गर्भधारण के बाद महिलाओं के दैनिक खानपान और पोषण संबंधी जरूरतों में कई महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। गर्भस्थ शिशु के सही विकास और मां के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर में नमी का बना रहना सबसे प्राथमिक आवश्यकता मानी जाती है। इसी कारण चिकित्सा विशेषज्ञ अक्सर गर्भवती महिलाओं को अपनी नियमित डाइट में नारियल पानी शामिल करने का मशविरा देते हैं। प्राकृतिक रूप से मिलने वाला यह पेय जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन्स और खनिजों से भरपूर होता है, जो पेट को ठंडक प्रदान करने के साथ-साथ शरीर को तुरंत तरोताजा करने का काम करता है।
शारीरिक क्रियाओं के लिए तरल पदार्थों की बढ़ती आवश्यकता
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में सामान्य दिनों के मुकाबले पानी और तरल पदार्थों की जरूरत काफी ज्यादा बढ़ जाती है। बेहतर रक्त संचार, दुरुस्त पाचन तंत्र और गर्भ में शिशु के इर्द-गिर्द मौजूद तरल का निर्माण करने के लिए पर्याप्त मात्रा में लिक्विड लेना अनिवार्य होता है। इस संबंध में अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी का सुझाव है कि गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 8 से 12 कप पानी या अन्य स्वस्थ तरल पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए। ऐसी स्थिति में सादे पानी के अलावा नारियल पानी एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प बनकर उभरता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी दूर करने में मददगार
नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। भीषण गर्मी के मौसम में, अत्यधिक पसीना बहने पर या उल्टी होने की स्थिति में यह शरीर से खत्म हुए जरूरी मिनरल्स और तरल की फौरन भरपाई करता है। गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों और महीनों में अक्सर महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस, मतली और उल्टी की समस्या से जूझना पड़ता है। इन परिस्थितियों में पर्याप्त तरल बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, जिसमें डॉ. स्मिता वत्स, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी, फोर्टिस, मानेसर के अनुसार नारियल पानी का सेवन शरीर के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
किन महिलाओं को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी
यह समझना बेहद आवश्यक है कि नारियल पानी किसी बीमारी का संपूर्ण इलाज नहीं है। शरीर में पानी की कमी दूर करने के लिए साधारण पेयजल पीना भी उतना ही उपयोगी और सुरक्षित है। नारियल पानी संतुलित खानपान का एक हिस्सा बन सकता है, मगर इसका उपभोग प्रत्येक महिला की व्यक्तिगत सेहत और आहार योजना के आधार पर ही तय होना चाहिए। जिन महिलाओं को गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज की शिकायत होती है, उन्हें इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा के स्तर को ध्यान में रखकर ही इसे पीना चाहिए। इसके अतिरिक्त, किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को, जिन्हें अपने शरीर में पोटैशियम का स्तर नियंत्रित रखना पड़ता है, नारियल पानी का अत्यधिक सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए।



















