समुद्र में बने नए दबाव के क्षेत्र ने देश के बड़े हिस्से में मौसमी गतिविधियों को अचानक तेज कर दिया है। अंडमान सागर और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने डिप्रेशन की वजह से द्वीप समूह में मूसलाधार बारिश और बेहद खराब समुद्री हालात बनने का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही देश के लगभग 23 राज्यों में मानसूनी हलचल के चलते बारिश, बादलों की गरज और तेज हवाओं का दौर देखा जा रहा है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों और पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिणी प्रायद्वीप तक वातावरण में ठंडक और नमी तेजी से बढ़ रही है।
अंडमान और निकोबार में थंडरस्क्वॉल का साया, समंदर में ऊंची लहरें
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में मौसमी डिप्रेशन के असर से 29 सितंबर को काफी व्यापक से व्यापक वर्षा के साथ बिजली कड़कने की गंभीर चेतावनी है। इसके बाद 30 सितंबर से लेकर 4 अक्टूबर के दौरान भी अनेक स्थानों पर रुक-रुक कर बौछारें और गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। 29 सितंबर को द्वीपों पर थंडरस्क्वॉल की स्थिति बन सकती है, जिसमें हवा की सामान्य गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के वक्त 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाने का अनुमान है। अंडमान सागर, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और म्यांमार तटवर्ती जलक्षेत्र में 29 सितंबर की शाम तक समुद्र बेहद उथल-पुथल भरा रहेगा, जिसके चलते तटीय सुरक्षा और आवाजाही को लेकर कड़े एहतियात बरतने की सलाह सामने आई है।
दिल्ली-एनसीआर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा, तापमान में भारी गिरावट
राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम का मिजाज पिछले कुछ दिनों में असामान्य रूप से बदला है। लगातार जारी रिमझिम फुहारों और ठंडी पछुआ हवाओं के मेल ने पारे को नीचे धकेल दिया है। दिल्ली के रिज क्षेत्र में न्यूनतम तापमान लुढ़क कर 17 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे दर्ज किया गया, जिसने पिछले 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। 29 सितंबर 2026 को भी दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच गरज-चमक और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ से हाहाकार, 80 से अधिक लोगों की गई जान
उत्तर प्रदेश में पिछले दो से तीन दिनों के दौरान हुई मूसलाधार और रिकॉर्ड स्तर की बारिश ने कई जिलों को जलमग्न कर दिया है। नदियों के उफान और निचले इलाकों में जलभराव के चलते बाढ़ जैसी विकट परिस्थितियां पैदा हो गई हैं। बारिश और मौसम से जुड़ी विभिन्न दुर्घटनाओं के चलते राज्यभर में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के पूर्वी अंचलों में 30 सितंबर तक बादलों के बरसने की संभावना बनी हुई है, जबकि सूबे के बाकी हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।
पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में हफ्तों से बारिश
पूर्वी भारत के राज्यों में पिछले एक सप्ताह से लगातार नम हवाएं सक्रिय हैं। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई जिलों में बादलों का डेरा जमा हुआ है। बिहार में 1 अक्टूबर तक वर्षा की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। वहीं दूसरी ओर गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम के विभिन्न हिस्सों में 4 अक्टूबर तक छिटपुट से लेकर व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका जताई गई है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा, सामान्य से तेज हवाएं
उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी भूभागों में मौसमी उथल-पुथल ने जोखिम बढ़ा दिया है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी के बीच जमीन खिसकने यानी लैंडस्लाइड होने का बड़ा खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राहगीरों को सतर्क रहने को कहा गया है। उत्तराखंड में 29 सितंबर से लेकर 4 अक्टूबर तक लगातार वर्षा का दौर खिंचने के आसार हैं, जिससे अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य स्तर से काफी नीचे बने रहेंगे। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और सामान्य से अधिक तेज गति वाली हवाएं चलने की बात कही गई है।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मैदानी इलाकों का मिजाज
उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में भी इस चक्रवाती तंत्र का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। पंजाब में बीते दो-तीन दिनों की मध्यम वर्षा के बाद वातावरण सुहावना बना हुआ है और पारे में गिरावट आई है, जहां 29 सितंबर को भी कुछ क्षेत्रों में बारिश की उम्मीद है। हरियाणा में भी बादलों की गड़गड़ाहट और औसत से तेज हवाओं के साथ वर्षा के आसार हैं, जिससे दिन और रात का तापमान सामान्य से ठंडा रहेगा। पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में 29 सितंबर को बारिश हो सकती है, हालांकि 30 सितंबर से राज्य के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम लौटने की संभावना है।
मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसमी चक्र
मध्य भारत के राज्यों में पश्चिमी मध्य प्रदेश के भीतर 29 सितंबर को वर्षा का अलर्ट है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में बादलों की सक्रियता 2 अक्टूबर तक खिंच सकती है। विदर्भ क्षेत्र में 30 सितंबर तक और छत्तीसगढ़ के भूभाग में 4 अक्टूबर तक रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ वर्षा का सिलसिला जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
पूर्वोत्तर के सात राज्यों में 4 अक्टूबर तक भारी बारिश
पूर्वोत्तर के सातों राज्यों में नम मानसूनी हवाएं पूरी तरह प्रभावी हैं। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 4 अक्टूबर तक अनेक स्थानों पर बौछारें पड़ने के आसार हैं। विशेष तौर पर असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 29 और 30 सितंबर को मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में 3 और 4 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर बादलों के जोरदार तरीके से बरसने की आशंका है।
महाराष्ट्र और गुजरात में तेज झोंकों वाली आंधी का अलर्ट
पश्चिमी भारत के तटीय और मैदानी हिस्सों में हवा की तेज गति परेशानी खड़ी कर सकती है। मध्य महाराष्ट्र में 29 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और झोंकों के रूप में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाने का अनुमान है। कोंकण और गोवा के तटीय पट्टों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं 50 किलोमीटर प्रति घंटे के झोंकों के साथ चल सकती हैं। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 4 अक्टूबर तक बारिश जारी रह सकती है। मराठवाड़ा में 29 सितंबर, गुजरात क्षेत्र में 1 अक्टूबर तक और सौराष्ट्र-कच्छ में 30 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान वर्षा होने का पूर्वानुमान है।
दक्षिण प्रायद्वीप में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भारी वर्षा
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक जलभराव और भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, लक्षद्वीप, रायलसीमा, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में 29 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान बारिश होने का अनुमान है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच व्यापक वर्षा और 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक भारी बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक में 1 और 2 अक्टूबर को बारिश का दायरा काफी व्यापक रहेगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 1 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना है। वहीं केरल और माहे में 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक भारी वर्षा तथा 1 से 4 अक्टूबर के बीच अत्यधिक व्यापक बारिश होने के संकेत हैं।



















