उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले स्थित खखरेरू कस्बे में एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ रविवार दोपहर खेल-खेल में 10 साल का एक बच्चा गहरे कुएं में समा गया। सरायनी नगर मोहल्ले का रहने वाला मासूम रेहान एक कबूतर को पकड़ने की कोशिश कर रहा था, तभी बस्ती से कुछ फासले पर मौजूद लगभग 200 फीट गहरे पुराने कुएं में अचानक जा गिरा। हादसे की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की सूचना पाकर डायल-112 की पीआरवी, स्थानीय थाना पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
गहरे पानी के बीच घंटों तक चला पंपिंग अभियान
कुएं में पानी का स्तर काफी ज्यादा और गहराई अत्यधिक होने के कारण शुरुआती दौर में राहत दल और गोताखोरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पानी के तेज दबाव और अंधेरे के चलते तुरंत नीचे उतरना मुमकिन नहीं हो पा रहा था। ऐसे में प्रशासन ने शाम ढलते ही बड़े पाइपों और जेसीबी मशीन की मदद से कुएं से पानी बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कराई। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से लगभग 6 घंटे तक लगातार पानी निकाला जाता रहा, तब जाकर जलस्तर में कुछ कमी दर्ज की गई। इस दौरान घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस बल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर एसडीएम और क्षेत्राधिकारी (सीओ) भी पूरे समय डटे रहे और अभियान की निगरानी करते रहे।
बांस की लकड़ी में फंसा मिला मासूम का शव
जब कुएं का पानी काफी हद तक कम हो गया, तब देर रात गोताखोरों की टीम ने अंदर उतरने का फैसला किया। गोताखोर निषाद, सोहेल और आमिर ने जान जोखिम में डालकर कुएं की तलहटी की ओर रुख किया और पानी में कई डुबकियां लगाकर बच्चे की खोजबीन की। आधी रात के आसपास गोताखोरों को रेहान का शरीर कुएं के निचले हिस्से में मौजूद एक बांस की लकड़ी में फंसा हुआ मिला। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ रस्सियों के सहारे शव को ऊपर खींचा गया। मौके पर मौजूद चिकित्सकों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि कुएं में गिरने के बाद दम घुटने और पानी में डूबने से बच्चे की जान चली गई थी। शव बाहर आते ही माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया और पुलिस ने बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाया।
उम्मीद की डोर थामे कुएं की मुंडेर पर बैठी रही मां
पूरे 13 घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल पर एक बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिला। रेहान की मां मदीना और उसकी छोटी बहन नाज परवीन किसी चमत्कार की उम्मीद में कुएं की मुंडेर पर लगातार बैठी रहीं। वे पल-पल अपने लाडले के सकुशल बाहर आने की दुआएं मांग रही थीं। लेकिन जैसे ही आधी रात को रेहान का निष्प्राण शरीर रस्सियों से बंधा ऊपर आया, मां और बहन दहाड़ मारकर रोने लगीं। आसपास मौजूद मोहल्ले की महिलाओं ने किसी तरह दोनों को संभाला। चार भाइयों में सबसे छोटा रेहान परिवार के साथ-साथ अपने चाचा का भी बेहद दुलारा था। पिता साबिर अली रोजमर्रा की मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। रेहान स्थानीय कस्बे के ही एक विद्यालय में कक्षा चार का छात्र था। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को पल भर में छीन लिया।
सालों से लावारिस पड़ा था दो सदी पुराना कुआं
स्थानीय बाशिंदों के अनुसार, जिस कुएं में यह हादसा हुआ वह तकरीबन 200 वर्ष पुराना है। नगर पंचायत अध्यक्ष ज्ञानेंद्र गौतम ने बताया कि यह कुआं लंबे समय से उपयोग में नहीं था और करीब 35 वर्षों से इसका पानी इस्तेमाल करना पूरी तरह बंद कर दिया गया था। बस्ती से कुछ ही दूरी पर स्थित इस ऐतिहासिक और विशाल कुएं को खुला छोड़े जाने के कारण अब सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कस्बे के लोगों का कहना है कि यदि दशकों से निष्प्रयोज्य पड़े इस गहरे कुएं को जाली या ढक्कन से सुरक्षित ढक दिया गया होता, तो कक्षा चार के इस मासूम बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।



















