जापानी येन में आई मजबूती, अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले 20-डे मूविंग एवरेज के नीचे अटका USD/JPYराजस्थान में नई गौशाला की स्थापना और गोपालन विभाग से सहायता राशि लेने का ऑनलाइन तरीकास्वयं पोर्टल से जुड़े ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 4 नए पीजी कोर्स, 31 अगस्त तक आवेदन का मौकामहंगाई के आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर में तेजी, न्यूजीलैंड डॉलर नए साप्ताहिक निचले स्तर पर गिराजर्मनी के मजबूत आंकड़ों से यूरो को मिला सहारा, ब्रिटिश पाउंड के खिलाफ स्थिर दायरे में कारोबारहिमाचल के मंडी में जमीन धंसने से तिलक राम के घर पर मंडराया खतरा, टनल ब्लास्टिंग की जांच की मांगअमेरिका के लुइसियाना में बनेगा दुनिया का सबसे विशाल रॉकेट लॉन्च सेंटर, इलॉन मस्क की स्पेसएक्स करेगी 100 अरब डॉलर का निवेशपाली के प्रमुख बाजारों में रक्षाबंधन की खरीदारी का माहौल, पारंपरिक पोशाक से लेकर डिजाइनर राखियों की बड़ी वैरायटी उपलब्धउत्तर प्रदेश के सिजहरी गांव में मूसलाधार बारिश के दौरान ढहा कच्चा मकान, मलबे में दबकर बुजुर्ग दंपत्ति की दर्दनाक मौतमाता का थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जोधपुर में 4 घर खंगालने वाले सिकलीगर गिरोह के 3 शातिर दबोचे
जीएसवीएम के एलएलआर अस्पताल का 1300 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प, 2000 बेड और तीन नए ब्लॉक से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहतस्वास्थ्य
26 अग॰ 2026, 12:09 pm (1 घंटे पहले)· 2

जीएसवीएम के एलएलआर अस्पताल का 1300 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प, 2000 बेड और तीन नए ब्लॉक से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

कानपुर का 1942 में बना एलएलआर (हैलट) अस्पताल 1300 करोड़ रुपये की लागत से एम्स की तर्ज पर नए सिरे से विकसित किया जाएगा। तीन अत्याधुनिक ब्लॉकों में 2000 बेड और ओंकोलॉजी जैसे नए विभागों की व्यवस्था से 10 जिलों के लाखों मरीजों को राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में वर्ष 1942 में स्थापित शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एलएलआर (हैलट) का जल्द ही पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है। जर्जर हो चुकी इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इस चिकित्सा संस्थान का पुनर्विकास एम्स की तर्ज पर करने की योजना तैयार की गई है। करीब 1300 करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार होने वाले इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर से कानपुर शहर की 50 लाख से अधिक आबादी और आसपास के 10 जिलों के मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज की सुविधा मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत अस्पताल परिसर में लगभग दो हजार आधुनिक बेड की सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे गंभीर मरीजों को बेड मिलने में आ रही दिक्कतों का स्थायी समाधान हो सकेगा।

जर्जर भवनों की समस्या और नए निर्माण को मिली मंजूरी

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल का मौजूदा ढांचा अत्यधिक पुराना हो चुका है। वर्तमान में यह अस्पताल लगभग 27,500 वर्गमीटर के विशाल भूभाग में वार्ड नंबर 1 से लेकर वार्ड 18 तक फैली पुरानी इमारतों में संचालित किया जा रहा है। समय बीतने के साथ-साथ इन ढांचों की स्थिति खराब होती गई, जबकि दूसरी ओर इलाज के लिए आने वाले मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता गया। प्रतिदिन हजारों की संख्या में पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को जर्जर भवनों के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। परिसर में भवनों के जर्जर होने से कई बार हादसे भी सामने आ चुके थे, जिसको लेकर मरीज और तीमारदार लगातार शिकायतें दर्ज कराते रहे थे।

ये भी पढ़ें

अस्पताल की इन गंभीर समस्याओं को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने राज्य सरकार के समक्ष विस्तृत पुनर्विकास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इस मामले में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास भी तेज किए गए। कानपुर के भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी और एमएलसी अरुण पाठक ने अस्पताल की बदहाली और मरीजों की दिक्कतों को प्रमुखता से शासन के समक्ष उठाया। इन प्रयासों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने एलएलआर अस्पताल के नए सिरे से निर्माण और इसके लिए 1300 करोड़ रुपये के बजट को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है।

एम्स की तर्ज पर बनेंगे तीन प्रमुख आधुनिक ब्लॉक

स्वीकृत योजना के अनुसार, पुराने और जर्जर भवनों को हटाकर अस्पताल परिसर में तीन विशाल और आधुनिक ब्लॉक बनाए जाएंगे। संपूर्ण चिकित्सा सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए पूरे परिसर को सर्जिकल ब्लॉक, मेडिसिन ब्लॉक और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में विभाजित किया जाएगा। इन इमारतों को नई तकनीक और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जाएगा, जिससे अलग-अलग विभागों में इलाज की प्रक्रिया बेहद सुगम हो जाएगी। अलग-अलग ब्लॉक बनने से मरीजों, एम्बुलेंस और तीमारदारों का आवागमन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आसान होगा।

डॉ. संजय काला के अनुसार, अस्पताल में वर्तमान समय में करीब तीन हजार बेड की क्षमता होने के बावजूद रोजाना आने वाले मरीजों की भारी तादाद के कारण बेड कम पड़ जाते थे और कई बार मरीजों को बेड के बिना इंतजार करना पड़ता था। नए निर्माण के माध्यम से लगभग दो हजार बेड का एक अत्याधुनिक, सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त ढांचा तैयार किया जाएगा। नया परिसर न केवल मरीजों को संक्रमण से बचाएगा बल्कि उन्हें एक स्वच्छ, सुव्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण में त्वरित इलाज प्रदान करने में मदद करेगा।

10 जिलों के मरीजों को राहत और ओंकोलॉजी विभाग का विस्तार

एलएलआर अस्पताल केवल कानपुर शहर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आसपास के लगभग 10 जिलों से आने वाले गंभीर मरीजों के लिए भी सबसे बड़ा सहारा है। प्रतिदिन इन जिलों से बड़ी संख्या में आपातकालीन और गंभीर स्थितियों में मरीज यहां रेफर होकर आते हैं। नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के बाद इन सभी बाहरी जिलों के मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

प्राचार्य डॉ. संजय काला ने यह भी स्पष्ट किया कि नए तीन ब्लॉकों के निर्माण के बाद अस्पताल परिसर में जो खाली जगह बचेगी, उसका उपयोग नए सुपर-स्पेशलिटी विभागों को शुरू करने में किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से ओंकोलॉजी (कैंसर विज्ञान) समेत अन्य अत्यंत आवश्यक चिकित्सा विभागों का संचालन शुरू किया जाएगा। इस कदम से कानपुर और आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के मरीजों को कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली जैसे दूसरे बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।

सवाल-जवाब

कानपुर में एलएलआर अस्पताल के पुनर्विकास पर कितनी लागत आएगी?
एलएलआर अस्पताल के पुनर्विकास और एम्स की तर्ज पर नई इमारतें बनाने के लिए शासन ने 1,300 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
नए एलएलआर अस्पताल परिसर में मरीजों के लिए कितने बेड की व्यवस्था होगी?
पुनर्विकसित अस्पताल में करीब 2,000 अत्याधुनिक बेड की व्यवस्था की जाएगी, जिससे मरीजों को बेड की कमी से राहत मिलेगी।
नए एलएलआर अस्पताल परिसर में कौन-कौन से मुख्य ब्लॉक बनाए जाएंगे?
अस्पताल परिसर में तीन मुख्य आधुनिक ब्लॉक बनाए जाएंगे: सर्जिकल ब्लॉक, मेडिसिन ब्लॉक और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक।
इस नए अस्पताल का फायदा किन क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगा?
कानपुर शहर की 50 लाख से अधिक आबादी के साथ-साथ आसपास के लगभग 10 जिलों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
निर्माण के बाद बची जगह पर कौन से नए विभाग शुरू किए जाएंगे?
तीन मुख्य ब्लॉकों के निर्माण के बाद बची जमीन पर ओंकोलॉजी (कैंसर विभाग) समेत अन्य आवश्यक सुपर-स्पेशलिटी विभागों का संचालन शुरू किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR