उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्वाइन फ्लू के प्रसार ने स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से लेकर अब तक शहर में इस संक्रामक बीमारी के कुल 40 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। संक्रमण की चपेट में आए मरीजों में से एक की मौत भी दर्ज की गई है। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए लाला लाजपत राय (एलएलआर) अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वाइन फ्लू और डेंगू से पीड़ित मरीजों हेतु 40 विशेष बेड पहले से आरक्षित कर लिए हैं। एलएलआर अस्पताल के सीएमएस डॉ. सौरभ अग्रवाल ने जानकारी दी है कि अस्पताल में अब तक स्वाइन फ्लू के चार मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से एक अत्यंत गंभीर मरीज ने दम तोड़ दिया, जबकि शेष तीन मरीजों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
हल्के लक्षणों में भी टैमीफ्लू दवा के उपयोग को मंजूरी
संक्रमण की रोकथाम और शुरुआती स्तर पर ही बीमारी पर काबू पाने के लिए सरकार की तरफ से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया गया है। स्वाइन फ्लू के उपचार में प्रभावी मानी जाने वाली टैमीफ्लू दवा के उपयोग के नियमों में ढील देते हुए अब इसे हल्के लक्षणों में भी देने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। डॉ. सौरभ अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यदि परिवार के किसी भी सदस्य में तेज बुखार, गले में खराश या सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे प्रारंभिक लक्षण दिखाई पड़ते हैं, तो उन्हें टैमीफ्लू दी जा सकती है। प्राथमिक और हल्के लक्षणों वाले मामलों में आमतौर पर दिन में एक गोली देने का नियम निर्धारित किया गया है। वहीं दूसरी ओर, यदि किसी मरीज की शारीरिक स्थिति गंभीर बनी रहती है, तो यह दवा 10 दिनों तक लगातार चलाने का प्रावधान तय किया गया है। चिकित्सकों ने जोर देकर कहा है कि मरीज स्वयं दवा न लें, बल्कि डॉक्टर के परामर्श के बाद ही खुराक और अवधि तय करवाएं।
सामान्य मौसमी फ्लू समझने की भूल न करें लोग
चिकित्सकों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के प्रारंभिक लक्षण बिल्कुल आम मौसमी बुखार और जुकाम जैसे ही प्रतीत होते हैं। इसी समानता के कारण अधिकांश लोग इसे सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है। यदि बुखार के साथ लगातार खांसी, गले में असहनीय दर्द, अत्यधिक जुकाम अथवा सांस लेने में खिंचाव या परेशानी महसूस हो, तो बिना समय गंवाए तत्काल नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। एलएलआर अस्पताल प्रशासन ने गंभीर रूप से बीमार मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों की विशेष ड्यूटी लगाई है। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर सही उपचार शुरू होने से मरीज की स्थिति को नाजुक होने से बचाया जा सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ा
कानपुर के कई निचले और ग्रामीण इलाकों में हालिया जलभराव के बाद मौसमी और संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। कुछ दिन पहले पांडु नदी में आए उफान के चलते बर्रा-आठ, रविदासपुरम और पिपौरी गांव सहित अनेक रिहायशी बस्तियों में पानी भर गया था। इसके साथ ही गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से भोपालपुरवा, बनियापुरवा और कटरी क्षेत्र के कई गांवों में भारी जलभराव देखने को मिला था। पानी घटने के बाद इन बाढ़ प्रभावित बस्तियों में बड़ी संख्या में लोग बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक विकारों से पीड़ित हो रहे हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर नागरिकों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। लोगों को आवश्यक दवाएं वितरित की जा रही हैं और जहां भी जलजमाव में मच्छरों का लार्वा पाया जा रहा है, उसे रसायनों के छिड़काव से तुरंत नष्ट किया जा रहा है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी लक्षण के उभरते ही तुरंत चिकित्सीय जांच कराने की सख्त हिदायत दी जा रही है।



















