छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में तापमान और मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से मौसमी बीमारियों और वायरल इंफेक्शन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस समय फैल रहे संक्रमण में एक खास बात यह सामने आ रही है कि बुखार या शुरुआती बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी लोगों का शरीर पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रहा है। मरीज संक्रमण के दौर से बाहर निकलने के बावजूद लंबे समय तक लगातार हल्की खांसी और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत कर रहे हैं। इस स्थिति में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिसके चलते स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
संक्रमण से उबरने के बाद क्यों खिंच रही है कमजोरी और खांसी
आयुर्वेदिक डॉक्टर आस्था मिश्रा ने बताया कि वर्तमान दौर में मौसम की अस्थिरता के कारण होने वाला वायरल इंफेक्शन कई मरीजों को लंबे समय तक परेशान कर रहा है। अक्सर देखा जाता है कि वायरल संक्रमण का मुख्य दौर खत्म होने के बाद भी फेफड़ों और गले में हल्की-हल्की खांसी कई दिनों तक बनी रह सकती है। इसके साथ ही शरीर में ऊर्जा का स्तर गिर जाता है और मरीजों को सुस्ती तथा शारीरिक कमजोरी महसूस होती रहती है। इस स्थिति से जल्दी उबरने के लिए शरीर को पर्याप्त आराम देना बहुत आवश्यक है। साथ ही खानपान में पौष्टिक तत्वों को प्राथमिकता देकर ही रिकवरी की गति को तेज किया जा सकता है।
खानपान की स्वच्छता और बासी भोजन से दूरी
मौसम पर किसी का नियंत्रण नहीं होता, लेकिन दैनिक दिनचर्या और खानपान की आदतों में सुधार करके मौसमी बीमारियों के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टर आस्था मिश्रा के अनुसार, संक्रमण के दौर से खुद को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा ताजा तैयार किया गया भोजन ही खाना चाहिए और बासी खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले जंक फूड और अस्वच्छ माहौल में तैयार किए गए खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि दूषित भोजन शरीर में पहुंचकर नए संक्रमणों को जन्म दे सकता है और पाचन तंत्र को कमजोर बना सकता है।
उबले पानी का उपयोग घटाएगा संक्रमण का जोखिम
मौसम में बदलाव के दौरान पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अशुद्ध पानी अनेक संक्रामक बीमारियों की जड़ बनता है। डॉक्टर आस्था मिश्रा ने सुझाव दिया है कि सभी को साफ-सुथरा पानी ही पीना चाहिए। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पीने के पानी को पहले अच्छी तरह से उबाल लिया जाए और फिर उसे सामान्य तापमान पर ठंडा करके इस्तेमाल में लाया जाए। उबला हुआ पानी पीने से जलजनित कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।
सोंठ, हल्दी और गुड़ के काढ़े का घरेलू प्रयोग
शारीरिक क्षमता बढ़ाने और खांसी में आराम पाने के लिए घरेलू स्तर पर सोंठ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए साबुत सोंठ या सोंठ के पाउडर को थोड़े पानी में डालकर अच्छी तरह उबालकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है। इसे छानकर सुबह के समय पीना लाभकारी माना जाता है। स्वाद और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ी हल्दी और आवश्यकतानुसार गुड़ भी मिलाया जा सकता है। हालांकि डॉक्टर आस्था मिश्रा ने स्पष्ट किया कि किसी भी घरेलू नुस्खे को मुख्य चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता। यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक लगातार बने रहें, तो तुरंत योग्य डॉक्टर से चिकित्सकीय परामर्श लेना अनिवार्य है।



















