सितंबर 2015 की एक ठंडी रात को ठीक बारह बजे जब एक आर्टहाउस सिनेमा हॉल का दरवाजा खटखटाया गया, तब वहां मौजूद युवक को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह पल उसकी जिंदगी का सबसे यादगार मोड़ बनने वाला है। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एक-दूसरे के करीब आए दो युवाओं के रिश्ते को छह महीने पूरे हो रहे थे। लॉरा क्लार्क और कॉनर की यह प्रेम कहानी यूनिवर्सिटी के शुरुआती दिनों में शुरू हुई थी। दोनों कॉलेज की कॉमेडी सोसाइटी के सक्रिय सदस्य थे, जहां हर हफ्ते स्टैंड-अप और इंप्रोव गेम्स के जरिए हंसी-मजाक का दौर चलता था। कॉनर के चुटीले वन-लाइनर चुटकुले सोसाइटी में बेहद पसंद किए जाते थे और उन्हीं चुटकुलों की हाजिरजवाबी ने लॉरा का दिल जीत लिया था। करीब पांच महीने बाद जब एक दिन बस में सफर के दौरान दोनों के हाथ अनजाने में मिले, तब से 19 साल की उम्र वाले इस मासूम और कलात्मक प्रेम की औपचारिक शुरुआत हुई।
शुरुआती हफ्तों में दोनों घंटों बैठकर कला, सिनेमा और जीवन के फलसफे पर चर्चा करते रहते थे। दोनों के लिए ही यह जीवन का पहला गंभीर रिश्ता था। रिश्ते के लगभग एक महीने बाद कॉनर ने लॉरा को अपने स्टूडेंट हॉस्टल में रिचर्ड लिंकलेटर की मशहूर रोमांटिक फिल्म 'बिफोर सनराइज' देखने का न्योता दिया। यह फिल्म एक ऐसे युवा जोड़े की कहानी पर आधारित है, जो यूरोप में एक ट्रेन के सफर के दौरान मिलते हैं और पूरी रात ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना की सड़कों पर टहलते हुए दिल की बातें साझा करते हैं। इस फिल्म ने दोनों के दिलों को इस कदर छुआ कि यह उनके पूरे रिश्ते की पहचान बन गई। वे अपने कमरे में कैथ ब्लूम के गाने 'कम हियर' पर धीमे कदमों से नाचा करते थे और अक्सर सपने बुनते थे कि एक दिन वे भी विएना की खूबसूरत गलियों में एक-दूसरे का हाथ थामे घूमेंगे।
रिश्ते के छह महीने और एक गुप्त योजना
जैसे-जैसे वक्त बीता, दोनों का रिश्ता छह महीने के पड़ाव पर पहुंच गया। अब तक वे हर महीने अपनी डेट की सालगिरह बारी-बारी से अलग-अलग अंदाज में मनाते आ रहे थे, कभी किसी पार्क में पिकनिक मनाकर, तो कभी नाश्ते की मेज पर या फिर झील में नाव चलाकर। लेकिन छह महीने का यह मील का पत्थर लॉरा के लिए बेहद खास था। हालांकि दोनों ने अब तक खुलकर 'प्यार' का इजहार नहीं किया था, मगर उनके दिल का यह अनकहा अहसास बिल्कुल साफ था। लॉरा चाहती थीं कि इस बार का दिन कुछ ऐसा हो जो उनके जज्बातों को बिना कहे ही कॉनर के सामने बयां कर दे। कॉनर सिनेमा के बहुत बड़े प्रेमी थे और स्थानीय स्तर पर मौजूद आर्टहाउस सिनेमाघर उनका पसंदीदा ठिकाना था, जहां लॉरा इससे पहले कभी नहीं गई थीं।
लॉरा के मन में विचार आया कि क्या यह संभव है कि पूरे सिनेमा हॉल को सिर्फ उनके लिए कुछ घंटों के लिए बुक कर लिया जाए। हालांकि, कॉलेज के सीमित बजट और स्टूडेंट लोन के सहारे जीने वाली लॉरा को डर था कि सिनेमा प्रबंधन या तो मना कर देगा या फिर इतनी भारी रकम मांग लेगा जिसे चुकाना उनके बस में नहीं होगा। फिर भी उन्होंने हिम्मत जुटाकर सिनेमाघर के दफ्तर में फोन मिलाया। फोन उठाने वाले कर्मचारी को जब लॉरा ने अपनी योजना और सीमित बजट की मजबूरी समझाई, तो किस्मत ने भी उनका साथ दिया। वह कर्मचारी भी खुद 'बिफोर सनराइज' फिल्म का बहुत बड़ा प्रशंसक निकला। उसने तुरंत लॉरा के सामने एक अनोखा प्रस्ताव रख दिया।
50 पाउंड का दान और आधी रात का पर्दा
सिनेमाघर के कर्मचारी ने लॉरा से कहा कि यदि वे रात को सफाई कर्मचारियों के जाने के बाद लगभग आधी रात के वक्त आने को तैयार हों, तो यह व्यवस्था की जा सकती है। जब लॉरा ने घबराते हुए किराए के बारे में पूछा, तो कर्मचारी ने बेहद उदारता दिखाते हुए कहा कि यदि वे सिनेमा के पसंदीदा चैरिटी फंड में 50 पाउंड का दान दे दें, तो पूरा थियेटर उनका होगा। एक छात्र के बजट में यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसके बाद दोनों ने मिलकर उस रात के पूरे ड्रामे की योजना तैयार की, ताकि कॉनर को कानों-कान खबर न हो कि उनके लिए क्या तैयारी की गई है।
तय रात को लॉरा और कॉनर पहले उसी रेस्तरां में रात के खाने के लिए गए जहां उन्होंने अपनी पहली औपचारिक डेट बिताई थी। लॉरा ने खास तौर पर वही पुरानी टेबल आरक्षित करवाई थी। भोजन और ड्रिंक्स के बाद पैदल घर लौटते समय लॉरा कॉनर को जानबूझकर उस स्थानीय सिनेमाघर के रास्ते से ले गईं। दरवाजे के पास पहुंचकर लॉरा ने अचानक रुककर कहा कि वे अब तक इस खूबसूरत सिनेमाघर को अंदर से नहीं देख पाई हैं, क्यों न चलकर अंदर की एक झलक देख ली जाए। इससे पहले कि कॉनर उन्हें रोक पाते, लॉरा ने बंद दरवाजे पर जोर से दस्तक दे दी। चाबी घूमने की आवाज आई और एक कर्मचारी ने दरवाजा खोला।
शर्मिंदगी के बीच जब स्क्रीन पर जल उठे रंग
रात के वक्त किसी बंद संस्थान का दरवाजा खटखटाने से कॉनर बेहद असहज और शर्मिंदा महसूस कर रहे थे। उन्हें लगा कि वे अपनी किसी बेतुकी जिद से एक थके हुए कर्मचारी की घर जाने की तैयारी में खलल डाल रहे हैं। कॉनर ने आगे बढ़कर तुरंत माफी मांगी और कहा कि वे फिर कभी आ जाएंगे। लेकिन लॉरा की पहले से रची गई पटकथा के अनुसार, कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए उन्हें अंदर आने की इजाजत दे दी। जैसे ही दोनों खाली ऑडिटोरियम में बड़े पर्दे के ठीक सामने पहुंचे, अचानक हॉल की बत्तियां मद्धम हो गईं और विशाल स्क्रीन पर फिल्म चलने लगी।
स्क्रीन से जैसे ही फिल्म के शुरुआती संगीत की धुन गूंजी, कॉनर के चेहरे पर फैली उलझन अचानक बच्चों जैसी असीम खुशी में बदल गई। वह अविश्वास से बार-बार यही दोहराते रहे कि यह सच नहीं हो सकता। लॉरा ने अपने बैग से एक बोतल वाइन और एक कंबल निकाला। शुरुआती कुछ मिनट दोनों ने हंसने और एक-दूसरे को गले लगाने में बिताए, जहां कॉनर उस हैरतअंगेज तोहफे से स्तब्ध थे, वहीं लॉरा को इस बात की तसल्ली थी कि उनका महीनों का गुप्त मिशन पूरी तरह कामयाब रहा था। दोनों ने अपने जीवन की सबसे प्रिय फिल्म को उस रात बड़े पर्दे पर बिल्कुल निजी अंदाज में देखा।
एक रात जिसने जीवन भर का बंधन बना दिया
उस ऐतिहासिक रात जब दोनों घर वापस लौटे, तो कॉनर ने पहली बार लॉरा से अपने प्यार का आधिकारिक इजहार किया। वह रात दोनों के रिश्ते को एक नए, गहरे और अटूट स्तर पर ले गई। समय बीतने के साथ यह प्रेम और प्रगाढ़ होता चला गया और दोनों ने शादी कर ली। आज उनकी इस साझेदारी को 11 साल का लंबा समय बीत चुका है। वे दोनों आज भी अक्सर साथ बैठकर 'बिफोर सनराइज' देखते हैं। अपनी शादी की पहली सालगिरह पर वे असल में विएना घूमने गए और फिर अपनी दसवीं सालगिरह पर भी उसी शहर की गलियों में लौटे। यहां तक कि अपनी शादी के पहले डांस के लिए उन्होंने उसी खास गाने 'कम हियर' को चुना था। कॉनर ने बीते एक दशक में कई बार उस छह महीने वाली जादुई डेट से बेहतर सरप्राइज देने की कोशिश की, मगर वे खुद मानते हैं कि उस आधी रात के सिनेमाई जादू की बराबरी आज तक नहीं हो पाई है।



















