दीपावली के पावन पर्व पर पटाखों और फुलझड़ियों का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन इनसे उत्पन्न होने वाला भारी प्रदूषण और हवा में तैरते कण सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित होते हैं। इन हानिकारक प्रभावों का सबसे पहला और गंभीर असर हमारी आंखों पर पड़ता है। आतिशबाजी के धुएं में सल्फर, गनपाउडर और विभिन्न भारी धातुओं के सूक्ष्म कण मौजूद होते हैं जो सीधे संपर्क में आते ही आंखों के कॉर्निया और कंजंक्टिवा को भारी क्षति पहुंचाते हैं।
आंखों के नाजुक ऊतकों को पहुंचता है भारी नुकसान
पटाखों के जलने से निकलने वाली चिंगारियां जब हवा में बिखरकर नीचे गिरती हैं, तो वे आंखों के बेहद नाजुक और मुलायम टिशूज को प्रभावित करती हैं। यदि ये चिंगारियां आंख के करीब आ जाएं तो टिशूज जल तक सकते हैं। इसके अलावा कॉर्निया में खरोंच आने और आंखों के भीतर इंटरनल ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों का कचरा और धुआं आंखों की सेहत के लिए बड़ा खतरा है।
पटाखा चलाते समय कौन सी गलतियां बिल्कुल न करें
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि आतिशबाजी करते वक्त कुछ सावधानियों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। कभी भी पटाखों को ऊपर से न छुएं और न ही अधजले पटाखों के पास जाकर उन्हें देखने की कोशिश करें। बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें और उन्हें अकेले में पटाखे न जलाने दें। यदि आंख में कोई चिंगारी या कचरा गिर जाए तो उसे भूलकर भी हाथों से न रगड़ें। किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर अपनी मर्जी से आंखों में कोई दवा या घरेलू नुस्खा न डालें, बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें।
एम्स के डॉक्टरों द्वारा बताए गए जरूरी बचाव के उपाय
आंखों को सुरक्षित रखने के लिए एम्स के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर कुछ खास निर्देश दिए गए हैं। पटाखों से हमेशा उचित दूरी बनाकर रखें और लंबी अगरबत्ती या फुलझड़ी का उपयोग करने से बचें। बच्चों को हमेशा बड़ों की निगरानी में रखें और उन्हें प्रोटेक्टिव गोगल्स पहनाएं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के रूप में पास में पानी से भरी बाल्टी और रेत जरूर रखें, साथ ही अग्निशमन यंत्र का भी प्रबंध रखें।
पटाखे जलाने के बाद अपने हाथ और चेहरे को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प केवल फुलझड़ी को माना गया है, इसलिए बेहतर यही होगा कि बच्चों को अन्य बड़े और खतरनाक पटाखे न दिए जाएं। पटाखों को कभी भी अपने हाथ में न पकड़ें और न ही किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकें। यदि इसके बावजूद आंखों में कोई समस्या उत्पन्न होती है तो किसी भी तरह के घरेलू उपचार से बचें और फौरन नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।



















