस पुल के इतिहास को लेकर 78 साल से अधिक उम्र के बीरपाल ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि इस पुल के निर्माण के समय उनका जन्म भी नहीं हुआ था और इसकी उम्र कम से कम 125 साल तो हो ही चुकी होगी। हालांकि उन्होंने यह भी जिक्र किया कि इस पुराने पुल की चौड़ाई थोड़ी कम है, लेकिन फरीदाबाद में इसी नहर पर बने ऐसे कई अन्य पुराने पुल आज भी लाखों लोगों का रोजाना आवागमन संभाल रहे हैं और पूरी तरह सुरक्षित हैं।

विकास कार्यों के टिकाऊपन पर जनता की चिंता

एक अन्य स्थानीय निवासी संदीप तेवतिया ने बताया कि फरीदाबाद के चंदावली गांव और आईएमटी इलाके में भी इसी नहर पर इसी तरह के पुराने पुल आज भी मजबूती से टिके हुए हैं। उनका कहना है कि आम जनता को विकास कार्यों को केवल उनके बनने के समय से नहीं, बल्कि उनके टिकाऊपन और मजबूती के पैमाने पर परखना चाहिए। एक तरफ वह पुल है जो सवा सौ साल से बिना किसी बड़ी खराबी के खड़ा है, तो दूसरी तरफ एक दशक पुराना नया ढांचा है जिसके हालात सबके सामने हैं। जनता का मानना है कि भविष्य में किसी भी विकास योजना पर विचार करते समय उसकी गुणवत्ता और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है।

सवाल-जवाब

यह पुराना पुल कहाँ स्थित है?
यह 125 साल पुराना पुल फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में दिल्ली-आगरा सिंचाई नहर पर स्थित है।
अंग्रेजों के जमाने का पुल कितना पुराना है?
यह ऐतिहासिक पुल करीब 125 साल पुराना है और आज भी अपनी पूरी मजबूती के साथ खड़ा है।
नया पुल कब बनाया गया था?
नया पुल इस पुराने पुल के पास करीब 10 साल पहले बनाया गया था।
नए पुल की क्या हालत हो गई है?
नया पुल जगह-जगह से जर्जर होने लगा है, जिस पर सीमेंट की परतें उखड़ने लगी हैं और लोहे की रॉड दिखाई देने लगी हैं।
ग्रामीणों ने किस बात पर चिंता जताई है?
ग्रामीणों ने निर्माण की घटिया गुणवत्ता और असामाजिक तत्वों द्वारा पुल को पहुंचाए जा रहे नुकसान पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा ने क्या बताया?
बबलू हुड्डा ने बताया कि पुराने समय में भ्रष्टाचार न होने के कारण निर्माण कार्य ज्यादा टिकाऊ होते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 मिनट पहले

अंग्रेज़ों के पुल मजबूत होते थे, ये ठीक है, पर नए पुल के टूटने में नशे और लापरवाही का एंगल कुछ ज़्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर लग रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

करण भाई, बात सिर्फ लापरवाही की नहीं है, फरीदाबाद और आसपास के इलाकों में ग्राउंड पर कई नए निर्माण सचमुच बहुत जल्दी खराब हो रहे हैं।

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