रसोई में बनने वाले पकवानों और बाजार के तले हुए खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले तेल की शुद्धता सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य पर असर डालती है। खाद्य तेल को बार-बार तेज आंच पर खौलाने से उसकी आंतरिक संरचना में गहरा रासायनिक बदलाव आ जाता है, जिससे यह सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक बन सकता है। गोरखपुर में मिलावटी तेल के अवैध धंधे और संदिग्ध रिफाइनिंग इकाइयों पर नकेल कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान चला रखा है, जिसके तहत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
लगातार खौलाने से बदल जाता है तेल का रासायनिक ढांचा
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त सुधीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जब भी किसी कुकिंग ऑयल को बार-बार अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है, तो उसका स्वाभाविक रूप पूरी तरह विकृत हो जाता है। तेज आंच के लगातार संपर्क में रहने के कारण तेल के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं और उसमें विषैले यौगिक बनने लगते हैं। नियमित रूप से ऐसे बिगड़े हुए तेल से तैयार भोजन का सेवन लंबे समय में शारीरिक तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
टीपीसी मापने वाले आधुनिक उपकरणों से मौके पर परीक्षण
विभाग की टीमों के पास अब तेल की शुद्धता को तुरंत परखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण उपलब्ध हैं। इन उपकरणों के जरिए मौके पर ही प्रयुक्त खाद्य तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स यानी टीपीसी की मात्रा की सटीक गणना कर ली जाती है। इस डिजिटल जांच से अधिकारियों को बिना किसी देरी के यह स्पष्ट हो जाता है कि कड़ाही या कंटेनर में रखा तेल तय सरकारी मानकों पर खरा उतर रहा है अथवा उसकी गुणवत्ता नष्ट होकर उपभोग के अयोग्य हो चुकी है।
ढाबों और होटलों में दोबारा इस्तेमाल पर सख्त नजर
शहर के विभिन्न रेस्टोरेंट, होटलों और सड़क किनारे चलने वाले ढाबों में एक ही बैच के तेल को लगातार तलने के लिए इस्तेमाल करने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। सहायक आयुक्त के अनुसार, ऐसे प्रतिष्ठानों में खाद्य सामग्री तैयार करने से पहले तेल के मानकों की जांच अनिवार्य है। कई असामाजिक तत्व बड़े प्रतिष्ठानों से निकलने वाले जले और काले पड़ चुके तेल को सस्ते दामों पर इकट्ठा कर लेते हैं। इसके बाद इस कचरा तेल को गैरकानूनी ढंग से प्रोसेस करके बिल्कुल नए खाद्य तेल के रूप में बाजारों में बेचने का प्रयास किया जाता है।
बायोडीजल निर्माण में होता है इस्तेमाल किए गए तेल का निस्तारण
नियमों के तहत इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल यानी यूसीओ का सुरक्षित और व्यवस्थित निस्तारण करना आवश्यक है। इसके लिए सरकार द्वारा अधिकृत व पंजीकृत एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये एजेंसियां व्यवसायियों से उपयोग किया जा चुका जला तेल खरीदती हैं और उसका उपयोग खाद्य श्रृंखला के बजाय केवल गैर-खाद्य उत्पादों, विशेष रूप से बायोडीजल तैयार करने में करती हैं, जिससे यह दोबारा किसी की थाली में न पहुंचे।
ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे बाजार से तेल खरीदते समय अत्यधिक सतर्कता बरतें। खुले डिब्बों या संदिग्ध दुकानों से बिकने वाले लूज तेल की खरीदारी से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। हमेशा सीलबंद और ब्रांडेड पैकेट ही खरीदें तथा उन पर मुद्रित एफएसएसएआई का वैध लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, सील और एक्सपायरी डेट की बारीकी से जांच करें। खरीदारी के समय बरती गई यह जागरूकता परिवार को मिलावटी व हानिकारक तेल के दुष्प्रभावों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है।



















