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फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानिए बिना शराब पिए युवाओं में क्यों बढ़ रहा फैटी लिवर और इससे कैसे बचेंस्वास्थ्य
8 अग॰ 2026, 8:07 am (1 दिन पहले)· 2

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानिए बिना शराब पिए युवाओं में क्यों बढ़ रहा फैटी लिवर और इससे कैसे बचें

फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार 25 से 40 वर्ष के गैर-शराबी युवा भी मोटापा और अस्वास्थ्यकर दिनचर्या के कारण फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं। सही खान-पान, 45 मिनट के व्यायाम और 8 घंटे की नींद से इस खतरे को दूर रखा जा सकता है।

लिवर से जुड़ी बीमारियों का जिक्र आते ही आम तौर पर यही समझा जाता है कि यह समस्या केवल शराब का अत्यधिक सेवन करने वाले व्यक्तियों को ही प्रभावित करती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान समय में 25 से 40 वर्ष की आयु सीमा वाले ऐसे अनेक युवा भी फैटी लिवर की गंभीर समस्या की चपेट में आ रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी शराब की एक बूंद भी नहीं पी है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर कंसलटेंट डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि आज के दौर में असंतुलित खान-पान, फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन, भोजन में शर्करा की अधिक मात्रा, अनियंत्रित वजन, पेट के आसपास जमा होने वाली जिद्दी चर्बी और अनियमित जीवनशैली इस बीमारी के मुख्य कारणों के रूप में उभरे हैं। सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह है कि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट या दिखाई देने वाले लक्षण प्रकट नहीं होते, जिससे लोग अनजाने में बीमारी को बढ़ने देते हैं। ऐसे में शुरुआती स्तर पर ही अपनी दैनिक जीवनशैली में आवश्यक सुधार करना ही इस समस्या से सुरक्षा का सबसे प्रभावी मार्ग है।

शराब न पीने वालों में क्यों बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा

डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार समाज में यह व्यापक भ्रांति फैली हुई है कि लिवर में वसा जमा होने का इकलौता कारण मदिरापान ही है। इसके विपरीत, आज के परिदृश्य में मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम इसके सबसे प्रमुख और बड़े कारक बनकर सामने आए हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार जिन व्यक्तियों का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI निर्धारित मानक से अधिक होता है, उनमें फैटी लिवर विकसित होने का जोखिम काफी ज्यादा रहता है। उच्च BMI वाले लोगों के शरीर में अतिरिक्त वसा का संचय तेजी से होता है, जो धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाओं में जमा होने लगता है। हालांकि, इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि केवल अधिक वजन या मोटे दिखाई देने वाले लोग ही इस विकार से प्रभावित होते हैं। कई बार सामान्य या कम वजन वाले पतले व्यक्ति भी फैटी लिवर का शिकार बन जाते हैं।

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पतले दिखने वाले लोग भी नहीं हैं सुरक्षित

बाहरी शारीरिक बनावट देखकर किसी व्यक्ति के पूर्ण स्वास्थ्य का अनुमान लगाना भ्रामक हो सकता है। डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत स्पष्ट करते हैं कि कई लोग देखने में पतले और छरहरे लगते हैं, लेकिन उनके पेट के हिस्से पर चर्बी जमा होती है और उनके शरीर में मांसपेशियों का अनुपात बहुत कम होता है। ऐसे व्यक्तियों के शरीर की आंतरिक संरचना में फैट का स्तर अधिक और मसल्स का स्तर न्यूनतम होता है। इस शारीरिक स्थिति के कारण लिवर धीरे-धीरे अपने भीतर वसा को जमा करने लगता है। इसके साथ ही, दैनिक जीवन में नियमित व्यायाम न करना और दिन का अधिकांश समय एक ही जगह बैठकर बिताने की आदत इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना देती है। इसलिए केवल शारीरिक वजन को देखकर खुद को पूरी तरह निरोगी मान लेना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।

दैनिक जीवन की वे आदतें जो लिवर को पहुंचा रही हैं नुकसान

आधुनिक दौर की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी ने लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत ने उन आम आदतों को रेखांकित किया है जो धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं

  • नाश्ता छोड़ना: सुबह के समय सही समय पर पौष्टिक नाश्ता न करना शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
  • लंबा सफर: प्रतिदिन लंबे समय तक यात्रा करने से शारीरिक थकान बढ़ती है और भोजन का समय अनियंत्रित हो जाता है।
  • फास्ट फूड पर निर्भरता: दोपहर के भोजन में बर्गर या अन्य फास्ट फूड खाकर काम चलाने की प्रवृत्ति लिवर में फैट बढ़ाती है।
  • मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन: दिनभर में बार-बार चीनी युक्त चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीने से शरीर में कैलोरी और शुगर की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है।
  • रात को बिना शारीरिक गतिविधि के सो जाना: देर रात घर लौटने के बाद बिना किसी भी प्रकार की शारीरिक मेहनत या चहलकदमी किए तुरंत सो जाना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

फैटी लिवर से बचाव के आसान और प्रभावी उपाय

फैटी लिवर से सुरक्षा पाने और लिवर के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए किसी अत्यधिक महंगे या जटिल चिकित्सीय इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार अपनी दिनचर्या में छोटे और अनुशासित बदलाव करके इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बचाव के लिए निम्नलिखित मुख्य कदम उठाने का सुझाव दिया है

  • पर्याप्त नींद: प्रतिदिन नियमित रूप से लगभग 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण और अच्छी नींद अवश्य लें।
  • समय पर नाश्ता: सुबह उठकर निर्धारित समय पर संतुलित और स्वस्थ नाश्ता करने की आदत डालें।
  • नियमित शारीरिक व्यायाम: रोजाना कम से कम 45 मिनट के लिए एरोबिक एक्सरसाइज करें या तेज चाल से पैदल चलें।
  • वजन पर नियंत्रण: अपने शरीर के कुल वजन और बीएमआई को संतुलित सीमा के भीतर बनाए रखें।
  • संतुलित दोपहर का भोजन: दोपहर के समय सही समय पर सुपाच्य और पौष्टिक भोजन ग्रहण करें।
  • परहेज: अत्यधिक जंक फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और बहुत अधिक मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाकर रखें।
  • शराब से पूरी दूरी: मदिरा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें।

यदि लोग अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली को सामान्य, अनुशासित और संतुलित बना लेते हैं, तो वे बिना किसी बड़ी परेशानी के फैटी लिवर के खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

सवाल-जवाब

क्या शराब न पीने वालों को भी फैटी लिवर हो सकता है?
हां, 25 से 40 वर्ष के गैर-शराबी युवा भी खराब खान-पान, मोटापे, फास्ट फूड और शारीरिक व्यायाम की कमी के कारण फैटी लिवर का शिकार हो सकते हैं।
पतले दिखने वाले लोगों को फैटी लिवर का खतरा क्यों होता है?
जिन लोगों का शरीर बाहर से पतला दिखता है लेकिन पेट पर चर्बी होती है और मांसपेशियां कम होती हैं, उनके लिवर में भी धीरे-धीरे वसा जमा होने लगती है।
फैटी लिवर से बचाव के लिए रोज कितना व्यायाम करना चाहिए?
डॉक्टर महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार फैटी लिवर से बचने के लिए रोजाना कम से कम 45 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज या तेज चाल से पैदल चलना चाहिए।
फैटी लिवर से बचने के लिए कौन-सी दैनिक आदतें सुधारनी चाहिए?
सुबह समय पर नाश्ता करें, दोपहर का भोजन समय पर लें, रोजाना 8 घंटे की नींद लें, जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से दूर रहें तथा रात को बिना शारीरिक हलचल के तुरंत न सोएं।
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