घरों में बागवानी करने का शौक रखने वालों के लिए एक ऐसा अनोखा पौधा मौजूद है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खास है। आयुर्वेद में इस चमत्कारी वनस्पति को मधुमेह यानी डायबिटीज के रोगियों के लिए एक अचूक उपाय माना गया है। इस खास पौधे को आम बोलचाल की भाषा में इंसुलिन प्लांट कहा जाता है। इसके औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है, हालांकि तमाम लोग आज भी इसके फायदों से अनजान हैं। बरसात के दिनों में इसे घर पर उगाना बेहद आसान होता है और यह कम देखरेख में भी अच्छी तरह पनप जाता है।
वानस्पतिक नाम और अन्य पहचान
इस औषधीय वनस्पति का आधिकारिक वानस्पतिक नाम कॉस्टस इग्नियस (Costus Igneus) है। इसके अलावा देश-दुनिया में इसे स्पाइरल जिंजर और फायरी कॉस्टस के नाम से भी पुकारा जाता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आम बोलचाल में लोग इसे मधुनाशिनी के नाम से भी जानते हैं। इसकी शारीरिक बनावट और पत्तियां अन्य पौधों से काफी अलग होती हैं।
विशेषज्ञ की राय और औषधीय गार्डन
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में उद्यानिकी वैज्ञानिक के पद पर डॉ. कमलेश अहिरवार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. कमलेश का कहना है कि उनके केंद्र के औषधीय पादप उद्यान में इंसुलिन का यह पौधा सफलतापूर्वक लगाया गया है। इस पौधे को उनके केंद्र में वर्ष 2018 के दौरान तैयार किया गया था। इस लाभकारी पौधे की बाजार में भारी मांग देखने को मिलती है, लेकिन सामान्य नागरिकों को इसकी जानकारी न होने के कारण वे इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
पत्तियों में छिपे हैं स्वास्थ्य लाभ
डॉ. कमलेश अहिरवार के अनुसार इस वनस्पति की पत्तियां आकार में काफी बड़ी होती हैं और इनमें प्रचुर मात्रा में औषधीय तत्व पाए जाते हैं। मधुमेह से पीड़ित लोग इन पत्तियों का नियमित रूप से सेवन करते हैं। सबसे खास बात यह है कि इन पत्तियों को लगातार खाने से शरीर पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट नहीं होता है, जो इसे रासायनिक दवाइयों से बेहतर विकल्प बनाता है।
इंजेक्शन बनाने में होता है इस्तेमाल
नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में रोजाना बड़ी संख्या में किसान और डायबिटीज के मरीज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं। कई मरीज तो विशेष रूप से यहां आकर इंसुलिन की पत्तियां तोड़कर अपने साथ घर ले जाते हैं। डॉ. कमलेश बताते हैं कि बाजार में शुगर के मरीजों के लिए जो इंसुलिन इंजेक्शन तैयार किया जाता है, उसका निर्माण भी इन्हीं पत्तियों के अर्क से किया जाता है। यही कारण है कि आयुर्वेद और आधुनिक कृषि विज्ञान दोनों में इसे शुगर के उपचार के लिए एक रामबाण उपाय माना गया है।
घर पर पौधा लगाने की आसान विधि
डॉ. कमलेश ने इस औषधीय पौधे को अपने घर के गमले या आंगन में उगाने का बहुत सरल तरीका साझा किया है। इसे लगाने के लिए सबसे पहले जमीन में डेढ़ से दो फीट गहरा और एक से दो फीट चौड़ा गड्ढा तैयार करना होता है। इसके बाद इस गड्ढे में आधी मात्रा अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद की और आधी मात्रा साधारण मिट्टी की मिलाकर भर देनी चाहिए।
मिश्रण भरने के बाद गड्ढे में भरपूर पानी डालना आवश्यक है। जब मिट्टी सारा पानी सोख ले और गड्ढा लगभग आधा खाली नजर आए, तब उसमें इंसुलिन के पौधे को सावधानीपूर्वक रोप देना चाहिए। इस पौधे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बहुत अधिक मात्रा में खाद या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। यह न्यूनतम देखभाल के बाद भी बेहद शानदार तरीके से विकसित हो जाता है।
खरीदने का सही स्थान और कीमत
डॉ. कमलेश के मुताबिक इस पौधे को रोपने के लिए मानसून यानी बारिश का सीजन सबसे अनुकूल माना जाता है। यदि आप इसकी थोड़ी सी भी देखभाल ठीक प्रकार से कर लें, तो यह बहुत कम समय में आकार ले लेता है। इस पौधे को प्राप्त करने के लिए आप जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से संपर्क कर सकते हैं। वहां की मेडिसिन प्लांट नर्सरी में इस तरह के तमाम औषधीय पौधे तैयार किए जाते हैं, जहां से आप मात्र पचास से साठ रुपये की बेहद मामूली कीमत में इस पौधे को मंगवा सकते हैं।


















