रास्ते में अचानक किसी आक्रामक या भौंकते हुए कुत्ते के सामने आ जाने पर अधिकतर लोगों की पहली स्वाभाविक प्रतिक्रिया घबराकर दौड़ लगाने की होती है। इस तरह का डर और हड़बड़ाहट समस्या को हल करने के बजाय स्थिति को और अधिक खतरनाक बना देती है, क्योंकि भागने की कोशिश जानवर के भीतर शिकार का पीछा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को भड़का सकती है। कुत्तों के बुनियादी व्यवहार को समझना, संकट के क्षणों में अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखना और सही शारीरिक मुद्रा अपनाना ही सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है। यह सतर्कता बच्चों के संदर्भ में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि छोटे बच्चे जानवरों के गुस्से, तनाव या चेतावनी भरे संकेतों को भांपने में असमर्थ होते हैं। कई बार परिवार यह मान लेते हैं कि उनका अपना पालतू जानवर हर स्थिति में बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, जबकि यह धारणा किसी भी अप्रिय हादसे को जन्म दे सकती है। अचानक सामने आए खतरे से निपटना, जमीन पर गिर जाने की दशा में महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करना और किसी खरोंच अथवा घाव के बाद जरूरी मेडिकल प्रक्रिया का पालन करना हर नागरिक के लिए जानना बेहद आवश्यक है।
अचानक कुत्ता सामने आ जाए तो घबराए बिना उठाएं ये कदम
जब भी कोई अपरिचित कुत्ता अचानक आपकी तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे, तो उस क्षण सबसे जरूरी नियम यह है कि आप अपनी जगह पर स्थिर रहें और दौड़ लगाने की भूल बिल्कुल न करें। घबराहट में अचानक हाथ और पैर हिलाना, जोर से चिल्लाना या आक्रामक शारीरिक चेष्टाएं दिखाना जानवर को उकसा सकता है। इसके अलावा कुत्ते की आंखों में सीधी नजरें गड़ाकर देखना भी खतरे से खाली नहीं होता, क्योंकि जानवर इसे खुली चुनौती या सीधे खतरे के तौर पर देख सकते हैं। ऐसे हालात में अपने शरीर को सीधा सामने रखने के बजाय थोड़ा तिरछा या बगल की तरफ कर लें और सामान्य गति से बिना हड़बड़ाहट के पीछे हटने की कोशिश करें। कुत्ते को छूने, सहलाने या किसी वस्तु से उसे डराने की चेष्टा न करें। अगर आपके पास कोई बैग, छाता, जैकेट या अन्य कोई ठोस सामान मौजूद है, तो उसे कुत्ते और अपने शरीर के बीच एक ढाल की तरह रख लें। इस युक्ति का मुख्य उद्देश्य जानवर से उलझना या उस पर हमला करना नहीं होता, बल्कि दोनों के बीच एक भौतिक अवरोध खड़ा करना होता है ताकि कुत्ता सीधे आप तक न पहुंच सके।
सीधा हमला होने या जमीन पर गिर जाने पर बचाव की मुद्रा
अगर कुत्ता अत्यधिक उग्र होकर सीधा झपट पड़ता है, तो उस पर पलटवार करने या उसे पकड़ने की कोशिश में अपनी ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय पूरा ध्यान सिर्फ अपनी सुरक्षा पर केंद्रित रखना चाहिए। तेजी से दौड़ने से कुत्ते की हमलावर प्रवृत्ति और बढ़ जाती है। बच्चों को भी यही सिखाना जरूरी है कि वे किसी कुत्ते के पीछे पड़ने पर जोर-जोर से चीखने या उस पर पत्थर फेंकने जैसी हरकतें न करें, बल्कि शांत रहकर सुरक्षित दूरी बनाने का प्रयास करें। यदि हमले के दौरान कुत्ता आपको धक्का देकर जमीन पर गिरा देता है, तो कभी भी पेट के बल सीधे लेटकर हाथ-पैर फैलाने की गलती न करें। ऐसी परिस्थिति में अपने पूरे शरीर को सिकोड़कर बिल्कुल एक गेंद की तरह गोल मुद्रा बना लें। अपने घुटनों को छाती की तरफ खींचें और दोनों हाथों की हथेलियों तथा कोहनियों से अपने सिर, चेहरे और गर्दन को पूरी तरह ढक लें। इसके साथ ही अपने कानों को भी हाथों के बीच सुरक्षित रखें। यह सिकुड़ी हुई मुद्रा गले, चेहरे और पेट जैसे नाजुक तथा संवेदनशील अंगों को गंभीर चोटों से बचाने में बेहद मददगार साबित होती है।
बच्चों की सुरक्षा और अपरिचित जानवरों के प्रति सही व्यवहार
बच्चों की सुरक्षा के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सख्त जरूरत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र दोनों ही इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि किसी भी छोटे बच्चे को कभी भी कुत्तों के आसपास बिना किसी वयस्क की निगरानी के अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यह नियम केवल बाहर के लावारिस जानवरों पर ही नहीं, बल्कि घर के पालतू कुत्तों पर भी पूरी तरह लागू होता है। बच्चे खेल-खेल में कई बार कुत्ते की पूंछ या कान खींच देते हैं, उनके भोजन करने अथवा सोने के समय उन्हें तंग कर देते हैं, या फिर जानवर के तनावग्रस्त होने के लक्षणों को समझ नहीं पाते। किसी भी अपरिचित पालतू कुत्ते के नजदीक जाने या उसे छूने से पहले हमेशा उसके मालिक से स्पष्ट अनुमति लेनी चाहिए, और कुत्ते को खुद सूंघकर अपनी मर्जी से पास आने का अवसर देना चाहिए। अगर कोई कुत्ता बीमार दिख रहा हो, अत्यधिक डरा हुआ हो, गुर्रा रहा हो या अकेला एकांत में बैठना चाहता हो, तो उससे हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।
पालतू जानवरों के मालिकों की सामाजिक जिम्मेदारियां
कुत्तों के मालिकों के कंधों पर भी अपने जानवर के व्यवहार और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी हरकतों को लेकर एक बड़ी सामाजिक जवाबदेही होती है। घर से बाहर किसी भी सार्वजनिक जगह, पार्क या सड़क पर ले जाते समय कुत्ते को हमेशा मजबूत पट्टे से बांधकर रखना जरूरी है ताकि वह नियंत्रण में रहे। इसके साथ ही जानवरों का निर्धारित समय पर अनिवार्य टीकाकरण कराना चाहिए, जिससे संक्रमण का जोखिम शून्य किया जा सके। अपने पालतू जानवर को घर के सदस्यों, बाहरी अजनबियों और अन्य जानवरों के साथ शांत तथा सुरक्षित सामाजिक व्यवहार का उचित प्रशिक्षण देना चाहिए। एक जिम्मेदार मालिक की सजगता न केवल उसके अपने जानवर को सुरक्षित रखती है, बल्कि समाज में कुत्ते के काटने या आक्रामक घटनाओं की आशंका को भी काफी हद तक कम कर देती है।
काटने या खरोंचने पर तुरंत अपनाएं 15 मिनट वाला प्राथमिक नियम
यदि कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को काट ले या नाखूनों से खरोंच भी दे, तो उस निशान के बेहद मामूली या छोटा दिखने पर भी उसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, चोट लगने के तुरंत बाद प्रभावित हिस्से को नल के साफ बहते पानी और साबुन की मदद से कम से कम 15 मिनट तक लगातार और अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव की इस बुनियादी सफाई के फौरन बाद बिना किसी देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य चिकित्सक के पास जाएं, ताकि रेबीज के संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीके और उचित चिकित्सकीय उपचार तय किया जा सके। पुराने अंधविश्वासों या घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़कर घाव पर लाल मिर्च पाउडर, कड़े केमिकल, चूना या जड़ी-बूटियां लगाने से पूरी तरह बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और जलन का खतरा बढ़ जाता है। यदि संभव हो और आपकी सुरक्षा को कोई खतरा न हो, तो उस कुत्ते की पहचान, उसके मालिक का पता और जानवर के टीकाकरण की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाकर डॉक्टर को जरूर बताएं। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव में समय रहते घाव को धोना और तुरंत डॉक्टरी परामर्श लेना ही जीवन की रक्षा करता है।



















