दुधारू मवेशियों के चारे में शामिल करें नेपियर और बरसीम, उत्पादन के साथ बढ़ेगी गुणवत्तामरुधरा में ग्रीन एनर्जी का महाविस्तार, बिजली ग्रिड और ट्रांसमिशन के 19 प्रोजेक्ट्स पर 98,759 करोड़ रुपये का निवेशतुला राशिफल 5 नवंबर 2026: कन्या राशि में चंद्रमा का गोचर बढ़ाएगा अनचाहे खर्चे, महत्वपूर्ण फैसले टालने में ही समझदारीस्विट्जरलैंड में महंगाई बढ़ने पर नीति बदलने को तैयार सेंट्रल बैंक, श्लेजेल ने दिए सख्त संकेतइंदौर मंथन में संघ का युवाओं पर बड़ा दांव, विमर्श की निगरानी और रूठे स्वयंसेवकों को साधने पर जोरमौसमी बीमारियों से बचाव में तुलसी के घरेलू उपयोग और सही तरीकेझारखंड में बदला हवा का रुख, रांची और हजारीबाग समेत कई इलाकों में सुबह धुंध के साथ ठंड की दस्तकठंड के दिनों में दुधारू मवेशियों के खानपान में करें यह बदलाव, नहीं गिरेगा दूध का स्तरअमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद हकीम जेफरीज बनेंगे पहले अश्वेत स्पीकररणबीर कपूर की रामायण में शूर्पणखा बनने वाली रकुल प्रीत सिंह के 10 यादगार सिनेमाई रोल
मौसमी बीमारियों से बचाव में तुलसी के घरेलू उपयोग और सही तरीकेस्वास्थ्य
5 नव॰ 2026, 6:34 am (1 मिनट पहले)· 0

मौसमी बीमारियों से बचाव में तुलसी के घरेलू उपयोग और सही तरीके

मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम और गले की खराश से राहत दिलाने में तुलसी बेहद कारगर मानी जाती है, जिसके काढ़े, अर्क और तेल के पारंपरिक फायदों की जानकारी दी गई है।

गोंडा में पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय संस्कृति और परंपरा में तुलसी के पौधे को एक अत्यंत विशिष्ट स्थान प्राप्त है। इसे केवल धार्मिक मान्यताओं के कारण ही नहीं पूजा जाता, बल्कि इसके भीतर मौजूद दुर्लभ और प्रभावशाली औषधीय गुणों के चलते भी इसका विशेष सम्मान है। आयुर्वेद के ग्रंथों में तुलसी को सभी औषधियों की महारानी के रूप में वर्णित किया गया है। सदियों से घरेलू उपचारों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके पत्तों, बीजों, तनों और अन्य भागों का निरंतर प्रयोग होता रहा है। तुलसी में कई ऐसे कुदरती तत्व मौजूद होते हैं, जो मानव शरीर की सेहत और तंदुरुस्ती को बनाए रखने में बेहद उपयोगी सिद्ध होते हैं।

सर्दी, जुकाम और गले की खराश में राहत

वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था में तुलसी का मुख्य रूप से प्रयोग सामान्य सर्दी, खांसी और गले की जकड़न अथवा खराश को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। जब भी मौसम में बदलाव आता है, लोग इसके ताजे पत्तों को अदरक के टुकड़ों और साबुत काली मिर्च के साथ सादे पानी में अच्छी तरह उबालकर एक असरदार काढ़ा तैयार करते हैं। भारतीय घरों में दैनिक रूप से तुलसी की पत्तियों वाली चाय पीने का भी व्यापक चलन है। इस तरह के गर्म पेय का सेवन करने से श्वासनली और गले को तुरंत राहत मिलती है और संक्रमण के प्रभाव में कमी आती है।

ये भी पढ़ें

तुलसी की प्रमुख प्रजातियां और उनके विशिष्ट गुण

डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के विवरण के अनुसार, तुलसी की प्रकृति में अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में आमतौर पर लोग मुख्य रूप से राम तुलसी, श्याम तुलसी और वन तुलसी की पहचान रखते हैं। इसके अतिरिक्त अश्व तुलसी की प्रजाति भी होती है, जिसका स्वाद हल्का मीठापन लिए होता है। इस मीठे स्वाद के कारण अश्व तुलसी का उपयोग चाय के स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए किया जाता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी शरीर में जमा होने वाले अतिरिक्त कफ को कम करने और संतुलित रखने में अत्यंत सहायक होती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता और मौसमी बदलावों से सुरक्षा

मौसम के करवट लेने पर अक्सर लोगों को मौसमी खांसी, जुकाम और संक्रामक वायरल बुखार अपनी चपेट में ले लेते हैं। ऐसी स्थितियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तुलसी का उपयोग घरेलू उपचारों में प्रमुखता से किया जाता है। तुलसी को प्राकृतिक रूप से शरीर की आंतरिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला पौधा माना जाता है। इसके अलावा भारत में इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी अद्वितीय है, जहां यह धार्मिक मान्यता प्रचलित है कि तुलसी के पावन पौधे में साक्षात भगवान विष्णु का वास होता है।

त्वचा संबंधी समस्याएं और संपूर्ण पौधे का औषधीय उपयोग

डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के मुताबिक, पारंपरिक चिकित्सा में तुलसी का दायरा केवल खांसी-जुकाम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि त्वचा से जुड़ी जटिलताओं और चेचक जैसी संक्रामक बीमारियों के उपचार में भी इसका इतिहास रहा है। चेहरे के निखार और कील-मुंहासों से बचाव के लिए इसके ताजे पत्तों को पीसकर फेस पैक के रूप में त्वचा पर लगाया जाता है। तुलसी के बीजों का भी स्वास्थ्य लाभ के लिए भिन्न-भिन्न विधियों से सेवन किया जाता है। वास्तव में तुलसी एक ऐसा अनोखा पौधा है जिसके पत्ते, तना, जड़, फूल और बीज सहित पूरा पौधा ही संपूर्ण रूप से औषधीय कार्यों में उपयोग में लाया जाता है।

सावधानी और चिकित्सकीय परामर्श का महत्व

घरेलू नुस्खों में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, पौधे से निकाला गया अर्क और इसका विशेष तेल नियमित रूप से उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि किसी भी गंभीर स्वास्थ्य विकार या बीमारी के संपूर्ण इलाज के लिए केवल घरेलू उपायों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। विशेष रूप से छोटे बच्चों की मालिश करने अथवा उनके लिए किसी भी प्रकार के औषधीय प्रयोग से पहले किसी योग्य डॉक्टर या पंजीकृत वैद्य से परामर्श लेना अनिवार्य है। तुलसी के औषधीय गुणों का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए किसी विशेषज्ञ के उचित मार्गदर्शन में ही इसका सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।

सवाल-जवाब

सर्दी और खांसी में राहत के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे तैयार किया जाता है?
तुलसी के पत्तों को अदरक के टुकड़ों और काली मिर्च के साथ पानी में अच्छी तरह उबालकर काढ़ा बनाया जाता है, जिससे गले की खराश में आराम मिलता है।
भारत में तुलसी की कौन-कौन सी प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं?
भारत में मुख्य रूप से राम तुलसी, श्याम तुलसी, वन तुलसी और मीठे स्वाद वाली अश्व तुलसी पाई जाती हैं।
अश्व तुलसी का उपयोग किस तरह किया जाता है?
अश्व तुलसी का स्वाद हल्का मीठा होता है, इसलिए इसका उपयोग मुख्य रूप से चाय का स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए किया जाता है।
तुलसी के पौधे के कौन से हिस्से औषधीय दृष्टि से उपयोगी हैं?
तुलसी के पत्ते, तना, जड़, फूल और बीज सहित पूरे पौधे का उपयोग विभिन्न औषधीय कार्यों में किया जाता है।
क्या त्वचा संबंधी समस्याओं में तुलसी का उपयोग किया जा सकता है?
हां, त्वचा की समस्याओं में तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाकर फेस पैक के रूप में और चेचक जैसी पारंपरिक व्याधियों में इसका उपयोग किया जाता रहा है।
बच्चों पर तुलसी के औषधीय प्रयोग से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बच्चों की मालिश करने या उन्हें कोई भी औषधीय नुस्खा देने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या वैद्य की सलाह लेना अनिवार्य है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp