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दिल्ली में तेजी से पैर पसार रहा स्वाइन फ्लू, ICMR के ताजा बयान से मिली बड़ी राहतस्वास्थ्य
25 अग॰ 2026, 6:20 pm (3 घंटे पहले)· 2

दिल्ली में तेजी से पैर पसार रहा स्वाइन फ्लू, ICMR के ताजा बयान से मिली बड़ी राहत

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और ICMR ने स्थिति स्पष्ट की है। हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी होगी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा ए एच1एन1 के मामलों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। शहर में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 2308 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि सामान्य फ्लू के करीब 650 मामले सामने आए हैं। बढ़ते आंकड़ों के बावजूद स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की पैनिक स्थिति में न आएं, बल्कि पूरी तरह से सतर्क और सावधान रहें।

स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी और डॉक्टरों की राय

डॉक्टर पंकज सिंह का कहना है कि दिल्ली सरकार मौजूदा हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है और इस संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह तैयार है। डॉ. पंकज सिंह के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग लगातार ग्राउंड पर स्थिति की निगरानी कर रहा है और जरूरी चिकित्सा इंतजाम पुख्ता कर दिए गए हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे डरने के बजाय शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत जरूरी सतर्कता अपनाएं और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें।

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देशभर में रेस्पिरेटरी सर्विलांस का हाल

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR के महानिदेशक राजीव बहल ने देश में रेस्पिरेटरी वायरस की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों से आने वाली रिपोर्टों के आधार पर और रेस्पिरेटरी सिंड्रोम के नमूनों की नियमित जांच के जरिए देश भर में कई स्तरों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। मौजूदा रेस्पिरेटरी सर्विलांस के आंकड़ों के अनुसार, इस समय इन्फ्लूएंजा ए एच1एन1 सबसे ज्यादा सक्रिय पाया जा रहा है और कुछ सैंपल्स में इसकी हिस्सेदारी करीब 98 फीसदी तक दर्ज की गई है। इसके अलावा कोविड के छिटपुट मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या पिछले दौर की तुलना में काफी कम है।

क्या वायरस में कोई खतरनाक बदलाव आया है?

राजीव बहल ने यह स्पष्ट किया है कि एच1एन1, जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, इस समय एक सामान्य सीजनल इन्फ्लूएंजा की तरह ही फैल रहा है। मौजूदा संक्रमण को किसी नए या अत्यधिक खतरनाक प्रकार के स्वाइन फ्लू के रूप में बिल्कुल नहीं देखा जा रहा है। वायरस की प्रवृत्ति होती है कि वह हर साल छोटे-छोटे बदलाव करता है, और वर्तमान में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि वायरस में कोई बहुत बड़ा या खतरनाक बदलाव आया है।

बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए हाई रिस्क चेतावनी

ICMR के महानिदेशक ने चेतावनी देते हुए कहा कि फ्लू के कुछ मरीजों में बीमारी का रूप गंभीर हो सकता है, विशेषकर बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के मामले में। 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और गर्भवती महिलाएं सीधे तौर पर हाई रिस्क ग्रुप के दायरे में आते हैं, इसलिए यदि उनमें फ्लू जैसे कोई भी लक्षण दिखाई दें तो उन्हें बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। हर साल की भांति इस बार भी सीजनल इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आ रहे हैं। वायरस का संक्रमण जब बढ़ता है तो वह एक स्तर पर पहुंचकर स्थिर होता है और फिर धीरे-धीरे कम होने लगता है। हालांकि, मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए अभी यह पूरी तरह तय नहीं किया जा सकता कि संक्रमण अपने पीक पर पहुंच चुका है या नहीं। यह अगले दो या तीन सप्ताह में कब अपनी पराकाष्ठा पर पहुंचेगा, इसकी सटीक भविष्यवाणी करना फिलहाल मुश्किल है।

बचाव के उपाय और संक्रमण रोकने के तरीके

राजीव बहल के अनुसार, फ्लू के लक्षण महसूस होने पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संक्रमण अन्य स्वस्थ लोगों तक न फैले। अधिकारियों का यह भी कहना है कि हर एक नागरिक के लिए मास्क पहनना अनिवार्य नहीं बताया गया है, लेकिन जो व्यक्ति बीमार महसूस कर रहा है, उसे अन्य लोगों से उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। चूँकि फ्लू मुख्य रूप से ड्रॉपलेट के माध्यम से फैलता है, इसलिए संक्रमित व्यक्ति से सुरक्षित दूरी रखना बहुत जरूरी है। लोगों को अपने हाथ नियमित रूप से साबुन से धोते रहना चाहिए और बार-बार अपने चेहरे को छूने से बचना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और ठीक उसी तरह नाक को अपनी कोहनी से ढकना चाहिए, जैसा कि कोविड महामारी के दौरान लोगों को सिखाया गया था।

कब लें डॉक्टर की सलाह और दवा?

विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि बिना किसी डॉक्टर की सीधी सलाह के अपनी मर्जी से कोई भी दवा न खाएं। यदि किसी को सांस लेने में गंभीर परेशानी महसूस हो रही हो, सीने में तेज दर्द हो या कोई अन्य गंभीर लक्षण उभर रहे हों, तो बिना देर किए तुरंत किसी अस्पताल या योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। विशेष रूप से हाई रिस्क ग्रुप में शामिल लोगों को इस तरह के किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए और नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।

वैक्सीनेशन को लेकर क्या हैं दिशा-निर्देश?

ICMR के डीजी ने जानकारी दी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO और ICMR की स्पष्ट सिफारिशों के मुताबिक हाई रिस्क ग्रुप के लोग और वरिष्ठ नागरिक चाहें तो फ्लू की वैक्सीन लगवा सकते हैं। हालांकि, आम स्वस्थ जनता के लिए यह फ्लू शॉट लगवाना किसी भी तरह से अनिवार्य नहीं किया गया है। जिस किसी को भी ऐसा लगता है कि उसे फ्लू का टीका लगवाना चाहिए, वह अपने डॉक्टर की सलाह के बाद इसे ले सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का यही संदेश है कि फिलहाल इस स्थिति से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस सामान्य सावधानियों का पालन करें और समय रहते चिकित्सकीय सहायता लें।

सवाल-जवाब

दिल्ली में अब तक स्वाइन फ्लू के कितने मामले सामने आए हैं?
दिल्ली में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 2308 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि सामान्य फ्लू के लगभग 650 मामले सामने आए हैं।
मौजूदा रेस्पिरेटरी सर्विलांस में कौन सा वायरस सबसे ज्यादा पाया जा रहा है?
ICMR के अनुसार मौजूदा सर्विलांस में इन्फ्लूएंजा ए एच1एन1 सबसे ज्यादा सक्रिय है और कुछ नमूनों में इसकी हिस्सेदारी करीब 98 फीसदी तक है।
किन लोगों को स्वाइन फ्लू के दौरान सबसे ज्यादा खतरा है?
65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं, जिन्हें फ्लू होने पर गंभीर बीमारी का खतरा अधिक होता है।
क्या आम लोगों के लिए फ्लू का टीका लगवाना अनिवार्य है?
नहीं, आम जनता के लिए फ्लू शॉट अनिवार्य नहीं है, हालांकि हाई रिस्क ग्रुप और बुजुर्ग डॉक्टर की सलाह पर यह वैक्सीन ले सकते हैं।
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