क्या आपकी सबसे पसंदीदा जीन्स अब कमर पर अटकने लगी है, जबकि आप खानपान और कसरत में पहले जैसी ही मेहनत कर रहे हैं? अगर हां, तो घबराइए मत, यह आपके अकेले के साथ नहीं हो रहा। 40 का आंकड़ा छूते ही शरीर की मशीनरी अलग ढंग से काम करने लगती है। इस मोड़ पर मांसपेशियां घटने और चर्बी बढ़ने लगती है, और लगने लगता है मानो शरीर हमारे ही खिलाफ खड़ा हो गया हो। अच्छी खबर यह है कि कुछ आसान और तर्कसंगत बदलावों से इस उम्र में भी एक टोंड और ऊर्जा से भरी बॉडी दोबारा पाई जा सकती है, वो भी बिना खुद को भूखा रखे।
40 के बाद आखिर शरीर में बदलता क्या है
इस उम्र में वजन चढ़ने की जड़ में मुख्य रूप से दो वजहें हैं। पहली, हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ना और दूसरी, पाचन शक्ति यानी मेटाबॉलिज्म का धीमा पड़ जाना। महिलाओं में 'एस्ट्रोजन' और पुरुषों में 'टेस्टोस्टेरोन' का स्तर गिरने लगता है। नतीजा यह होता है कि शरीर की ताकतवर मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं और उनकी जगह फैट जमा होने लगता है।
इसे आसान भाषा में समझें तो शरीर में सबसे ज्यादा कैलोरी जलाने का काम मांसपेशियां ही करती हैं। जैसे ही मांसपेशियां कम होती हैं, मेटाबॉलिज्म खुद ब खुद सुस्त पड़ जाता है और खाया हुआ भोजन पचने के बजाय चर्बी में तब्दील होने लगता है। इस पर ऑफिस की भागदौड़, घर परिवार की जिम्मेदारियां और दिनभर की थकान मिलकर 'स्ट्रेस हॉर्मोन' यानी कोर्टिसोल को बढ़ा देती हैं, जो खासकर पेट के आसपास चर्बी इकट्ठा करने में सबसे आगे रहता है। यही कारण है कि जब पुराने तौर तरीके बेअसर लगने लगें, तो लाइफस्टाइल में नए नियम जोड़ने का समय आ जाता है।
दोबारा फिट होने के 5 असरदार बदलाव
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में पक्की जगह दें
अब केवल कार्डियो या टहलने से काम नहीं चलेगा। 40 के बाद सबसे जरूरी है मौजूदा मांसपेशियों को बचाना और नई मसल्स तैयार करना। हफ्ते में कम से कम 2 से 3 दिन वेट ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज, जैसे पुश-अप्स और स्क्वाट्स, जरूर करें। शरीर में जितनी ज्यादा मांसपेशियां होंगी, मेटाबॉलिज्म उतनी ही तेजी से कैलोरी जलाएगा।
प्रोटीन बढ़ाएं, क्रैश डाइट से दूर रहें
वजन घटाने के चक्कर में खुद को भूखा रखने की गलती कतई न करें, क्योंकि क्रैश डाइट मेटाबॉलिज्म को और बिगाड़ देती है। इसके बजाय अपनी थाली में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें, जैसे दालें, पनीर, अंडे, चिकन और टोफू। प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और मांसपेशियों की रिकवरी भी तेज करता है।
7 से 8 घंटे की नींद पर कोई समझौता नहीं
नींद कम लेने पर शरीर में भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन घ्रेलिन सक्रिय हो जाता है, जिससे गैरजरूरी और अनहेल्दी क्रेविंग्स पैदा होती हैं। रात में 7 से 8 घंटे की गहरी नींद उतनी ही अहम है जितनी आपकी कसरत, क्योंकि यही नींद हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है।
तनाव को काबू में रखें
तनाव वजन घटाने की राह का सबसे बड़ा रोड़ा है। कोर्टिसोल को नियंत्रण में रखने के लिए रोजाना 15 से 20 मिनट वॉकिंग, मेडिटेशन, योगा या अपनी कोई पसंदीदा हॉबी जैसे गार्डनिंग या जर्नल लिखने को समय दें। शांत मन वाला शरीर फैट कहीं तेजी से जलाता है।
कामयाबी का पैमाना धीरे धीरे तय करें
40 के बाद रातोंरात वजन घटने की उम्मीद छोड़ दीजिए। केवल तराजू की सुई देखने के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि आपकी ताकत कितनी बढ़ी, आपकी ऊर्जा कैसी है और आपके पुराने कपड़े अब कितने फिट बैठ रहे हैं। इस उम्र में धीमा लेकिन लगातार होने वाला वजन घटाव ही टिकाऊ साबित होता है।
निष्कर्ष
याद रखें, 40 के बाद वजन बढ़ना कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर का एक स्वाभाविक दौर है। घबराने के बजाय अपने शरीर की नई जरूरतों को समझिए, इन 5 आदतों को जिंदगी का हिस्सा बनाइए और एक बार फिर अपनी मनपसंद फिट बॉडी तथा शानदार एनर्जी हासिल कीजिए।













