वित्त वर्ष 2025-26 के चुनावी चंदे के आधिकारिक आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। निर्वाचन आयोग को सौंपी गई ताजा जानकारी के अनुसार, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले दल को पूरे वित्तीय वर्ष में कुल 12.10 करोड़ रुपये की धनराशि दान स्वरूप प्राप्त हुई। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में भारी गिरावट को दर्शाता है, जब संगठन ने 38.10 करोड़ रुपये का संग्रह दर्ज कराया था। केवल बारह महीनों के भीतर चंदे की कुल राशि में लगभग 68 प्रतिशत की यह कमी पार्टी के चुनावी और संगठनात्मक खर्चों के लिहाज से एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
प्रूडेंट और ट्राइडेंट के बूते टिका कुल चंदे का बड़ा हिस्सा
पार्टी की ओर से चुनाव आयोग में दर्ज कराई गई दानदाताओं की सूची में कुल 1,202 प्रविष्टियां शामिल हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इस पूरी सूची में प्राप्त कुल राशि का करीब 83 प्रतिशत केवल दो प्रमुख संस्थाओं के माध्यम से आया। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट तथा ट्राइडेंट लिमिटेड दोनों ने दल को 5-5 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिससे अकेले इन दो स्रोतों से 10 करोड़ रुपये की भारी रकम जुटाई गई।
ट्राइडेंट लिमिटेड का यह दान विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इस औद्योगिक प्रतिष्ठान की नींव राजिंदर गुप्ता ने रखी थी, जो आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य बने थे। कंपनी की तरफ से 5 करोड़ रुपये का चेक 9 जनवरी 2026 को जारी किया गया था। चेक जारी होने के समय गुप्ता संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे, किंतु आगे चलकर अप्रैल 2026 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।
शीर्ष नेताओं और अन्य हस्तियों का व्यक्तिगत योगदान
संगठन के प्रमुख चेहरों ने भी अपने स्तर पर पार्टी कोष में व्यक्तिगत सहयोग प्रदान किया। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूरे वर्ष के दौरान 10-10 हजार रुपये की तीन किस्तों में कुल 30 हजार रुपये का अंशदान दिया। इसी क्रम में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने प्रति माह 3,500 रुपये की दर से 12 किस्तों में 42 हजार रुपये की राशि संगठन को समर्पित की।
नेताओं में सबसे बड़ा व्यक्तिगत सहयोग पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा की ओर से दर्ज किया गया, जिन्होंने 10-10 हजार रुपये के 12 भुगतानों के जरिए कुल 1.20 लाख रुपये का योगदान दिया। दानदाताओं की इस विस्तृत सूची में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के वर्तमान सह-संयोजक अशुतोष रांका का नाम भी रेखांकित किया गया है। रांका ने सीजेपी की बागडोर संभालने से पूर्व आम आदमी पार्टी को 21,100 रुपये की सहयोग राशि प्रदान की थी।
तीन वर्षों के उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय समीकरण
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के चुनावी खातों पर नजर डालें तो आम आदमी पार्टी के कोष संग्रह में लगातार भारी उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ है। वर्ष 2023-24 में संगठन को 11.06 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इसके अगले साल यानी 2024-25 में यह राशि अप्रत्याशित उछाल के साथ 38.10 करोड़ रुपये के स्तर तक जा पहुंची थी, जो अब 2025-26 में पुनः फिसलकर 12.10 करोड़ रुपये पर सिमट गई है।
फंडिंग में कमी का यह रुख केवल एक दल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों के वित्तीय दस्तावेजों में भी साफ दिखाई दिया है। उदाहरण के तौर पर, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का वार्षिक चंदा 2024-25 के 83.03 करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर 2025-26 में 58.25 करोड़ रुपये रह गया। वहीं वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के चंदे में और भी नाटकीय गिरावट आई, जहां पार्टी ने 2024-25 के 140.04 करोड़ रुपये के संग्रह की तुलना में 2025-26 में मात्र 24.31 करोड़ रुपये प्राप्त होने की घोषणा की। दूसरी ओर, ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) ने अपनी नवीनतम फाइलिंग में 20 हजार रुपये से ऊपर के किसी भी दान की घोषणा नहीं की, जबकि पिछले साल दल ने इस श्रेणी में 60 करोड़ रुपये की आमदनी दिखाई थी।













