आज के दौर में कामकाज का भारी दबाव, बार-बार बजने वाली फोन की घंटियाँ, व्हाट्सएप और ईमेल के नोटिफिकेशन्स, गृहस्थी और वाहन के कर्ज, बच्चों के भविष्य की चिंता और चारों तरफ का कोलाहल मिलकर कई बार मानसिक स्थिति को पूरी तरह उलझा देते हैं। कार्यालय में काम करते-करते कई बार ऐसा अहसास होता है कि सिर भारी हो चुका है, विचारों में शून्यता आ गई है और किसी भी विषय पर तार्किक ढंग से सोचने की क्षमता पूरी तरह क्षीण हो चुकी है। यदि आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपका मस्तिष्क मेंटली ओवरस्टिमुलेटेड हो चुका है और उसे तत्काल विश्राम की आवश्यकता है।
ओवरस्टिमुलेशन की वजह और उसके लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक अत्यधिक उत्तेजना या ओवरस्टिमुलेशन तब पैदा होती है जब हमारे मस्तिष्क को एक ही समय में क्षमता से अधिक सूचनाओं और उत्तेजनाओं को संभालना पड़ता है। लगातार कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर टिके रहना, अत्यधिक शोरगुल, बार-बार सहकर्मियों या अन्य लोगों द्वारा टोकना, काम की कड़ी समयसीमा और एक साथ कई मोर्चों पर विचार करना, ये सभी कारक मिलकर मानसिक ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेते हैं। इस स्थिति में छोटी-छोटी बातों पर बेवजह चिढ़ पैदा होना, मानसिक थकान, विचारों का उलझाव, निर्णय लेने में कठिनाई आना और झुंझलाहट महसूस होना बेहद आम बात हो जाती है। कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि अब मस्तिष्क में किसी भी नए विचार के प्रवेश के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं बची है। राहत की बात यह है कि यह किसी प्रकार की गंभीर बीमारी का लक्षण नहीं है, बल्कि केवल इस बात का परिचायक है कि आपका मस्तिष्क अपनी सीमा तक थक चुका है और उसे तुरंत रीसेट होने की जरूरत है।
बिना छुट्टी लिए डेस्क पर करें माइंड रीसेट
अब मुख्य प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि जब कार्यालय में कार्यों का विशाल ढेर लगा हो और समय की कमी हो, तो ऐसी स्थिति में लंबा अवकाश कैसे लिया जा सकता है? इसका सीधा और व्यावहारिक समाधान यह है कि आपको किसी भी प्रकार के लंबे ब्रेक की आवश्यकता ही नहीं है। आप अपनी कार्य डेस्क पर बैठे-बैठे ही, बिना अपने कार्य को रोके, अपने मस्तिष्क को तुरंत शांत और रीसेट कर सकते हैं। इसके लिए यहां सात बेहद आसान और असरदार उपाय बताए जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप अपनी मानसिक स्थिति को फिर से तरोताजा कर सकते हैं।
गुनगुनी चाय या पानी का सेवन करें
जब भी आपको ऐसा महसूस हो कि आपका मस्तिष्क ठीक से कार्य नहीं कर रहा है, तो अपनी बैठने की मुद्रा में थोड़ा बदलाव लाएं और अपनी सीट पर ही ध्यान केंद्रित करें। एक कप हल्की चाय, ग्रीन टी या फिर कार्यस्थल पर आसानी से उपलब्ध गुनगुने पानी का एक गिलास अपने पास रखें। इस पेय पदार्थ का सेवन करते समय अपना पूरा ध्यान उसकी गर्ماहट और उसके स्पर्श के अहसास पर केंद्रित करें। जब आप अपने संपूर्ण ध्यान को उस पेय के तापमान और स्वाद पर ले जाते हैं, तो मस्तिष्क तुरंत अत्यधिक सोचने यानी ओवरसोचिंग की स्थिति से बाहर निकलकर शांत होने की प्रक्रिया की ओर अग्रसर हो जाता है।
एक समय में केवल एक ही काम करें
एक ही समय में कई कार्यों को एक साथ करने यानी मल्टीटास्किंग की आदत मस्तिष्क की संपूर्ण ऊर्जा को तेजी से सोख लेती है और उसे अल्प समय में ही पूरी तरह थका देती है। जैसे ही आपको मानसिक ओवरस्टिमुलेशन का आभास हो, तत्काल मल्टीटास्किंग की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दें। जो कार्य आपकी सूची में सबसे अधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य है, अपना पूरा फोकस केवल उसी एक कार्य पर रखें। अपने आसपास फैली हुई गैर-जरूरी वस्तुओं और मोबाइल फोन को कुछ पलों के लिए अपनी नजरों से दूर हटा लें ताकि मस्तिष्क को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त तनाव या दबाव न झेलना पड़े।
श्वास लेने की तकनीक और पैटर्न बदलें
श्वसन प्रक्रिया में यह छोटा सा बदलाव आपके तंत्रिका तंत्र को तत्काल यह संकेत प्रेषित करता है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सब कुछ सुरक्षित है। इसके लिए आप बॉक्स ब्रीदिंग तकनीक का सहारा ले सकते हैं, जो आपके दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने में बेहद मददगार साबित होती है। इस प्रक्रिया के तहत चार सेकंड तक गहरी सांस को अपने फेफड़ों के भीतर खींचें, तत्पश्चात चार सेकंड का ठहराव रखते हुए बहुत ही धीमी गति से उस सांस को बाहर छोड़ें। इस क्रिया को तीन से चार बार लगातार दोहराने से आपके मस्तिष्क को सुरक्षा का स्पष्ट संकेत मिलता है और आपकी बढ़ी हुई हृदय गति पूरी तरह सामान्य हो जाती है।
ठंडे पानी से मानसिक झटके का प्रयोग करें
यदि आपको ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपका सिर अत्यधिक भारी हो चुका है और विचारों का बोझ संभालना मुश्किल है, तो तुरंत अपने कार्यस्थल के वॉशरूम में जाकर चेहरे पर ठंडे पानी के तेज छींटे मारें। इसके अलावा आप बर्फ के टुकड़े या किसी ठंडी पानी की बोतल को लगभग तीस सेकंड के लिए अपने दोनों हाथों में कसकर पकड़ सकते हैं। ऐसा करने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है, जो दिल की धड़कनों की गति को नियंत्रित कर धीमा करता है और मस्तिष्क को एक ही पल में पूरी तरह तरोताजा एवं ऊर्जावान बना देता है।
मस्तिष्क में घूम रहे विचारों को कागज पर उतारें
जब आपके मन और मस्तिष्क में अनगिनत कार्य, चिंताएं और उलझनें एक साथ चक्रवात की तरह घूम रही हों, तो उन्हें बाहर निकालना अत्यंत अनिवार्य हो जाता है। एक सादी डायरी या पेन और कागज का टुकड़ा लें तथा अपने सभी लंबित कार्यों और उलझनों को एक-एक करके लिखना शुरू कर दें। जब आप मानसिक रूप से चल रही उन बातों को भौतिक रूप से कागज पर दर्ज कर लेते हैं, तो मस्तिष्क की कार्यशील स्मृति यानी वर्किंग मेमोरी खाली हो जाती है। इसके पश्चात आप अपनी उन लिखी हुई सूचियों के आधार पर एक-एक करके अपने कार्यों को उनकी प्राथमिकता के अनुसार व्यवस्थित कर पाते हैं।
अपने आसपास के संवेदी परिवेश को बदलें
आपके सिर के ठीक ऊपर जल रही अत्यधिक तेज कृत्रिम लाइटें आपके थके हुए मस्तिष्क को और अधिक थका सकती हैं और आपकी आँखों पर दबाव डाल सकती हैं। यदि संभव हो तो अपने कार्यक्षेत्र की तेज रोशनी को थोड़ा मंद करें या कुछ समय के लिए उस लाइट को बंद कर दें। इसके साथ ही आप अपने कानों में इयरफोन लगाकर हल्की ब्राउन नॉइज़ या कोई शांत करने वाला इंस्ट्रूमेंटल संगीत सुन सकते हैं। यदि आप बहुत लंबे समय से एक ही निर्धारित स्थिति में बैठे हुए हैं, तो थोड़ा उठकर अपने शरीर को हल्का-फुल्का हिलाएं-डुलाएं और स्ट्रेच करें।
मांसपेशियों के तनाव को जानबूझकर बाहर निकालें
अपनी कार्य डेस्क पर बैठे-बैठे ही शरीर के किसी विशेष हिस्से, जैसे कि पैरों की पिंडलियों की मांसपेशियों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें। एक लंबी और गहरी सांस अंदर लें तथा अगले पांच से दस सेकंड के लिए उस विशेष हिस्से की मांसपेशियों को पूरी ताकत के साथ आपस में कसकर भींच लें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए उन मांसपेशियों को एकदम ढीला और शिथिल छोड़ दें। यह बेहद छोटी और सरल सी शारीरिक एक्सरसाइज आपके शरीर और मस्तिष्क में लंबे समय से जमा हुए समस्त आंतरिक तनाव को एक ही झटके में पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा देती है।
निष्कर्ष और प्रभावी वापसी
अगली बार जब भी आपको अत्यधिक कार्यभार, डेडलाइन के दबाव या आसपास के निरंतर शोर-शराबे की वजह से ऐसा अनुभव हो कि आपका मस्तिष्क ओवरलोड की स्थिति में पहुँच चुका है, तो कार्य को बीच में छोड़कर घबराकर भागने के बजाय इनमें से किसी भी एक उपाय को तुरंत आजमाकर देखें। कार्य अपनी नियत जगह पर ही रहेगा, लेकिन इन बेहद सरल और वैज्ञानिक तरीकों से आप पूरी तरह साफ, शांत और नए सिरे से ऊर्जावान फोकस के साथ अपने कार्य की दुनिया में दोबारा वापस लौट पाएंगे।



















