अचानक घर या बाहर किसी परिजन अथवा राहगीर का अचेत होकर गिर पड़ना किसी भी व्यक्ति को घबराहट में डाल देता है। ऐसी आपात स्थिति में अक्सर लोग बिना सोचे-समझे मरीज के चेहरे पर जोर-जोर से पानी के छींटे मारने लगते हैं या तुरंत उसके मुंह में पानी उड़ेलने की कोशिश करते हैं। आम धारणा यही रहती है कि पानी के स्पर्श या घूंट से व्यक्ति को होश आ जाएगा, लेकिन चिकित्सकीय नजरिए से यह बेहद जोखिम भरा कदम है। बेहोशी के दौरान शरीर की सामान्य रिफ्लेक्स क्रियाएं शिथिल पड़ जाती हैं, जिसके चलते पानी पिलाने की यह नासमझी सीधे जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी नाजुक घड़ी में गलत कदम उठाने के बजाय प्राथमिक चिकित्सा के तय वैज्ञानिक नियमों का पालन करना सबसे सुरक्षित रास्ता है।
मुंह में पानी डालने से सांस की नली में अवरोध का बड़ा खतरा
जब कोई इंसान चेतना खो बैठता है, तो उसके गले की मांसपेशियां और निगलने की स्वाभाविक क्षमता पूरी तरह निष्क्रिय हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में मुंह में डाला गया पानी आहार नली में जाने के बजाय सीधे श्वास नली यानी फेफड़ों की तरफ जाने का जोखिम पैदा करता है। इसे मेडिकल भाषा में एस्पिरेशन कहा जाता है, जिसके कारण मरीज का दम घुट सकता है और तुरंत गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। चेहरे पर अचानक ठंडा पानी फेंकने से भी कई बार अचेत व्यक्ति अचानक झटका ले सकता है, जिससे फेफड़ों में तरल जाने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण आपातकालीन फर्स्ट एड में बेहोश इंसान के मुंह में किसी भी तरह का तरल या ठोस पदार्थ डालने की पूरी तरह मनाही होती है।
होश और प्रतिक्रिया की तुरंत करें शुरुआती जांच
किसी व्यक्ति के जमीन पर गिरते ही सबसे पहले यह परखना चाहिए कि वह वास्तव में कितना सचेत है। घबराने के बजाय मरीज के करीब जाएं, उसके कंधों को हल्के से थपथपाएं और ऊंची स्पष्ट आवाज में उससे बात करने का प्रयास करें। यदि वह आवाज देने, छूने या कंधे हिलाने पर भी कोई प्रतिक्रिया, आंख की हलचल या बोलने की कोशिश नहीं करता है, तो इसे गंभीर आपात स्थिति मानें। ऐसे समय में अकेले सब कुछ संभालने की कोशिश न करें, बल्कि आसपास मौजूद अन्य लोगों को तुरंत आवाज देकर सहायता के लिए बुलाएं। बिना एक पल गंवाए पेशेवर आपातकालीन एंबुलेंस सेवा या नजदीकी अस्पताल को फोन करवाएं और मेडिकल सहायता मिलने तक मरीज को अकेला बिल्कुल न छोड़ें।
सांस की गति और छाती की हलचल पर रखें पैनी नजर
प्रतिक्रिया जांचने के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कदम यह देखना है कि पीड़ित सामान्य रूप से सांस ले पा रहा है या नहीं। इसके लिए मरीज के चेहरे और छाती की तरफ झुककर छाती के उठने-गिरने की प्रक्रिया को ध्यान से देखें और सांस की गर्माहट या आवाज महसूस करें। यदि व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, सांस लेने में अत्यधिक रुकावट है या वह केवल छटपटाते हुए हांफ रहा है, तो यह कार्डियक अरेस्ट का गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे हालात में तुरंत आपातकालीन मेडिकल सहायता बुलाने के साथ-साथ सीपीआर शुरू करना जरूरी होता है। यदि पास में मौजूद किसी व्यक्ति ने सीपीआर की ट्रेनिंग ली है, तो वह बिना समय गंवाए मरीज की छाती पर सही गति और दबाव से चेस्ट कंप्रेशन देना शुरू करे।
सामान्य सांस चलने पर अपनाएं रिकवरी पोजिशन
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के फर्स्ट एड नियमों के अनुसार, यदि मरीज अचेत है लेकिन उसकी सांसें सामान्य गति से चल रही हैं, तो उसे रिकवरी पोजिशन में रखना सबसे कारगर उपाय है। इसे बोलचाल में करवट वाली सुरक्षित स्थिति कहा जाता है। ध्यान रहे कि यदि गिरने के कारण सिर, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने का संदेह हो, तो व्यक्ति को अनावश्यक रूप से बिल्कुल न हिलाएं, बशर्ते सांस लेने में कोई अवरोध न आ रहा हो।
- पास बैठकर सहारा दें: सबसे पहले अचेत व्यक्ति के बगल में घुटनों के बल बैठें और सुनिश्चित करें कि आसपास की जगह बिल्कुल सुरक्षित है।
- हाथों की सही बनावट: मरीज के पास वाले हाथ को समकोण बनाते हुए शरीर से बाहर की तरफ सीधा रखें, जबकि दूसरे हाथ को उसकी छाती के ऊपर से लाते हुए हथेली को विपरीत गाल के नीचे सहारे के रूप में टिका दें।
- करवट दिलाना: मरीज के दूर वाले पैर को घुटने से ऊपर की ओर मोड़ें, फिर उसके मुड़े हुए घुटने और कंधे को हल्के से पकड़कर धीरे-धीरे अपनी दिशा में करवट दिलाएं।
- सांस का रास्ता खुला रखना: करवट दिलाने के पश्चात मरीज के सिर को हल्का सा पीछे की तरफ झुकाएं और ठुड्डी को ऊपर उठाएं, जिससे श्वास नली पूरी तरह खुली रहे। इस मुद्रा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि मरीज को उल्टी आती है या मुंह में लार जमती है, तो वह बाहर निकल जाती है और फेफड़ों में नहीं फंसती।
लापरवाही न बरतें, मेडिकल निगरानी लगातार रखें
अचानक आने वाली बेहोशी को केवल सामान्य थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। यह मस्तिष्क में रक्त संचार घटने, रक्तचाप अचानक गिरने, रक्त में शुगर कम होने या किसी हृदय संबंधी विकार का परिणाम भी हो सकता है। जब तक डॉक्टर या मेडिकल टीम मौके पर नहीं पहुंच जाती, तब तक मरीज के पास खड़े रहकर उसकी सांसों की स्थिति लगातार जांचते रहें। यदि इस दौरान सांस रुकने लगे, तो तुरंत सीपीआर शुरू करने के लिए तैयार रहें और प्राथमिक मदद को प्राथमिकता दें।



















