फरीदाबाद के सीही गांव में रविवार शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। खेलते-खेलते तीन साल की मासूम नेहा लगभग 200 फीट गहरे एक खुले बोरवेल में जा गिरी। इस गरीब परिवार के माता-पिता मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं और किराए के एक छोटे से मकान में जीवन बिता रहे हैं। प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर लगभग 10 घंटे तक चले लंबे बचाव अभियान के बाद बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाए जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद हादसे ने गांव में बरसों से फैली प्रशासनिक उदासीनता और खुले बोरवेल की गंभीर समस्या पर फिर से बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
माता-पिता की मजदूरी और किराए का छोटा आशियाना
पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना का शिकार हुई नेहा के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि उसकी मां स्थानीय कोठियों में साफ-सफाई और झाड़ू-पोछा करने का काम संभालती हैं। यह परिवार फरीदाबाद के सेक्टर 8 स्थित सीही गांव में एक किराए के मकान में रहता है। जिस स्थान पर यह जानलेवा हादसा हुआ, वहां पूर्व में नगर निगम का एक ट्यूबवेल संचालित होता था। यह ट्यूबवेल पिछले करीब 10 सालों से बंद हालत में पड़ा था। शुरुआत में इसके मुँह पर सुरक्षा के लिहाज से ढक्कन लगाया गया था, लेकिन कुछ समय पहले वह ढक्कन गायब हो गया था। रविवार की शाम करीब 6 बजे नेहा खेलते-खेलते इसी खुले और असुरक्षित बोरवेल में जा गिरी।
संत सूरदास की जन्मस्थली का ऐतिहासिक सीही गांव
सीही गांव को फरीदाबाद का एक बेहद ऐतिहासिक क्षेत्र माना जाता है। इस स्थान को महान संत सूरदास की जन्मस्थली के रूप में विशेष ख्याति प्राप्त है। इतिहास के पन्नों में रुचि रखने वाले कुछ लोग इस गांव के इतिहास को द्वापर युग तक से जोड़ते हैं। हालांकि, आज के समय में इस गांव की ज़मीनी हकीकत काफी बदल चुकी है और यहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। गांव की कई गलियों में सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इसके अलावा, जगह-जगह खुले चैंबरों के ढक्कन और लापरवाही की बानगी आम तस्वीरें हैं। स्थानीय निवासियों का दर्द है कि ये समस्याएं आज की पैदा हुई नहीं हैं, बल्कि लंबी अवधि से चली आ रही हैं, इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन ने कभी इस ओर पर्याप्त और ठोस ध्यान नहीं दिया।
पड़ोसियों की जुबानी हादसे की पूरी दास्तान
स्थानीय पड़ोसी देवेंद्र सिंह ने घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह दुर्घटना रविवार शाम करीब 6 बजे हुई थी जब बच्ची बोरवेल में जा गिरी। उन्होंने बताया कि यह बोरवेल बहुत पुराना था और मूल ट्यूबवेल को यहाँ से आगे शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके बाद इस गड्ढे को खुला छोड़ दिया गया था। बच्ची के माता-पिता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और यहाँ रहकर मेहनत-मजदूरी करते हैं। देवेंद्र सिंह के अनुसार यह बोरवेल लगभग 200 फीट गहरा था और लंबे समय से खुला होने के बावजूद किसी ने इसकी सुध नहीं ली, जो कि स्पष्ट रूप से एक बड़ी लापरवाही का मामला है।
प्रशासनिक अमला और बचाव कार्य के प्रयास
घटनास्थल के पास रहने वाली एक अन्य स्थानीय निवासी प्रेमलता ने बताया कि यहाँ पहले एक ट्यूबवेल हुआ करता था और हादसे का शिकार हुई नेहा का परिवार इसी क्षेत्र में किराए पर रहता है। उनका यह परिवार टीन की छत वाले बेहद छोटे कमरों में गुजर-बसर करता है। बच्ची के बोरवेल में गिरने की सूचना मिलते ही सबसे पहले उनके ही बच्चों ने उसे बचाने के गंभीर प्रयास किए थे। बच्चों ने बोरवेल के भीतर रस्सी डालकर उसे निकालने की कोशिश की थी और मौके पर रोशनी के लिए जो लाइट लगाई गई थी, वह भी उन्हीं बच्चों द्वारा प्रबंधित की गई थी। इसके अलावा स्थानीय निवासी अजय ने जानकारी दी कि बच्ची के पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं और जैसे ही इस दुर्घटना की सूचना मिली, प्रशासन की पूरी टीम मौके पर आ गई थी जिसके बाद बच्ची को बाहर निकालने के लिए फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था।





















