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सोते समय बड़बड़ाने की आदत कब बन जाती है चिंता का विषय, समझिए इसके पीछे के कारणस्वास्थ्य
19 सित॰ 2026, 6:35 pm (16 मिनट पहले)· 0

सोते समय बड़बड़ाने की आदत कब बन जाती है चिंता का विषय, समझिए इसके पीछे के कारण

नींद में बुदबुदाने या स्पष्ट वाक्य बोलने को सोम्निलोक्वी कहा जाता है। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन तनाव या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ यह स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है।

रात में सोते समय अचानक बुदबुदाना, अस्पष्ट आवाजें निकालना या फिर साफ शब्दों में बातें करना एक बेहद आम अनुभव है। कई बार व्यक्ति ऐसी बातें बोलता है जिनका कोई अर्थ समझ नहीं आता, जबकि कुछ मामलों में लोग पूरे वाक्य धाराप्रवाह बोलते दिखाई देते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को सोम्निलोक्वी अथवा स्लीप टॉकिंग के नाम से जाना जाता है। अधिकांश लोगों के लिए यह कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं होती और कभी-कभार ऐसा होना पूरी तरह स्वाभाविक माना जाता है। इसके बावजूद, यदि रात को बोलने का यह सिलसिला लगातार बना रहे या इसके साथ असामान्य शारीरिक लक्षण दिखाई देने लगें, तो यह किसी अंतर्निहित स्लीप डिसऑर्डर की ओर इशारा कर सकता है।

नींद में बोलने के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींद में बात करने के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। यह स्थिति नींद के किसी भी अलग-अलग चरण के दौरान उभर सकती है। कई लोगों में मानसिक तनाव और एंग्जायटी यानी घबराहट की स्थिति इस समस्या को काफी हद तक बढ़ा देती है। जब दिमाग अत्यधिक मानसिक थकान से गुजर रहा हो या व्यक्ति को नियमित रूप से पर्याप्त और गहरी नींद न मिल पा रही हो, तब सोते समय बोलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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इसके अतिरिक्त, अचानक तेज बुखार आ जाना, नींद की भारी कमी होना या दैनिक जीवन में सामान्य से अधिक तनाव होना भी इस आदत को सक्रिय कर सकता है। उम्र के लिहाज से देखा जाए तो बच्चों में नींद में बोलने की प्रवृत्ति काफी अधिक देखी जाती है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं और उनकी उम्र बढ़ती है, यह आदत स्वाभाविक रूप से कम या खत्म हो जाती है।

क्या सपनों से जुड़ा होता है नींद का बड़बड़ाना

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या व्यक्ति वही बोलता है जो वह सपने में देख रहा होता है। नींद में बात करने और सपने देखने के बीच कुछ मामलों में संबंध हो सकता है, परंतु हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है। सोते समय व्यक्ति के मुंह से निकलने वाले शब्द उसके सपने की वास्तविक कहानी या उसकी असल सोच को प्रतिबिंबित नहीं करते। इसलिए नींद में कही गई बातों को किसी व्यक्ति की सच्ची भावनाएं या आंतरिक विचार मानकर कोई भी व्यक्तिगत राय या निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता।

कब जरूरी हो जाती है डॉक्टर की सलाह

यदि नींद में बोलने की यह स्थिति केवल कभी-कभार घटती है और इससे व्यक्ति की नींद में कोई खलल नहीं पड़ता, तो सामान्य तौर पर किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, यदि यह आदत अचानक शुरू हो जाए, इसकी आवृत्ति बहुत अधिक बढ़ जाए, या फिर इसके साथ कुछ गंभीर लक्षण दिखाई देने लगें, तो सतर्क होना बेहद आवश्यक हो जाता है। उदाहरण के लिए, नींद में जोर-जोर से चीखना, अचानक हिंसक शारीरिक हरकतें करना, चौंक कर उठ जाना, सांस लेने में तकलीफ महसूस होना या दिनभर अत्यधिक सुस्ती और नींद आना ऐसे लक्षण हैं जो किसी गंभीर विकार की तरफ इशारा करते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य डॉक्टर अथवा स्लीप स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना उचित रहता है।

रात की बेहतर नींद के लिए जीवनशैली में बदलाव

स्लीप टॉकिंग की समस्या को नियंत्रित करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए दैनिक दिनचर्या में कुछ साधारण सावधानियां बरती जा सकती हैं। सबसे पहले, प्रतिदिन सोने और सुबह जागने का एक निश्चित समय निर्धारित करें और उसका कड़ाई से पालन करें। शाम ढलने के बाद अत्यधिक कैफीन के सेवन से बचें ताकि मस्तिष्क उत्तेजित न रहे। इसके साथ ही, रात को बिस्तर पर जाने से ठीक पहले स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सीमित करना बहुत फायदेमंद साबित होता है। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए अपनी दिनचर्या में रिलैक्सेशन तकनीक और ध्यान जैसी मन को शांत करने वाली आदतों को शामिल करना चाहिए।

सवाल-जवाब

नींद में बात करने को मेडिकल भाषा में क्या कहा जाता है?
चिकित्सा विज्ञान में नींद में बोलने या बुदबुदाने की स्थिति को सोम्निलोक्वी या स्लीप टॉकिंग कहा जाता है।
क्या नींद में बात करना किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?
आमतौर पर कभी-कभार ऐसा होना पूरी तरह सामान्य है और यह किसी छिपी बीमारी का संकेत नहीं होता, बशर्ते इसके साथ अन्य असामान्य लक्षण न हों।
क्या नींद में कही गई बातें व्यक्ति के असल विचारों को दर्शाती हैं?
नहीं, नींद में बोले गए शब्द व्यक्ति के वास्तविक विचारों, भावनाओं या सपनों की कहानी को सटीक रूप से नहीं दर्शाते हैं।
किन स्थितियों में स्लीप टॉकिंग के लिए डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि नींद में बोलने के साथ चीखना, हिंसक हरकतें, अचानक सांस लेने में दिक्कत या दिन में बहुत ज्यादा नींद आने की समस्या हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
नींद में बड़बड़ाने की आदत को कम करने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
नियमित सोने का समय तय करें, रात में कैफीन और गैजेट्स के उपयोग से बचें, और तनाव घटाने के लिए रिलैक्सेशन तकनीकों का सहारा लें।
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