कानून के रखवालों से हमेशा आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद की जाती है, लेकिन सोनीपत में घटी एक हालिया घटना ने इस भरोसे को बुरी तरह तोड़ दिया है। एक बेहद चौंकाने वाले खुलासे में यह बात सामने आई है कि खाकी वर्दी पहनने वाले एक पूर्व पुलिसकर्मी ने ही बड़ी लूटपाट की साजिश रची थी। अपनी पुरानी वर्दी की धौंस और रसूख का गलत इस्तेमाल करते हुए इस अपराधी ने 12 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम लूट ली। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और हाईवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक्सप्रेसवे पर बिछाया गया शातिर जाल
यह पूरी खौफनाक वारदात सोनीपत के केजीपी पेरिफेरल जीरो प्वाइंट पर अंजाम दी गई, जो भारी यातायात वाला एक प्रमुख इलाका है। बदमाशों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने शिकार को फंसाया। आरोपियों ने एक ऐसे वाहन चालक को अपना निशाना बनाया जिसके पास बड़ी मात्रा में नकदी थी। पुलिस की वर्दी पहने इन बदमाशों ने चेकिंग का बहाना बनाकर गाड़ी को रुकने का इशारा किया। चालक को लगा कि यह कोई सामान्य पुलिस जांच है, इसलिए उसने बिना किसी शक के अपनी गाड़ी तुरंत रोक दी।
जैसे ही गाड़ी रुकी, फर्जी पुलिस वालों ने वाहन की तलाशी का नाटक शुरू कर दिया। वाहन की सघन जांच करने के बहाने उन्होंने पूरे केबिन को खंगाला और उनका ध्यान सीधे नकदी वाले हिस्से पर गया। पलक झपकते ही अपराधियों ने 12 लाख रुपये से भरा वह बैग अपने कब्जे में ले लिया और मौके से फरार हो गए। जब तक पीड़ित चालक को इस बड़े धोखे का एहसास होता, तब तक लुटेरे उसकी आंखों से पूरी तरह ओझल हो चुके थे।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और चौंकाने वाला मकसद
हाईवे पर हुई इस दुस्साहसिक लूट के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। इस उलझे हुए मामले को सुलझाने का जिम्मा राई थाना और स्पेशल एंटी गैंगस्टर यूनिट सेक्टर 7 की संयुक्त टीम ने उठाया। पुलिस ने आधुनिक तकनीकी जांच और अपने खुफिया नेटवर्क की मदद से अपराधियों की लोकेशन ट्रेस की। सटीक सूचना के आधार पर ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए पुलिस ने इस घटना में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
जब पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की, तो अपराध के पीछे की असल वजह सामने आ गई। यह स्पष्ट हो गया कि इस पूरी लूटकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस से निकाला गया एक हेड कांस्टेबल था। जांच अधिकारियों ने बताया कि इस बर्खास्त जवान पर भारी कर्ज चढ़ गया था। अपनी इस आर्थिक परेशानी और उधारी को जल्द से जल्द चुकाने के लिए ही उसने अपराध का रास्ता चुना।
रिमांड और आगे की जांच की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम पर मलकीत सिंह ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि केजीपी पेरिफेरल जीरो प्वाइंट पर हुई 12 लाख की लूट का सरगना गिरफ्तार किया जा चुका है। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी से पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है, लेकिन मामले की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान लूटी गई 12 लाख रुपये की भारी रकम को जल्द से जल्द बरामद करने पर लगा हुआ है। इसके साथ ही, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास भी गहराई से खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि क्या इन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। जांच टीम अब आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है, जिससे इस गिरोह के अन्य मददगारों का भी पर्दाफाश हो सके।



















