जिम में लगातार पसीना बहाने या केवल एब्स की एक्सरसाइज करने के बाद भी कई बार पेट के आसपास जमी चर्बी कम होने का नाम नहीं लेती। फिटनेस जानकारों का मानना है कि शरीर के किसी एक हिस्से को लक्ष्य बनाकर वहां का फैट पूरी तरह हटाना संभव नहीं होता। वास्तविक और स्थायी बदलाव तभी देखने को मिलता है जब कोर की आंतरिक मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ पूरे शरीर का फैट बर्न करने पर काम किया जाए। कमर को सुडौल आकार देने और पेट की ढीली मांसपेशियों को कसने के लिए सही तकनीक वाले वर्कआउट को दिनचर्या में जोड़ना बेहद असरदार साबित होता है।
1. प्लैंक से कोर और लोअर बैक को दें मजबूती
प्लैंक को देखने में एक बेहद सामान्य कसरत समझा जाता है, लेकिन शरीर को सही संतुलन और फॉर्म में थामे रखना वास्तव में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। यह वर्कआउट न केवल कोर को गहराई से मजबूत बनाता है, बल्कि पीठ के निचले हिस्से और अंदरूनी मांसपेशियों को भी सीधे सक्रिय करता है। नियमित रूप से सही मुद्रा में प्रतिदिन 30 से 60 सेकंड तक प्लैंक होल्ड करने से पेट और कमर के मध्य भाग में कसावट आने लगती है और शारीरिक संतुलन बेहतर होता है।
2. माउंटेन क्लाइम्बर्स से बढ़ाएं हार्ट रेट और स्ट्रेंथ
माउंटेन क्लाइम्बर्स गति और शारीरिक ताकत का एक बेहतरीन तालमेल पेश करता है। यह व्यायाम कोर मांसपेशियों को कड़ा करने के साथ-साथ हृदय गति को भी तेज करता है, जिससे कैलोरी तेजी से जलती है। यह कसरत खास तौर पर पेट के निचले हिस्से पर असर डालती है, जहां जमा चर्बी सबसे अधिक जिद्दी और सख्त मानी जाती है। लगातार अभ्यास से यह हिस्सा टोन होने लगता है।
3. लेग रेज से टोन करें पेट का निचला हिस्सा
लेग रेज का प्रभाव अभ्यास शुरू करते ही मांसपेशियों पर महसूस होने लगता है। यह व्यायाम सीधे तौर पर पेट के निचले हिस्से की उन पेशियों को लक्षित करता है जिन्हें आमतौर पर टोन करना सबसे कठिन काम माना जाता है। इस कसरत को करते समय जल्दबाजी करने अथवा पैरों को तेजी से हिलाने के बजाय नियंत्रित और धीमी गति से ऊपर उठाना आवश्यक होता है। धीमी गति से ही मांसपेशियों पर सही दबाव पड़ता है और खिंचाव असर दिखाता है।
4. बाइसिकल क्रंचेस से कमर के दोनों किनारों को दें सुडौल रूप
लंबे समय तक केवल साधारण क्रंचेस करने से प्रगति रुक जाती है और वे बेअसर महसूस होने लगते हैं। बाइसिकल क्रंचेस में शरीर का घुमाव और सक्रिय गति शामिल होती है, जिससे सामने के पेट के साथ-साथ कमर के किनारों की मांसपेशियां भी सही आकार में आती हैं। यह एक ही समय में कई मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय कर शरीर की संरचना को सुधारने में मदद करता है।
5. 15 से 20 मिनट का हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT)
अगर मुख्य लक्ष्य तेजी से चर्बी कम करना है, तो दिनचर्या में हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग को जरूर स्थान देना चाहिए। इसमें बेहद कम समय के लिए तीव्र कसरतें, जैसे ब keyरपीज या जंप स्क्वाट्स की जाती हैं और बीच में थोड़ा आराम दिया जाता है। यह फैट बर्न करने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है क्योंकि वर्कआउट समाप्त होने के बाद भी मेटाबॉलिज्म काफी समय तक सक्रिय बना रहता है। इसके लिए दिनभर में केवल 15 से 20 मिनट निकालना भी पर्याप्त साबित होता है।
निरंतरता और सही फॉर्म ही दिलाएंगे स्थायी नतीजे
सिर्फ कोर पर ध्यान केंद्रित करने वाले वर्कआउट करने से एब्स की ताकत तो बढ़ सकती है, लेकिन सपाट पेट का लक्ष्य तभी हासिल होता है जब फैट लॉस और मांसपेशियों की मजबूती साथ-साथ चलें। कोई एक अकेली एक्सरसाइज पूरी समस्या को ठीक नहीं कर सकती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यायाम सही तकनीक के साथ किया जाए, रूटीन में निरंतरता रहे और हर हफ्ते वर्कआउट का तरीका बदला न जाए। व्यायाम बहुत ज्यादा करने से अधिक अहमियत इस बात की है कि सही अभ्यासों को परिणामों के दिखने तक लगातार जारी रखा जाए।



















