अमेरिका के कैलिफोर्निया में बाल विवाह पर पूरी तरह रोक, जानिए बाकी राज्यों और भारत में क्या हैं नियमभीलवाड़ा में तैयार मूंगफली की फसल को नुकसान से कैसे बचाएं, खुदाई और कटाई के सही नियमदर्द भगाने के लिए इलेक्ट्रिक हीटिंग बैग का अंधाधुंध इस्तेमाल त्वचा को पहुंचा सकता है भारी नुकसानपेशाब में जलन और पथरी की समस्या में राहत दे सकता है गोखरू, वैद्य ने बताए उपयोग के जरूरी नियमक्रॉनिक बीमारियों में हर फल-सब्जी नहीं होती सुरक्षित, जानिए सेहत के अनुसार क्या खाएं और क्या छोड़ेंबॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन का तूफान, पहले ही दिन वैश्विक स्तर पर 95.10 करोड़ रुपये बटोरकर नया कीर्तिमानघर पर बनाएं सहजन की पत्तियों की जायकेदार चटनी, जानिए भूनने से लेकर पीसने तक की पूरी विधिमानसून वापसी के बीच 23 राज्यों पर मौसमी प्रणालियों का पहरा, कई इलाकों में आंधी और वर्षा की चेतावनीक्रिस गेल का तेरह साल पुराना कीर्तिमान ध्वस्त, दक्षिण अफ्रीकी युवा लुआन ड्रे प्रिटोरियस ने नाबाद 188 रन ठोक रचा नया इतिहासगुड़हल के पौधे पर कलियां खिलना बंद हो गई हैं तो अपनाएं खाद और मिट्टी से जुड़े ये आसान उपाय
क्रॉनिक बीमारियों में हर फल-सब्जी नहीं होती सुरक्षित, जानिए सेहत के अनुसार क्या खाएं और क्या छोड़ेंस्वास्थ्य
3 अक्तू॰ 2026, 6:23 am (32 मिनट पहले)· 1

क्रॉनिक बीमारियों में हर फल-सब्जी नहीं होती सुरक्षित, जानिए सेहत के अनुसार क्या खाएं और क्या छोड़ें

किडनी, लिवर, थायराइड, यूरिक एसिड, डायबिटीज और हृदय रोगों में फल-सब्जियों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। अमृता हॉस्पिटल के विशेषज्ञ ने बताया कि किस बीमारी में क्या खाना फायदेमंद है और किन चीजों से परहेज जरूरी है।

स्वस्थ जीवनशैली के लिए दैनिक खानपान में ताजे फल और हरी सब्जियों को बेहद जरूरी माना जाता है। आम धारणा यही होती है कि फल और सब्जियां प्राकृतिक होने के कारण हमेशा स्वास्थ्यवर्धक ही साबित होती हैं। हालांकि, जब कोई व्यक्ति किडनी, लिवर, थायराइड, बढ़े हुए यूरिक एसिड, डायबिटीज या हृदय से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा हो, तब यह सामान्य नियम लागू नहीं होता। ऐसी चिकित्सकीय स्थितियों में अनजाने में खाई गई कुछ सब्जियां या फल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। बीमारी की प्रकृति और आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली के अनुसार विशिष्ट पोषक तत्वों को सीमित करने अथवा पूरी तरह छोड़ने की जरूरत पड़ती है। अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. संजय रैना ने विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में फल और सब्जियों के चयन को लेकर महत्वपूर्ण चिकित्सीय दिशा-निर्देश साझा किए हैं।

गुर्दे की बीमारी में पोटैशियम पर नियंत्रण रखना क्यों जरूरी है

जब किसी व्यक्ति के गुर्दे या किडनी की कार्यप्रणाली कमजोर होने लगती है, तो वे रक्त से अतिरिक्त खनिजों को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते। ऐसी स्थिति में शरीर के भीतर पोटैशियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, जो हृदय गति और मांसपेशियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. संजय रैना के अनुसार, जिन फलों और सब्जियों में पोटैशियम की अधिक मात्रा मौजूद होती है, उनका सेवन मरीजों को तुरंत कम या सीमित कर देना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, केला और पालक पोटैशियम से भरपूर होते हैं, इसलिए किडनी की समस्या में इनसे परहेज करना आवश्यक होता है। इसके विपरीत, कम पोटैशियम वाली सब्जियों का चयन किया जा सकता है, जैसे कि फूलगोभी। वहीं यदि गुर्दे के मरीज फलों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो सेब एक सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इसमें पोटैशियम की मात्रा काफी कम पाई जाती है।

ये भी पढ़ें

लिवर के रोग और सिरोसिस की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियां

लिवर से संबंधित विकारों में अत्यधिक मिठास या शर्करा का सेवन बेहद नुकसानदेह साबित होता है। जब लिवर पहले से ही अस्वस्थ हो, तो अतिरिक्त शुगर उसके मेटाबॉलिज्म पर भारी दबाव डालती है। ऐसे में प्राकृतिक मिठास वाले फलों से भी दूरी बनाना जरूरी हो जाता है। पके हुए आम में फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, और इसका सेवन लिवर की खराबी को और अधिक गंभीर बना सकता है। इसलिए उच्च फ्रुक्टोज और अधिक शुगर वाले फलों तथा सब्जियों का सेवन कम से कम किया जाना चाहिए।

जब लिवर की बीमारी बढ़कर सिरोसिस के एडवांस चरण में पहुंच जाती है, तो खानपान का प्रबंधन और भी अधिक संवेदनशील हो जाता है। सिरोसिस के मरीजों को अपनी डाइट में कोई भी छोटा या बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर और डाइटिशियन की राय अनिवार्य रूप से लेनी चाहिए। इसके साथ ही, इस स्थिति में कच्ची अंकुरित दालों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। कच्ची अंकुरित दालों में रोगाणुओं के पनपने का खतरा रहता है, जिससे शरीर में गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन फैल सकता है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

थायराइड की समस्या में कच्ची क्रूसिफेरस सब्जियों से क्यों बचें

थायराइड ग्रंथि के असंतुलन से पीड़ित लोगों को भी अपनी रसोई में सब्जियों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना पड़ता है। डॉ. संजय रैना स्पष्ट करते हैं कि कुछ सब्जियों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की आयोडीन को सोखने की प्राकृतिक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। कच्ची फूलगोभी और कच्ची पत्ता गोभी इस श्रेणी में मुख्य रूप से शामिल हैं। यदि इन्हें कच्चा खाया जाए, तो थायराइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज में बाधा उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि इन्हें आहार से पूरी तरह बाहर निकाल दिया जाए। यदि फूलगोभी और पत्ता गोभी को आंच पर अच्छी तरह से पकाकर खाया जाए, तो इनसे कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। मुख्य नियम यही है कि इन्हें सलाद के रूप में कच्चा खाने से पूरी तरह बचना चाहिए।

यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में विटामिन-C का महत्व

शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन के कारण जब यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, तो इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं, जिससे असहनीय दर्द, सूजन और गठिया की समस्या पैदा हो जाती है। यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया में विटामिन-C एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. संजय रैना के मुताबिक, ऐसे मरीजों को खट्टे फलों और साइट्रस खाद्य पदार्थों को अपनी दैनिक डाइट में शामिल करना चाहिए। संतरा, नींबू और खट्टी बेरीज शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन-C प्रदान करते हैं। यह पोषक तत्व रक्त में यूरिक एसिड के स्तर को कम करने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मददगार साबित होता है।

डायबिटीज में फ्रूट जूस और उच्च फ्रुक्टोज वाले फलों का परहेज

डायबिटीज के मरीजों के शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है। इस कारण ऐसे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचना जरूरी होता है जो रक्त में शुगर की मात्रा को अचानक बढ़ा दें। बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद फ्रूट जूस और अत्यधिक फ्रुक्टोज वाले फल इस दृष्टि से विशेष रूप से नुकसानदायक होते हैं। पका हुआ आम, केला, अंगूर और चीकू जैसे फलों में फ्रुक्टोज की मात्रा अत्यधिक होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इनका सेवन या तो पूरी तरह टालना चाहिए या बेहद सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसके बजाय, संतरा, सेब, पपीता और अमरूद जैसे फलों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, जो शुगर को तेजी से बढ़ाए बिना जरूरी पोषण प्रदान करते हैं।

हृदय स्वास्थ्य के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स का महत्व और फैट से बचाव

हृदय रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए डाइट में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करना बहुत लाभकारी होता है। डॉ. संजय रैना के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए जामुन, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, हृदय रोगियों को उच्च शुगर और अत्यधिक फैट वाली चीजों से पूरी तरह सावधान रहना चाहिए। आलू और शकरकंद जैसी हाई शुगर कंटेंट वाली सब्जियां सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए, क्योंकि इनसे शुगर का स्तर बढ़ सकता है जो अंततः दिल की तकलीफों को बढ़ा देता है। इसके अतिरिक्त, आहार में वसा या फैट्स की मात्रा को घटाना या नियंत्रित करना अनिवार्य है, क्योंकि फैट रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है, जो धमनियों में रुकावट पैदा कर हृदय की समस्याओं को अधिक गंभीर बना सकता है।

सवाल-जवाब

किडनी की बीमारी में कौन से फल और सब्जियां खाने से बचना चाहिए?
किडनी की समस्या में उच्च पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों जैसे केला और पालक से बचना चाहिए, क्योंकि कमजोर किडनी अतिरिक्त पोटैशियम बाहर नहीं निकाल पाती।
किडनी के मरीजों के लिए कौन से फल और सब्जियां सुरक्षित हैं?
कम पोटैशियम वाली सब्जियां जैसे फूलगोभी और फल के रूप में सेब खाना किडनी के मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
लिवर के मरीजों और सिरोसिस में क्या परहेज रखना चाहिए?
लिवर के मरीजों को अधिक फ्रुक्टोज वाले पके आम और ज्यादा शुगर वाली चीजों से बचना चाहिए। सिरोसिस में संक्रमण के खतरे के कारण कच्ची अंकुरित दालें नहीं खानी चाहिए।
थायराइड की समस्या में फूलगोभी और पत्ता गोभी कैसे खानी चाहिए?
थायराइड में इन्हें कभी भी कच्चा नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये आयोडीन सोखने की क्षमता घटाती हैं, लेकिन अच्छी तरह पकाकर खाने से कोई नुकसान नहीं होता।
यूरिक एसिड को कम करने के लिए कौन से फल मददगार हैं?
विटामिन-C से भरपूर खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू और खट्टी बेरीज यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं।
डायबिटीज के मरीजों को कौन से फल नहीं खाने चाहिए और क्या खा सकते हैं?
डायबिटीज में पके आम, केला, अंगूर, चीकू और पैकेज्ड फ्रूट जूस से बचना चाहिए, जबकि संतरा, सेब, पपीता और अमरूद खाए जा सकते हैं।
हार्ट के मरीजों को अपनी डाइट में क्या शामिल और क्या कम करना चाहिए?
हार्ट मरीजों को जामुन, संतरा और नींबू जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स लेने चाहिए, जबकि आलू, शकरकंद और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले फैट्स से परहेज करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp