मौसम में बदलाव के साथ ही सर्दी, जुकाम, गले में खराश और तमाम तरह के वायरल संक्रमणों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस दौर में शरीर को सही पोषण और पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद में विभिन्न फलों, सब्जियों और जड़ी-बूटियों से तैयार होने वाले पारंपरिक पेयों का जिक्र मिलता है। हालांकि इन्हें किसी भी बीमारी का सीधा इलाज नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इन्हें संतुलित खानपान, पूरी नींद और साफ-सफाई के साथ अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
आंवला जूस
आंवला यानी इंडियन गूज़बेरी विटामिन C और अन्य एंटी-ऑक्सीडेंट तत्वों का एक बेहतरीन खजाना माना जाता है। पारंपरिक खानपान में इस फल का विशेष स्थान रहा है। आंवला के रस को पानी में मिलाकर एक सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है। चूंकि यह स्वाद में काफी खट्टा होता है, इसलिए इसमें अतिरिक्त चीनी मिलाने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पेट में एसिडिटी की पुरानी शिकायत रहती है, तो इस पेय को अपनी डाइट में जोड़ने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए।
गिलोय का रस
आयुर्वेदिक परंपरा में गिलोय का उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है, लेकिन इसके इस्तेमाल में खास सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। विशेष तौर पर जिन लोगों को लिवर से जुड़ी कोई समस्या है या जो नियमित रूप से अन्य दवाएं ले रहे हैं, उन्हें चिकित्सक की सलाह के बिना गिलोय का सेवन करने से बचना चाहिए। यह किसी भी प्रकार के फ्लू का अचूक इलाज या संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित रखने वाला कोई जादुई उपाय नहीं है, इसलिए इसका उपयोग समझदारी से ही किया जाना चाहिए.
तुलसी और अदरक का गर्म पेय
सर्दी और फ्लू के दिनों में तुलसी के पत्तों और अदरक से तैयार गर्म ड्रिंक को लोग काफी पसंद करते हैं। अदरक की खास तासीर और गर्माहट गले को तुरंत सुकून पहुंचाती है। आप पानी में ताजी तुलसी की पत्तियां और कुचला हुआ अदरक डालकर अच्छी तरह उबालकर एक बेहतरीन इन्फ्यूजन तैयार कर सकते हैं। इसे हल्का गुनगुना होने पर पिया जाना चाहिए। स्वाद को बेहतर बनाने के लिए इसमें थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि उबलते हुए बहुत गर्म पानी में कभी भी शहद न मिलाएं।
गाजर और चुकंदर का रस
गाजर और चुकंदर को मिलाकर बनाए जाने वाले जूस से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से फोलेट, पोटैशियम और विभिन्न प्रकार के एंटी-ऑक्सीडेंट्स शामिल होते हैं। इस रस को हमेशा ताजा तैयार करके नियंत्रित मात्रा में ही पीना चाहिए। हालांकि इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि साबुत फलों और कच्ची सब्जियों में जूस की तुलना में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए सेहतमंद रहने के लिए केवल जूस पर ही पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है.
नींबू और आंवला का मिश्रण
नींबू और आंवला दोनों ही ऐसे घटक हैं जो विटामिन C से भरपूर होते हैं और इन्हें पानी के साथ मिलाकर एक तरोताजा कर देने वाला पेय तैयार किया जा सकता है। इसमें ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करने के बजाय यदि हल्का मीठा करना हो तो थोड़ा सा शहद मिलाया जा सकता है। यदि आपको पेट में गैस या एसिडिटी की दिक्कत रहती है, तो इस विशेष ड्रिंक का सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए ताकि पाचन तंत्र पर कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े।



















