झारखंड के रांची निवासी डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य जांच के क्षेत्र में एक नई पोर्टेबल मशीन तैयार की है। यह अत्याधुनिक उपकरण मात्र एक बूंद खून के नमूने से केवल 15 मिनट के भीतर 75 तरह की स्वास्थ्य जांच पूरी करने में सक्षम है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अक्सर महंगे पैथोलॉजी परीक्षणों और लंबी प्रतीक्षा अवधि का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक को बेहद किफायती और सुलभ बनाया गया है, जहां जांच का खर्च मात्र ₹25 से शुरू होता है।
ग्रामीण इलाकों में जांच को आसान बनाने का लक्ष्य
अक्सर पारंपरिक पैथोलॉजी लैब में जांच कराने पर रिपोर्ट मिलने में 24 घंटे तक का समय लग जाता है, और कई बार परिणामों की सटीकता को लेकर भी संशय रहता है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग आर्थिक तंगी के कारण समय पर जांच नहीं करा पाते। डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार यह मशीन आकार में काफी छोटी है, जिसके कारण इसे किसी भी सुदूर गांव या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आसानी से स्थापित किया जा सकता है। केंद्र सरकार से पूर्ण रूप से प्रमाणित और अनुमोदित इस मशीन का प्रदर्शन नई दिल्ली के भारत मंडपम में भी किया गया, जहां झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस नवाचार का अवलोकन कर इसकी सराहना की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यूनतम खून के नमूने पर आधारित प्रणाली
आमतौर पर जब कोई व्यक्ति किसी सामान्य लैब में ब्लड टेस्ट के लिए जाता है, तो वहां 2 से 3 सीसी खून का नमूना लिया जाता है। इसके विपरीत, इस नई मशीन में केवल एक बूंद खून ही पर्याप्त होता है। उपकरण के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े कई उन्नत तंत्र मौजूद हैं, जो सभी रिपोर्ट्स को मात्र 10 मिनट में सत्यापित कर देते हैं। इस डिवाइस के जरिए हीमोग्लोबिन और शुगर जैसी महत्वपूर्ण जांचों के परिणाम केवल 30 से 40 सेकंड के अंदर सामने आ जाते हैं। इसके साथ ही कंपलीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, लंग्स फंक्शन टेस्ट के अलावा डेंगू, टाइफाइड और विभिन्न प्रकार की एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों का विश्लेषण भी 10 से 15 मिनट में हो जाता है।
ओटीपी और डिजिटल परामर्श की प्रक्रिया
इस प्रणाली के संचालन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित रखी गई है। जांच के समय मरीज का नाम और वजन जैसी बुनियादी जानकारियां सिस्टम में दर्ज की जाती हैं। इसके पश्चात संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर एक ओटीपी भेजा जाता है। इस ओटीपी को दर्ज करते ही जांच रिपोर्ट तुरंत जनरेट हो जाती है। यदि रिपोर्ट में शुगर या कोई अन्य पैरामीटर असंतुलित या बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो मरीज को 10 मिनट के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टर का परामर्श भी मिल जाता है। चिकित्सक द्वारा जारी किया गया डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन सीधे मरीज के फोन पर पहुंच जाता है, जिसे डाउनलोड करके वे किसी भी मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले सकते हैं।



















