बारिश और मौसम में आए बदलाव के कारण जोधपुर शहर में वायरल बुखार, सर्दी और जुकाम के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। शहर के प्रमुख चिकित्सा केंद्र मथुरादास माथुर अस्पताल में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और संदिग्ध मरीजों पर पैनी नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि फिलहाल जोधपुर में स्थिति नियंत्रण में है और किसी नए खतरनाक वायरस या स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है।
मौसम में बदलाव के कारण बढ़ा बीमारियों का असर
मथुरादास माथुर अस्पताल के अधीक्षक विकास राजपुरोहित के अनुसार, बारिश के बाद वातावरण और तापमान में होने वाला बदलाव कई तरह के संक्रमणों को सक्रिय कर देता है। ऐसे समय में लोगों में सर्दी, जुकाम और मौसमी बुखार के लक्षण दिखना एक सामान्य प्रक्रिया है। देश के कुछ अन्य हिस्सों में इन्फ्लुएंजा वायरस और एच1एन1 के मामले रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन जोधपुर जिले में ऐसा कोई नया वेरिएंट या नया स्ट्रेन नहीं मिला है। वर्तमान में अस्पताल आने वाले अधिकतर मरीजों में सामान्य मौसमी संक्रमण और बुखार ही देखने को मिल रहा है।
ओपीडी से वार्ड तक सर्विलांस और जांच व्यवस्था मजबूत
मौसमी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी के साथ-साथ भर्ती मरीजों की निगरानी बढ़ा दी है। चिकित्सा दल और डॉक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि किसी विशेष इलाके या मरीजों के समूह में बुखार के मामले अचानक बढ़ते दिखें, तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें। संदिग्ध रोगियों की सघन जांच के बाद उनके सैंपल माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भेजे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त मेडिसिन विभाग की टीम के साथ भी निरंतर तालमेल बिठाया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की पहचान शुरुआती चरण में ही की जा सके।
हाई रिस्क ग्रुप रखें विशेष ध्यान, न हों पैनिक
अस्पताल अधीक्षक विकास राजपुरोहित ने आम जनता से अपील की है कि मौसमी बुखार को लेकर घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। सामान्य सावधानियां बरतने से ही संक्रमण पर काबू पाया जा सकता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को हाई रिस्क ग्रुप में रखा गया है और उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने, हाथों की नियमित सफाई करने और बाहर निकलने पर मास्क लगाने का परामर्श दिया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौसमी संक्रमण का यह दौर अगले 15 से 20 दिनों में धीमा पड़ जाएगा। फिर भी, यदि बुखार या जुकाम 2 से 3 दिनों में ठीक न हो, तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना अनिवार्य है।



















