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जयपुर में डॉक्टरों का कमाल, गर्भ में ही बच्चे की बेकाबू दिल की धड़कन को किया सामान्यस्वास्थ्य
25 जून 2026, 6:51 am (80 दिन पहले)· 3

जयपुर में डॉक्टरों का कमाल, गर्भ में ही बच्चे की बेकाबू दिल की धड़कन को किया सामान्य

जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने गर्भ में ही पल रहे शिशु के दिल की गंभीर बीमारी का इलाज कर उसकी जान बचा ली. SVT नामक हृदय विकार से जूझ रहे भ्रूण की धड़कन को खास थैरेपी से सामान्य किया गया.

गर्भ में पल रहे एक शिशु का दिल जब बेकाबू रफ्तार से धड़कने लगा और उसकी जान पर बन आई, तब जयपुर के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ इलाज से उसे नई जिंदगी दे दी. राजधानी जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के फीटल कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने यह कारनामा कर दिखाया, जहां गर्भ के भीतर ही बच्चे के हृदय का सफल उपचार किया गया.

मामला गर्भावस्था के 25वें सप्ताह का है, जब जांच में भ्रूण के अंदर सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया यानी SVT नाम के गंभीर हृदयगति विकार का पता चला. इस बीमारी की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे का दिल बहुत तेज रफ्तार से धड़क रहा था. दिल की इस असामान्य और अनियंत्रित गति ने हालात को बेहद नाजुक बना दिया था, क्योंकि इससे बच्चे को हार्ट फेलियर होने और गर्भ में ही दम तोड़ देने का खतरा पैदा हो गया था. यह स्थिति मां और बच्चे, दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी.

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सही पहचान और तुरंत शुरू हुआ इलाज

अस्पताल की फीटल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने बच्चे की इस गंभीर बीमारी को ठीक-ठीक पहचाना और बिना देर किए खास उपचार शुरू कर दिया. इस मुश्किल स्थिति से निपटने के लिए गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थैरेपी दी गई. इस आधुनिक थैरेपी के तहत दी गई दवाओं का असर इतना तेज रहा कि महज 72 घंटे के भीतर ही गर्भस्थ शिशु की धड़कन सामान्य स्तर पर लौट आई.

डॉक्टरों की निगरानी में हुए इस इलाज के बाद बच्चे की हृदय गति लगातार अगले 10 सप्ताह तक सामान्य बनी रही. इसी वजह से बच्चे का गर्भ में विकास सुरक्षित तरीके से होता रहा और किसी तरह की दिक्कत सामने नहीं आई.

35वें सप्ताह में डिलीवरी, फिर मिली छुट्टी

इसके बाद गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में डॉक्टरों की टीम ने महिला का सुरक्षित सिजेरियन प्रसव कराया. जन्म के बाद भी नवजात को एक बार फिर एंटी-अरिदमिक थैरेपी के तहत जरूरी दवाएं दी गईं, ताकि उसकी धड़कन को पूरी तरह काबू में रखा जा सके. जब नवजात की हृदय गति पूरी तरह सामान्य हो गई, तब अस्पताल प्रबंधन ने मां और बच्चे दोनों को सकुशल छुट्टी दे दी.

डॉ. प्रेरणा भट का यह इलाज पूरी तरह कामयाब रहा और अब नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ है. गर्भ के भीतर दिल की बीमारी का इस तरह सफल उपचार अपने आप में बेहद दुर्लभ माना जा रहा है.

सवाल-जवाब

गर्भ में पल रहे बच्चे को कौन सी बीमारी थी?
बच्चे को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया यानी SVT नाम का गंभीर हृदयगति विकार था, जिसके कारण उसका दिल बहुत तेज रफ्तार से धड़क रहा था.
यह बीमारी कब पता चली?
गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में जांच के दौरान भ्रूण में इस हृदय विकार का पता चला.
इलाज कहां और किसने किया?
जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में फीटल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने यह इलाज किया.
इलाज में कौन सी थैरेपी दी गई?
गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थैरेपी दी गई, जिसकी दवाओं से भ्रूण की धड़कन सामान्य हुई.
धड़कन सामान्य होने में कितना समय लगा?
थैरेपी शुरू होने के महज 72 घंटे के भीतर ही गर्भस्थ शिशु की हृदय गति सामान्य स्तर पर आ गई.
डिलीवरी कब और कैसे हुई?
गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षित सिजेरियन प्रसव कराया.
अब बच्चे की हालत कैसी है?
इलाज पूरी तरह सफल रहा और अब नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ है, मां और बच्चे दोनों को सकुशल छुट्टी दे दी गई है.
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