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बच्चों की नींद से जुड़ी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानिए विशेषज्ञ की रायस्वास्थ्य
10 जुल॰ 2026, 1:18 am (111 दिन पहले)· 3

बच्चों की नींद से जुड़ी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानिए विशेषज्ञ की राय

आजकल की भागदौड़ भरी दिनचर्या में बच्चों की नींद पूरी न हो पाना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। डॉक्टर के अनुसार, नींद की कमी न केवल बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालती है।

वर्तमान समय की आपाधापी वाली जीवनशैली में बच्चों की स्लीपिंग साइकिल बुरी तरह प्रभावित हुई है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में कार्यरत न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. ज़ुबैर सरकार का कहना है कि अधिकांश अभिभावक बच्चों की नींद की कमी को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही बच्चे के सर्वांगीण विकास, विशेषकर मानसिक और शारीरिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

नींद का महत्व

पर्याप्त नींद बच्चों के मस्तिष्क के लिए अत्यंत आवश्यक है। जब बच्चा गहरी और सुकून भरी नींद लेता है, तो उसकी याददाश्त को बेहतर होने में मदद मिलती है। इसके अलावा, सही मात्रा में नींद नई अवधारणाओं को सीखने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को बढ़ाती है। शरीर के भीतर होने वाली प्राकृतिक प्रक्रियाओं में से एक ग्रोथ हार्मोन का स्राव है, जो नींद के दौरान ही सक्रिय होता है। यह हार्मोन बच्चों की लंबाई बढ़ाने के साथ-साथ उनकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

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नींद पूरी न होने के दुष्प्रभाव

नियमित रूप से नींद की कमी होने पर बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। सबसे पहले उनमें एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, गुस्सैल रवैया और छोटी-छोटी बातों को भूलने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नींद की कमी से मोटापा बढ़ने का जोखिम होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, बच्चा बार-बार संक्रमण या बीमारियों की चपेट में आने लगता है और भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

आयु के अनुसार नींद की आवश्यकता

हर उम्र के बच्चों को स्वस्थ रहने के लिए अलग-अलग अवधि की नींद लेनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार: 4 से 12 महीने के शिशुओं को झपकी समेत 12 से 16 घंटे की नींद लेनी चाहिए। 1 से 2 वर्ष के बच्चों के लिए 11 से 14 घंटे, 3 से 5 वर्ष के आयु वर्ग के लिए 10 से 13 घंटे, 6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए 9 से 12 घंटे और 13 से 18 वर्ष के किशोरों के लिए 8 से 10 घंटे की नींद अनिवार्य है।

नींद की गुणवत्ता में सुधार के उपाय

बच्चों की नींद को दुरुस्त करने के लिए माता-पिता को एक निश्चित दिनचर्या का पालन करना चाहिए, जिसमें समय पर सोने और जागने का अनुशासन हो। बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले सभी प्रकार की स्क्रीन जैसे मोबाइल, टैबलेट या टीवी से दूरी बनाना बहुत जरूरी है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी अच्छी नींद में सहायक होता है। हालांकि, अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी बच्चा दिनभर थकान महसूस करता है, सोते समय खर्राटे लेता है या उसे सोने में अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता है, तो ऐसी स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

सवाल-जवाब

बच्चों के लिए पर्याप्त नींद क्यों जरूरी है?
पर्याप्त नींद बच्चों की याददाश्त, सीखने की क्षमता, एकाग्रता और शारीरिक विकास के लिए जरूरी ग्रोथ हार्मोन बनाने में मदद करती है।
नींद की कमी के क्या लक्षण हो सकते हैं?
नींद की कमी से बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगा पाना, गुस्सैल स्वभाव और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों को कितनी नींद लेनी चाहिए?
4-12 महीने के शिशुओं को 12-16 घंटे, 1-2 साल के बच्चों को 11-14 घंटे, 3-5 साल के बच्चों को 10-13 घंटे, 6-12 साल के बच्चों को 9-12 घंटे और 13-18 साल के किशोरों को 8-10 घंटे की नींद जरूरी है।
सोने से पहले स्क्रीन टाइम क्यों कम करना चाहिए?
सोने से एक घंटे पहले मोबाइल या टीवी जैसे उपकरणों का उपयोग करने से नींद में बाधा आती है, इसलिए इन्हें बंद करना बेहतर होता है।
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