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पारिजात के पत्तों का काढ़ा है सेहत का खजाना, जानिए बनाने की विधि और अचूक लाभस्वास्थ्य
25 अग॰ 2026, 5:19 pm (3 घंटे पहले)· 2

पारिजात के पत्तों का काढ़ा है सेहत का खजाना, जानिए बनाने की विधि और अचूक लाभ

पारिजात यानी हरसिंगार के पौधे को आयुर्वेद में औषधीय गुणों की खान माना गया है। इसके पत्तों का काढ़ा और फूलों की चाय पीने से जोड़ों के दर्द, सूजन और वायरल संक्रमण में जबरदस्त फायदा मिलता है।

पारिजात यानी हरसिंगार का पौधा हर घर की बगिया की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ एक बेहद गुणकारी औषधीय पौधा भी है। इसके फूल, पत्तियां और जड़ें कई तरह की बीमारियों के इलाज में बहुत असरदार मानी जाती हैं। इस पौधे में अक्टूबर से दिसंबर के महीनों के दौरान सुंदर फूल खिलते हैं। आयुर्वेद के जानकारों के मुताबिक हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा और इसके फूलों से बनने वाली चाय सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। विशेष तौर पर शरीर के दर्द को दूर करने और संक्रमण से लड़ने में इस पौधे के इस्तेमाल को बहुत उपयोगी बताया गया है। बाजार में यह पौधा बहुत अधिक महंगा नहीं मिलता है और इसे ऑनलाइन आसानी से खरीदा जा सकता है। इस पौधे की कीमत आमतौर पर 35 रुपये से लेकर 90 रुपये तक होती है।

पारिजात के पौधे की सही देखभाल और पोषण

अगर आपके घर में पहले से ही पारिजात का पौधा लगा हुआ है, तो अगस्त के महीने में इसकी विशेष देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है। धूप निकलने पर पौधे को खुले में रख दें और गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें ताकि इसकी जड़ों तक आसानी से हवा और धूप पहुंच सके। इससे पौधे की ग्रोथ बहुत अच्छी होती है। गुड़ाई करने के बाद पौधे में वर्मी कंपोस्ट डालना चाहिए। चूंकि पारिजात को एक धार्मिक पौधा माना जाता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने से हमेशा बचना चाहिए। जैविक खाद डालने से पौधा घना और हरा-भरा बनता है। इसके अलावा पौधे में दो चम्मच सीवीड भी मिलाया जा सकता है जो एक बेहतरीन जैविक खाद का काम करती है। आप चाहें तो वर्मी कंपोस्ट के साथ नीम खली, हल्दी पाउडर और एलोवेरा तथा संतरे के छिलकों का पानी भी दे सकते हैं। इन उपायों से सितंबर आते-आते पौधा फूलों के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है और महज 15 दिनों के भीतर उसमें कलियां बनकर फूल खिलने शुरू हो जाते हैं।

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पारिजात के पत्तों का काढ़ा बनाने की आसान विधि

पारिजात के पत्तों का काढ़ा बनाना बेहद आसान है और यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। काढ़ा बनाने के लिए पौधे से ताजे चार-पांच पत्ते तोड़ लें और उन्हें पानी से तीन-चार बार अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन पत्तों को अच्छी तरह कूट लें। अब एक पतीले में कुटे हुए पत्ते डालें और उसमें दो कटोरी पानी मिला दें। इस पतीले को गैस पर रखें और उसमें थोड़ी सी पिसी हुई काली मिर्च, पिसा हुआ अदरक और आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिला लें। इस मिश्रण को धीमी आंच पर दो-तीन मिनट तक उबलने दें। जब उबलते-उबलते पानी आधा रह जाए, तो समझ लीजिए कि आपका काढ़ा तैयार हो चुका है। अब इसे एक कप में छान लें। इस काढ़े को खाली पेट पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसे हमेशा 30 से 50 मिलीलीटर की मात्रा में ही लेना चाहिए। इस काढ़े का सेवन एक हफ्ते, 15 दिन या अधिकतम एक महीने तक लगातार किया जा सकता है।

हड्डियों के दर्द और सूजन में चमत्कारी राहत

पारिजात के पत्तों का काढ़ा हड्डियों के दर्द और शरीर की सूजन को कम करने में अचूक असर दिखाता है। आप चाहें तो इस काढ़े को रात में ही उबालकर रख सकते हैं और अगली सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं। यह काढ़ा जोड़ों के दर्द, गठिया यानी अर्थराइटिस और साइटिका जैसी समस्याओं में बहुत राहत पहुंचाता है। इसके अलावा डेंगू, चिकनगुनिया या वायरल बुखार के बाद शरीर में आने वाली कमजोरी को दूर करने में भी यह मददगार साबित होता है। यह शरीर की सूजन को घटाकर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत करता है। पेट के हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में भी यह असरदार है। इसके अलावा एक और नुस्खे के तहत हरसिंगार के पत्तों का रस निकालकर उसमें 4 लौंग और 2 लहसुन की कलियां मिलाएं और इसे सरसों के तेल में अच्छी तरह गर्म करें। इस तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द से बहुत जल्दी राहत मिल जाती है.

पारिजात के फूलों की चाय और उसके अनगिनत फायदे

केवल पत्तियां ही नहीं बल्कि पारिजात के फूल भी गुणों का खजाना होते हैं और इनके जरिए बेहद गुणकारी चाय तैयार की जाती है। अगर आपको एक कप चाय बनानी है तो इसके लिए 7 से 8 फूल ले लीजिए और यदि दो कप चाय बनानी है तो 15 से 18 फूलों का इस्तेमाल कीजिए। इन फूलों को साफ पानी से दो-तीन बार अच्छी तरह धो लें। इसके बाद एक पतीले में दो कटोरी पानी डालकर उसे गैस पर चढ़ा दें और उसमें ये फूल डाल दें। पानी में जाते ही फूल अपना रंग छोड़ने लगते हैं। आप चाहें तो इस उबलते पानी में थोड़ी सी दालचीनी, थोड़ी सी चाय पत्ती और आधा चम्मच हल्दी भी मिला सकते हैं। जब पानी उबलकर आधा रह जाए तो उसे छान लें। इस तरह पारिजात के फूलों की स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक चाय बनकर तैयार हो जाती है। इस चाय को पीने से मानसिक तनाव कम होता है, जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है और सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।

नर्वस सिस्टम को शांत करती है हरसिंगार की चाय

पारिजात के फूलों की चाय में मौजूद नेचुरल एंजाइम हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करने का काम करते हैं, जिससे तनाव का स्तर घटता है और रात में नींद बहुत अच्छी आती है। इस चाय का नियमित सेवन करने से गले में जमा बलगम साफ होता है, गला ठीक रहता है और श्वसन तंत्र से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर हो जाती हैं। पेट की गैस और अपच जैसी समस्याओं के लिए भी इसे बेहद असरदार माना गया है। हालांकि स्वास्थ्य से जुड़ी इन जानकारियों और नुस्खों को आजमाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

सवाल-जवाब

पारिजात के पौधे की कीमत बाजार में कितनी होती है?
पारिजात का पौधा ऑनलाइन या नर्सरी में आसानी से 35 रुपये से लेकर 90 रुपये तक की कीमत में मिल जाता है।
पारिजात के पत्तों का काढ़ा कैसे बनाया जाता है?
चार-पांच धुले हुए पत्तों को कूटकर दो कटोरी पानी में काली मिर्च, अदरक और हल्दी के साथ धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए।
पारिजात के पत्तों का काढ़ा किस समय पीना चाहिए?
इस काढ़े को सुबह खाली पेट पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है और इसे 30 से 50 मिलीलीटर की मात्रा में लेना चाहिए।
हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा किन समस्याओं में लाभ पहुंचाता है?
यह काढ़ा जोड़ों के दर्द, गठिया, साइटिका, सूजन और वायरल बुखार के बाद आने वाली कमजोरी को दूर करने में मददगार होता है।
पारिजात के फूलों की चाय पीने के क्या फायदे हैं?
इन फूलों की चाय पीने से मानसिक तनाव कम होता है, अच्छी नींद आती है, सर्दी-जुकाम से छुटकारा मिलता है और पाचन सुधरता है।
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