दुनिया के सबसे संपन्न और आधुनिक राज्यों में शुमार कैलिफोर्निया ने बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक अहम कानूनी कदम उठाया है। अब तक राज्य के कानूनों में विवाह के लिए कोई स्पष्ट न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं थी, जिसके चलते कुछ औपचारिक शर्तों के साथ नाबालिगों की शादी संभव थी। नए कानूनी संशोधन के तहत अब राज्य में शादी करने के साथ-साथ डोमेस्टिक पार्टनरशिप दर्ज कराने के लिए दोनों पक्षों की उम्र कम से कम 18 वर्ष होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया कानून 1 जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी होगा।
इस ऐतिहासिक कानूनी बदलाव के आधिकारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम में कोर्टनी स्टोडन भी उपस्थित रहीं। कोर्टनी स्टोडन 16 वर्ष की उम्र में 51 वर्षीय अभिनेता डग हचिसन के साथ शादी के बाद चर्चा में आई थीं और बाद में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने वाली एक प्रमुख पैरोकार बनीं। हालांकि कैलिफोर्निया का यह फैसला केवल उसी राज्य की भौगोलिक सीमा तक सीमित है, क्योंकि अमेरिका में पूरे देश के लिए विवाह की कोई एक समान संघीय न्यूनतम आयु तय नहीं है।
अमेरिका के अन्य राज्यों में क्या है कानूनी स्थिति
अमेरिका की शासन व्यवस्था में विवाह से जुड़े कानून मुख्य रूप से केंद्र सरकार के बजाय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी वजह से देश के 50 राज्यों में विवाह की आयु सीमा और उससे जुड़ी शर्तें एक जैसी नहीं हैं। बाल विवाह के खात्मे के लिए काम करने वाले संगठन अनचेन्ड एट लास्ट के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के केवल 18 राज्यों ने अब तक बाल विवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के 32 राज्यों में आज भी नाबालिगों को शादी करने की कानूनी छूट हासिल है। इन राज्यों में पूरी तरह खुला कानून तो नहीं है, लेकिन कई अपवादों के आधार पर नाबालिगों का विवाह हो सकता है। इन अपवादों में माता-पिता या अभिभावकों की सहमति, अदालत या जज की विशेष मंजूरी, गर्भावस्था, या कानूनी मुक्ति (इमैनसिपेशन) शामिल हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति कहे जाने वाले देश में 18 वर्ष की सार्वभौमिक न्यूनतम विवाह आयु का कोई साझा राष्ट्रीय नियम लागू नहीं है।
अमेरिका में बाल विवाह खत्म होने में क्यों लगा इतना लंबा समय
अमेरिका में बाल विवाह पर कानूनी रोक लगाने की मांग दशकों से उठती रही है, लेकिन सांस्कृतिक और कानूनी जटिलताओं के चलते यह प्रक्रिया बेहद धीमी रही। ऐतिहासिक रूप से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लड़कियों के गर्भवती होने के बाद उनका विवाह करा दिया गया, जिनमें यौन उत्पीड़न के कारण हुई गर्भावस्था के मामले भी शामिल थे। फ्लोरिडा की शेरी जॉनसन का मामला ऐसे ही सबसे चिंताजनक उदाहरणों में गिना जाता है। वहीं 16 वर्ष की उम्र में अभिनेता डग हचिसन से ब्याही गईं कोर्टनी स्टोडन का मामला भी व्यापक रूप से चर्चा में रहा था।
इस समस्या का दायरा केवल गिने-चुने चर्चित मामलों तक सीमित नहीं है। अनचेन्ड एट लास्ट द्वारा साझा किए गए शोध के अनुसार, वर्ष 2000 से 2015 के बीच अमेरिका में 260,000 से अधिक नाबालिगों का कानूनी रूप से विवाह हुआ था। यदि वैश्विक संदर्भ में देखें, तो बाल विवाह विरोधी कार्यकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में हर मिनट लगभग 28 लड़कियों की शादी बाल विवाह के रूप में हो जाती है। इन्हीं वास्तविकताओं और आंकड़ों ने अमेरिकी राज्यों पर कानूनी खामियों को खत्म करने और 18 वर्ष की सख्त न्यूनतम आयु सीमा लागू करने का निरंतर दबाव बनाए रखा है।
नाबालिग उम्र में शादी का बच्चों पर क्या पड़ता है असर
कम उम्र में शादी होना केवल बच्चों से उनका बचपन नहीं छीनता, बल्कि यह उनके शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, पढ़ाई और सामाजिक जीवन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, किशोरावस्था में मां बनने वाली लड़कियों को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही उनके नवजात शिशुओं में जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी) का खतरा काफी अधिक होता है।
शिक्षा और सामाजिक विकास के स्तर पर यूनिसेफ स्पष्ट करता है कि बाल विवाह के कारण लड़कियां अक्सर स्कूल छोड़ देती हैं, वे सामाजिक अलगाव का शिकार होती हैं, उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं और वे पूरी तरह अपने जीवनसाथी पर निर्भर हो जाती हैं। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ साथी द्वारा की जाने वाली हिंसा और यौन शोषण को गहरे अवसाद, चिंता और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) जैसे गंभीर मानसिक लक्षणों से जोड़ता है। इस प्रकार विवाह का असर सिर्फ शादी के दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चे के पूरे भविष्य को तय करने वाली क्षमता को हमेशा के लिए प्रभावित कर देता है।
भारत और अमेरिका की कानूनी और व्यावहारिक तुलना
बाल विवाह के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा और बुनियादी अंतर देखने को मिलता है। अमेरिका में मुख्य बहस आज भी उन कानूनों को बदलने को लेकर है जो 32 राज्यों में अपवादों के जरिए नाबालिगों की शादी की अनुमति देते हैं। वहां अब भी कानून के स्तर पर ही 18 वर्ष की अनिवार्य सीमा तय करने की लड़ाई लड़ी जा रही है।
इसके विपरीत, भारत में कानून पूरी तरह से बाल विवाह को प्रतिबंधित करता है। भारत के बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 21 वर्ष से कम उम्र के पुरुष और 18 वर्ष से कम उम्र की महिला को बच्चा माना गया है, और किसी भी बच्चे को शामिल करने वाला विवाह कानूनन बाल विवाह की श्रेणी में आता है। हालांकि, कानूनन प्रतिबंधित होने का मतलब यह नहीं है कि यह सामाजिक कुप्रथा जमीन पर पूरी तरह समाप्त हो गई है।
यूनिसेफ के 2019–21 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की 23 प्रतिशत महिलाओं का पहला विवाह 18 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले ही हो चुका था। आंकड़ों से यह भी सामने आता है कि भारत में बचपन में ब्याही गई लड़कियों और महिलाओं में से आधे से अधिक केवल पांच राज्यों में रहती हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शामिल हैं। इस प्रकार, जहां अमेरिका में चुनौती ऐसे कानूनों को समाप्त करने की है जो बाल विवाह की अनुमति देते हैं, वहीं भारत में मुख्य चुनौती उस कानून को पूरी सख्ती से धरातल पर लागू कराने की है जो इसे पहले से ही अवैध घोषित कर चुका है।



















