बाड़मेर जिला अस्पताल में बना ब्लड सेपरेशन सेंटर अब जिले भर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। पहले डेंगू हो या कोई और गंभीर बीमारी, प्लेटलेट्स अचानक कम होते ही मरीजों के पास बड़े शहरों की दौड़ लगाने के अलावा कोई चारा नहीं होता था, और इमरजेंसी में यह सफर कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता था। पिछले दो साल में इसी यूनिट में 25,913 ब्लड कम्पोनेंट तैयार किए जा चुके हैं, और अत्याधुनिक मशीनों की मदद से खून की एक यूनिट को अलग अलग हिस्सों में बांटकर अब एक साथ चार मरीजों की जान बचाई जा रही है।
कैसे बदली तस्वीर
जिला अस्पताल की न्यू टीचिंग बिल्डिंग की पहली मंजिल पर बना यह ब्लड कम्पोनेंट सेपरेशन सेंटर करीब सवा करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ था, और तब से हालात पूरी तरह बदल गए हैं। प्लेटलेट्स में अचानक गिरावट झेल रहे डेंगू मरीज हों, बार बार खून चढ़वाने की जरूरत वाले थैलेसीमिया के मरीज हों, जलने से घायल मरीज हों या प्रसव के दौरान गंभीर हालत वाली महिलाएं, अब इन सभी को बाड़मेर में ही जरूरी रक्त घटक मिल जाते हैं और उन्हें कहीं और भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी सेंटर से इमरजेंसी में निजी अस्पतालों को भी कम्पोनेंट दिए गए हैं, जिससे अस्पताल को अब तक 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हो चुकी है।
इस साल अब तक 5741 कम्पोनेंट तैयार
अगर सिर्फ इस साल की बात करें तो अब तक जिला अस्पताल में मरीजों को 5741 ब्लड कम्पोनेंट मुहैया कराए जा चुके हैं। इनमें पीआरबीसी यानी पैक्ड रेड ब्लड सेल्स के 4750 यूनिट, आरडीपी यानी रैंडम डोनर प्लेटलेट्स के 521 यूनिट और एफएफपी यानी फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा के 470 यूनिट शामिल हैं। ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ रवि गोयल के मुताबिक इस यूनिट में वैज्ञानिक तरीके से खून की एक यूनिट को चार अलग अलग घटकों में बांटा जाता है, जिसकी वजह से एक ही डोनर के खून से एक की बजाय चार मरीजों का इलाज संभव हो पाता है।
दो साल में 25,913 कम्पोनेंट, रेफरल रेट लगभग शून्य
यह यूनिट 7 जुलाई 2024 से काम कर रही है, और तभी से अब तक कुल 25,913 ब्लड कंपोनेंट तैयार किए जा चुके हैं। डॉ रवि गोयल के मुताबिक इस यूनिट की वजह से मरीजों को पहले के मुकाबले तीन गुना ज्यादा फायदा मिल रहा है, क्योंकि खून के सारे जरूरी तत्व अब कहीं दूर नहीं बल्कि अस्पताल में ही मौजूद हैं। इसी वजह से जटिल ऑपरेशन और डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों को दूसरे शहर रेफर करने की नौबत लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे मरीजों का सफर और इलाज में लगने वाली देरी, दोनों कम हुई हैं। बाड़मेर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ हनुमान राम चौधरी के मुताबिक कंपोनेंट यूनिट शुरू होने के बाद से निजी अस्पतालों को इमरजेंसी में कम्पोनेंट देने से ब्लड सेंटर को अब तक 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की आमदनी हो चुकी है, वहीं डेंगू और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों में भी रेफरल दर में साफ कमी देखी गई है।


















