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बार-बार एसिडिटी और ब्लोटिंग होना नहीं है सामान्य, जानिए पेट की इन तकलीफों के मुख्य 4 कारणस्वास्थ्य
29 जुल॰ 2026, 2:37 am (54 दिन पहले)· 0

बार-बार एसिडिटी और ब्लोटिंग होना नहीं है सामान्य, जानिए पेट की इन तकलीफों के मुख्य 4 कारण

अगर आप रोजाना पेट में गैस या जलन महसूस करते हैं तो इसे आम बात मानकर टालें नहीं। चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर बिमल छाजेर ने लगातार एसिडिटी और ब्लोटिंग के पीछे की मुख्य वजहों की जानकारी दी है।

मसालेदार या भारी भोजन करने के बाद कभी-कभार पेट में गैस बनना या बदहजमी महसूस होना एक सामान्य बात है। लेकिन जब यह समस्या रोजमर्रा की आदत बन जाए और हर दिन पेट फूलने या एसिडिटी की शिकायत रहने लगे, तो इसे साधारण मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक, एमबीबीएस और एमडी डॉक्टर बिमल छाजेर ने यूट्यूब पर एक वीडियो के माध्यम से बताया है कि लगातार गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग की शिकायत रहने के पीछे हमारे खानपान, जीवनशैली और मानसिक स्थिति से जुड़े कई अहम कारण हो सकते हैं।

खानपान की खराब आदतें और ट्रिगर फूड्स

लगातार पेट में गैस बनने का सबसे प्राथमिक और प्रत्यक्ष कारण हमारा दैनिक आहार होता है। हम रोजाना किस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, इसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। कुछ खास प्रकार के भोजन पेट में अत्यधिक गैस पैदा करने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, राजमा, पत्ता गोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी सब्जियों में ऐसे तत्व होते हैं जो पचने में समय लेते हैं और गैस का कारण बनते हैं। इसके अलावा, अधिक तला-भुना खाना, ऑयली फूड्स और कोल्डड्रिंक्स का नियमित सेवन भी पेट के भीतर एसिडिटी और गैस की समस्या को काफी बढ़ा देता है।

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भोजन करने का गलत तरीका

केवल यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि आप कैसे खा रहे हैं। अगर भोजन करने की आदतें सही नहीं हैं, तो पाचन क्रिया धीमी और कमजोर पड़ जाती है। जल्दी-जल्दी खाना खाना, भोजन चबाते समय बहुत अधिक बातें करना, एक ही बार में बहुत ज्यादा मात्रा में खाना खा लेना या फिर देर रात को भोजन करना जैसी आदतें पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। जब भोजन सही ढंग से नहीं पचता, तो आंतों में भोजन सड़ने लगता है और नतीजतन पेट फूलना, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है।

गट हेल्थ और बैक्टीरिया का असंतुलन

आंतों की सेहत यानी गट हेल्थ का ठीक रहना बेहतर पाचन के लिए बेहद जरूरी है। हमारी आंतों में दो तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिन्हें गुड बैक्टीरिया और बैड बैक्टीरिया कहा जाता है। जब डाइट में सुधार नहीं होता और लोग जंक फूड, प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड या अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने लगते हैं, तो आंतों का संतुलन बिगड़ने लगता है। अनहेल्दी डाइट की वजह से आंतों के गुड बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं और बैड बैक्टीरिया का प्रभाव बढ़ जाता है। इस असंतुलन के कारण पाचन शक्ति बेहद कमजोर हो जाती है, जिससे खाना पचना कठिन हो जाता है और पेट में एसिड व गैस जमा होने लगती है।

मानसिक तनाव और पेट का संबंध

शारीरिक आदतों के अलावा हमारी मानसिक स्थिति भी पेट की सेहत को गहराई से प्रभावित करती है। अत्यधिक तनाव और एंग्जायटी का गट हेल्थ पर बहुत बुरा असर पड़ता है। मानव शरीर में दिमाग और पेट के बीच एक सीधा न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन होता है। जब कोई व्यक्ति लगातार मानसिक तनाव में रहता है, तो यह कनेक्शन प्रभावित होता है, जिससे पेट में पाचक एसिड का निर्माण अचानक बढ़ जाता है। एसिड का यह अतिरिक्त रिसाव लगातार पेट में जलन, गैस और एसिडिटी का कारण बनता है। इसलिए पेट की इन समस्याओं से बचने के लिए खानपान के साथ-साथ तनाव प्रबंधन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

सवाल-जवाब

क्या रोजाना एसिडिटी होना किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकता है?
हां, अगर आपको हर दिन पेट में गैस या एसिडिटी हो रही है तो यह खराब गट हेल्थ, कमजोर पाचन क्रिया या अनहेल्दी लाइफस्टाइल का संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किन सब्जियों से पेट में गैस बनने की संभावना अधिक रहती है?
राजमा, पत्ता गोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसे खाद्य पदार्थ पचने में अधिक समय लेते हैं और पेट में गैस पैदा कर सकते हैं।
क्या तनाव के कारण भी एसिडिटी की समस्या हो सकती है?
हां, तनाव और एंग्जायटी से दिमाग और पेट के बीच का सिग्नल प्रभावित होता है, जिससे पेट में अतिरिक्त पाचक एसिड बनने लगता है।
आंतों में गुड बैक्टीरिया कम होने पर क्या होता है?
गुड बैक्टीरिया कम होने से पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है, भोजन सही से नहीं पचता और पेट में ब्लोटिंग व गैस की शिकायत होने लगती है।
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