अगर दिल में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो और बुलंदियों को छूने की जिद हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता आपकी राह नहीं रोक सकती। इस बात को सीकर जिले के रहने वाले विवेक जोशी ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट दृढ़ संकल्प से सच साबित कर दिखाया है। मूल रूप से श्रीमाधोपुर के रहने वाले विवेक ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल जिले में स्थित बरालाचा ला दर्रे पर अपनी जीत का परचम लहराया है। उन्होंने लगभग 6,111 मीटर यानी करीब 20,049 फीट की ऊंचाई वाले माउंट यूनम शिखर पर पहुंचकर देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। माउंट यूनम की गिनती देश की सबसे चुनौतीपूर्ण और ऊंची चोटियों में की जाती है।
मौसम की दुश्वारियों और बर्फीले तूफानों का सामना
इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में मौसम बेहदโหด रहता है और तापमान अक्सर गिरकर माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अपना यह साहसिक अभियान पूरा करने के बाद विवेक जोशी सकुशल श्रीमाधोपुर लौट आए हैं। अपनी इस रोमांचक यात्रा के बारे में उन्होंने विस्तार से अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह 18 अगस्त को अपनी इस यात्रा के लिए जयपुर से रवाना हुए थे और अगले ही दिन 19 अगस्त को मनाली पहुंच गए थे। हालांकि, मनाली पहुंचते ही मौसम ने अचानक करवट ली और हालात काफी खराब हो गए। वहां लगातार भारी बारिश और बर्फबारी का दौर चल रहा था, ऐसे में बिना रुके इस मिशन पर आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं था।
सबकी मनाही के बावजूद हौसला नहीं छोड़ा
विवेक ने आगे बताया कि लगातार हो रही बर्फबारी और खराब मौसम को देखते हुए कई लोगों ने उन्हें सलाह दी थी कि वे फिलहाल अपने इस अभियान को टाल दें या रोक दें। लेकिन विवेक का इरादा पूरी तरह पक्का था और वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि इन विपरीत परिस्थितियों में भी वह अपने तय लक्ष्य को हासिल करके ही रहेंगे। इसके बाद वह अपनी पूरी टीम के साथ इस कठिन पर्वतारोहण मिशन पर आगे बढ़ गए। कड़ाके की ठंड और लगातार गिरती बर्फ के बीच उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता और अब तक की प्रैक्टिस पर भरोसा बनाए रखा। पहाड़ी पर जमा देने वाली माइनस 15 डिग्री की ठंड में एक-एक कदम आगे बढ़ाना बहुत बड़ी चुनौती बन गया था।
सफलता का शिखर और अगला बड़ा सपना
तमाम बाधाओं को पार करते हुए आखिरकार 23 अगस्त की सुबह 8 बजकर 33 मिनट पर विवेक माउंट यूनम की चोटी पर पहुंचने में सफल रहे। लगभग 20,100 फीट की ऊंचाई पर और इतनी विषम परिस्थितियों के बीच उन्होंने देश का तिरंगा शान से फहराया। विवेक का मानना है कि यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे उनकी सालों की कड़ी मेहनत और पर्वतारोहण के प्रति उनका गहरा जुनून है। इससे पहले उन्होंने 2 जून को करीब 15,250 फीट ऊंचे रुपीन पास शिखर को भी फतह किया था और वहां भी तिरंगा फहराया था। एक के बाद एक कठिन अभियानों में सफलता मिलने के बाद उन्होंने माउंट यूनम को अपने अगले बड़े लक्ष्य के रूप में चुना था। अब उनका अगला और सबसे बड़ा सपना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है।



















