भारतीय खानपान की संस्कृति में दोपहर या रात का भोजन समाप्त होते ही सौंफ और मिश्री की एक चुटकी मुंह में डालना सदियों पुरानी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। चाहे घरेलू रसोई का माहौल हो अथवा किसी होटल या रेस्टोरेंट की डाइनिंग टेबल, बिल पेश किए जाने के साथ छोटी तश्तरी में यह मिश्रण अक्सर सामने रख दिया जाता है। अधिकांश लोग इसे केवल मुंह का जायका बदलने या भोजन की गंध मिटाने वाला उपाय समझते हैं। असल में इस सामान्य दिखने वाली आदत के पीछे पेट के स्वास्थ्य और पाचन क्रिया से जुड़े गहरे कारण मौजूद हैं, क्योंकि सौंफ के भीतर पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक इसे शरीर के लिए बेहद उपयोगी बनाते हैं।
पेट का भारीपन और गैस से मिलती है राहत
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के अनुसार, भोजन ग्रहण करने के फौरन बाद कई व्यक्तियों को पेट में भारीपन महसूस होने लगता है। कुछ लोगों को अपच के कारण पेट फूलने, गैस बनने या लगातार डकारें आने जैसी असहज करने वाली दिक्कतों से जूझना पड़ता है। ऐसी स्थिति पैदा होने पर थोड़ी सी सौंफ चबाना राहत पहुंचाने का काम कर सकता है। सौंफ के बीजों में मौजूद प्राकृतिक तेल और अन्य सक्रिय यौगिक पाचन तंत्र को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि भारतीय समाज में बहुत पुराने समय से भोजन के अंत में सौंफ चबाने का नियम चला आ रहा है।
सांसों में ताजगी और मुंह की दुर्गंध का समाधान
सौंफ को एक प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में अपनाए जाने का सबसे प्रमुख आधार इसकी मनमोहक और विशिष्ट खुशबू है। मसालेदार अथवा गरिष्ठ भोजन करने के बाद मुंह के भीतर खाद्य पदार्थों की तेज महक काफी देर तक बनी रह सकती है। जब सौंफ को दांतों से अच्छी तरह चबाया जाता है, तो मुंह में लार का स्राव तेजी से बढ़ता है। इसके कुदरती तत्व सांसों में लंबे समय तक ताजगी घोल देते हैं। इसी वजह से भोजन के उपरांत मुंह को तरोताजा बनाए रखने के लिए यह घरों में नियमित तौर पर उपलब्ध रहती है।
मिश्री मिलाने का मकसद और सावधानी
सौंफ के प्राकृतिक स्वाद में हल्का कसैलापन या कड़वापन महसूस हो सकता है, इसलिए इसे हर वर्ग के लिए स्वादिष्ट बनाने के वास्ते इसमें मिश्री के दाने मिला दिए जाते हैं। मिश्री की मिठास मिलने से इसका स्वाद काफी रोचक हो जाता है और लोग इसे चाव से खाते हैं। इसके बावजूद एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखना जरूरी है कि मिश्री भी मूल रूप से शर्करा यानी चीनी का ही एक रूप है। अतएव इसे अत्यधिक मात्रा में खाना स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। विशेष रूप से जिन व्यक्तियों को अपने ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रखना होता है, उन्हें मिश्री की मात्रा को लेकर हमेशा सतर्कता बरतनी चाहिए।
तैयार करें उपयोगी चूर्ण और सेवन की विधि
डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते हैं कि सौंफ और मिश्री को एक साथ पीसकर उनका चूर्ण तैयार करके किसी सुरक्षित डिब्बे में भी रखा जा सकता है। इस मिश्रण को बनाते समय इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि सौंफ की मात्रा अधिक रहे और मिश्री की मात्रा अपेक्षाकृत काफी कम रखी जाए। भोजन संपन्न होने के बाद इस तैयार चूर्ण का लगभग आधा-आधा चम्मच सुबह और शाम के वक्त सेवन किया जा सकता है।
चिकित्सक के मुताबिक, इस तरीके से सेवन करने से भोजन के पश्चात मुंह में ताजगी का अहसास बना रहता है और सौंफ अपने अंदरूनी गुणों के चलते पाचन तंत्र को लगातार सहारा देती है। सौंफ को सीधे मुंह में डालकर जितनी देर तक और अच्छी तरह से चबाया जाता है, उसकी खुशबू उतनी ही देर तक मुंह के भीतर टिकती है। यही वजह है कि बाजार में मिलने वाले कृत्रिम माउथ फ्रेशनर के मुकाबले इसे एक बेहतरीन और सुरक्षित घरेलू विकल्प माना जाता है।



















