उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक विशेष औषधीय पेड़ इन दिनों लोगों के बीच कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस वृक्ष को बालम खीरा के नाम से जाना जाता है और स्थानीय लोग इसे पारंपरिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाली एक अमूल्य वनस्पति मानते हैं। इस पेड़ के फल, बीज और छाल को विभिन्न शारीरिक समस्याओं के समाधान के लिए उपयोगी माना जाता है। गुर्दे की पथरी के प्राकृतिक उपचार की तलाश में दूर-दूर के क्षेत्रों से लोग इस वृक्ष तक पहुंच रहे हैं। आयुर्वेद में भी प्राचीन काल से ही इस पौधे के औषधीय गुणों की सराहना की जाती रही है।
दुर्लभ पेड़ को देखने और फल पाने के लिए उमड़ रही भीड़
बलिया जनपद में यह पेड़ बहुत ही कम स्थानों पर देखने को मिलता है। इस वजह से इसे एक दुर्लभ प्राकृतिक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। लोग न केवल इस वृक्ष की झलक पाने के लिए आ रहे हैं, बल्कि इसके फलों और बीजों को औषधि के रूप में ले जाने के लिए भी उत्सुक रहते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार इस पौधे के लगभग सभी अंग औषधीय तत्वों से समृद्ध हैं। इसके फल का सूखा रूप जड़ी-बूटी बेचने वाली दुकानों पर मांग में रहता है, जहां लोग इसे स्वास्थ्य लाभ के लिए खरीदते हैं।
स्थानीय निवासियों और पेड़ के मालिक का क्या है कहना
बरवां गांव के निवासी विश्वनाथ वर्मा ने इस पेड़ की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह वृक्ष जीवन में दवा और दुआ दोनों की तरह काम करता है। उन्होंने जानकारी दी कि इसे विशेष रूप से पथरी के उपचार में सहायक माना जाता है। इस पेड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके विकास के लिए किसी खास रासायनिक खाद या अत्यधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे केवल देखभाल और सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि लोग बिना अनुमति के इसके फल तोड़कर ले जाने का प्रयास करते हैं।
इसी क्रम में बालम खीरा पेड़ के स्वामी सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि उनके यहां इस फल को औषधि के रूप में प्राप्त करने के लिए काफी दूर-दराज़ के इलाकों से लोग आते हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब यह फल सूख जाता है और पुराना हो जाता है, तब पंसारी की दुकानों पर इसकी मांग बढ़ जाती है और यह काफी ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।
पंसारी की दुकानों पर हजार रुपये किलो तक बिकता है फल
स्थानीय निवासी मुकेश चौहान ने क्षेत्र में इस वृक्ष की दुर्लभता पर जोर दिया। उनका कहना है कि पूरे बलिया जनपद में ऐसा पेड़ शायद ही कहीं और देखने को मिले। इस वजह से न केवल बलिया के विभिन्न कोनों से, बल्कि आसपास के पड़ोसी जिलों से भी लोग इसके औषधीय लाभ उठाने के लिए यहां पहुंचते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में इसकी मांग इतनी अधिक है कि जड़ी-बूटी या पंसारी की दुकानों पर सूखा बालम खीरा लगभग ₹1000 प्रति किलोग्राम तक की कीमत पर बिकता है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानिए सेवन के दो तरीके
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नगर बलिया में पांच वर्षों का अनुभव रखने वाली चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी ने बालम खीरा के उपयोग पर चिकित्सीय मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक रूप से सदियों से इसका इस्तेमाल किडनी की पथरी को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। डॉ. वंदना तिवारी ने इसके सेवन के मुख्य रूप से दो तरीके बताए हैं।
- बीजों का प्रयोग: इसके एक चम्मच बीजों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह इन बीजों को मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करें।
- फल का चूर्ण: इसके फलों को अच्छी तरह सुखाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण की तीन से पांच ग्राम मात्रा का नियमित सेवन किया जा सकता है।
उपचार के दौरान इन चीजों का परहेज है जरूरी
डॉ. वंदना तिवारी ने यह भी चेतावनी दी है कि मरीजों को बिना किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन शुरू नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में पथरी के इलाज के लिए कई अन्य दवाएं भी मौजूद हैं, इसलिए व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार डॉक्टर का परामर्श लेना बेहद जरूरी है, अन्यथा बिना सलाह सेवन से नुकसान हो सकता है।
पथरी के अलावा यह औषधि पेट की गैस और कब्ज की समस्या में भी राहत पहुंचाती है। इसके अलावा, इसकी छाल का चूर्ण शरीर के घावों को जल्दी भरने में भी मदद करता है। चिकित्सीय मान्यता के अनुसार यह औषधि पथरी को छोटे-छोटे कणों में तोड़ देती है, जिससे वे मूत्र मार्ग से होकर शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इसके सेवन की अवधि के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। साथ ही, मरीजों को बैंगन, टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियां (साग) और अधिक कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सख्त हिदायत दी जाती है।



















