मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा का हुआ अंतिम संस्कार, 26 दिन पहले हुई थी हत्यारक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- जवानों की वजह से देश में मनती है दिवाली, सिक्किम में शहीद सैनिकों को दी श्रद्धांजलिरामबन में भाजपा नेता सुनील कुमार शर्मा के काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी से बस की टक्कर, एसएचओ समेत चार जवान घायलमेक्सिको की जायंट क्रिस्टल केव में छिपे हैं 50 हजार साल पुराने रहस्यविक्की कौशल और कैटरीना कैफ ने दिखाई बेटे विहान की पहली झलक, दिवाली पर शेयर की खूबसूरत फैमिली फोटोसमुद्री किराए में उछाल और भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए अपने बेड़े में नए जहाज शामिल करेगा इंडियन ऑयलपंजाब डियर 50 रेंजर संडे लॉटरी के नतीजे घोषित, 21 लाख रुपये के बंपर इनाम के साथ जानिए क्लेम की पूरी प्रक्रियाइथियोपिया से दबोचा गया 5 लाख का इनामी गैंगस्टर अफरीदी, पंजाब पुलिस लाई भारतबीकानेर में दीपावली पर चीनी से बने महल-माळिया का भोग, रियासतकाल से जुड़ी है अनोखी परंपराप्रियंका चोपड़ा ने लॉस एंजिल्स में मनाई दिवाली, पति निक जोनास और बेटी मालती संग शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
बीकानेर में दीपावली पर चीनी से बने महल-माळिया का भोग, रियासतकाल से जुड़ी है अनोखी परंपराराजस्थान
8 नव॰ 2026, 6:31 pm (1 मिनट पहले)· 0

बीकानेर में दीपावली पर चीनी से बने महल-माळिया का भोग, रियासतकाल से जुड़ी है अनोखी परंपरा

बीकानेर में दीपावली के मौके पर महालक्ष्मी को चीनी से बने महल-माळिया और बड़क-पापड़ी का भोग लगाने की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। यह खास मिठाई देश-विदेश तक भेजी जाती है।

रोशनी के पर्व दीपावली के दौरान देश भर में अलग-अलग अनुष्ठान देखने को मिलते हैं, लेकिन राजस्थान के बीकानेर शहर की संस्कृति इस मामले में बेहद निराली है। यहाँ जब लोग महालक्ष्मी की आराधना करते हैं, तो पूजा की थाली में आधुनिक व्यंजनों के बजाय चीनी से तैयार पारंपरिक सामग्रियां शामिल होती हैं। इन खास चीजों में मुख्य रूप से महल-माळिया और बड़क-पापड़ी का नाम आता है, जिनके बिना यहाँ का अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता।

कारखानों में होती है खास तैयारी

त्योहार का मौसम नजदीक आते ही बीकानेर के स्थानीय कारखानों में इनकी बड़े पैमाने पर रचना शुरू हो जाती है। शुद्ध चीनी का उपयोग करके इन वस्तुओं को ढाला जाता है, जिनमें महल-माळिया, इलायची-मखाना और बड़क-पापड़ी प्रमुख हैं। इन विशेष मिठाइयों का निर्माण मुख्य रूप से केवल दीपावली के पूजन के लिए ही किया जाता है। कुशल कारीगर अपनी पुश्तैनी कला का प्रदर्शन करते हुए इन्हें खूबसूरत और आकर्षक आकार देते हैं, जो बाजारों में हर किसी का ध्यान खींचते हैं।

ये भी पढ़ें

विदेशों तक पहुँचती है संस्कृति की मिठास

यह अनोखी परंपरा केवल स्थानीय सीमाओं में ही नहीं बंधी है, बल्कि इसकी पहुँच बहुत दूर तक है। दीपावली के अवसर पर बीकानेर से यह प्रसाद देश के अन्य प्रांतों के अलावा विदेशों में रहने वाले प्रवासियों तक भी पहुँचाया जाता है। लोग अपने परिचितों और परिजनों के पास इन पैकेजों को विशेष रूप से भिजवाते हैं, ताकि वे भी अपनी पुरानी संस्कृति से जुड़े रहें और महालक्ष्मी का पूजन विधि-विधान से कर सकें। इस वजह से स्थानीय मिष्ठान और हस्तशिल्प कला को वैश्विक स्तर पर एक अनूठी पहचान मिल रही है।

पीढ़ियों से संजोई गई विरासत

रियासत के दौर से शुरू हुई यह प्रथा आज की आधुनिक दौड़भाग वाली जीवनशैली में भी पूरी शान के साथ बरकरार है। नई पीढ़ी भी उतनी ही आस्था और श्रद्धा के साथ इसका निर्वहन कर रही है, जितना उनके पुरखे करते आए हैं। जब दीपोत्सव की रात पूरा क्षेत्र दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है, तब घरों में होने वाली पूजा के दौरान इस भोग का विशेष महत्व होता है। इतिहास, आस्था और मिठास का यह मेल बीकानेर के पर्व को पूरे देश में विशिष्ट दर्जा दिलाता है।

सवाल-जवाब

महल-माळिया और बड़क-पापड़ी का भोग कहाँ लगाया जाता है?
इनका भोग बीकानेर में दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के दौरान लगाया जाता है।
यह मिठाई किस मुख्य सामग्री से बनती है?
यह विशेष पारंपरिक मिठाई शुद्ध चीनी से तैयार की जाती है।
क्या यह मिठाई केवल स्थानीय स्तर पर मिलती है?
नहीं, इसे देश के अन्य राज्यों के अलावा विदेशों में रहने वाले लोगों के पास भी भेजा जाता है।
यह परंपरा किस समय से चली आ रही है?
बीकानेर में यह प्रथा रियासतकाल से चली आ रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp