हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इन दिनों एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। जिला मुख्यालय और उसके आसपास के कई प्रमुख रिहायशी इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई के कारण पीलिया जैसी खतरनाक जलजनित बीमारी का भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं, जिसके कारण पूरे इलाके के निवासियों में खौफ का माहौल है। लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की चिंताएं भी काफी बढ़ा दी हैं, और अब आपातकालीन स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें
बीमारी का दायरा तेजी से बढ़ने के साथ ही क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में मरीजों की भारी भीड़ लग गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले सिर्फ दो सप्ताह के भीतर 70 से ज्यादा लोग पीलिया की गंभीर शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच चुके हैं और उनका सघन इलाज किया गया है। हालांकि, प्रशासन के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि इनमें से 30 मरीजों को गहन उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ घोषित कर घर भेज दिया गया है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं हैं। फिलहाल क्षेत्रीय अस्पताल में 40 लोगों का उपचार किया जा रहा है।
इस बीमारी ने सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों के अभिभावकों की बढ़ाई है, क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है। अस्पताल में भर्ती मौजूदा मरीजों की सूची में 15 छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में चल रहा है। बच्चों की नाजुक शारीरिक स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है और उनके स्वास्थ्य की हर पल निगरानी की जा रही है।
प्रशासन सख्त, पेयजल जांच के आदेश जारी
यह संक्रमण मुख्य रूप से कुल्लू मुख्यालय के प्रमुख रिहायशी क्षेत्रों जैसे गांधीनगर, शीशामाटी और ढालपुर के आसपास के इलाकों में तेजी से फैला है। पानी की गुणवत्ता और सप्लाई व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच, कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने स्थिति को संभालने के लिए सीधे तौर पर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने हालात की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम और आपातकालीन समीक्षा बैठक की है।
समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया कि मुख्यालय के आसपास के इलाकों में पीने के गंदे पानी की आपूर्ति ही लोगों के इस बीमारी से ग्रसित होने की मुख्य वजह है। उन्होंने बिना किसी देरी के जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को बेहद कड़े निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत पूरी पेयजल आपूर्ति लाइन की गहन जांच करें। इसके साथ ही पानी में मौजूद किसी भी तरह के प्रदूषण का तुरंत पता लगाने के आदेश दिए गए हैं।
बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की जरूरी सलाह
बरसात के इस वर्तमान मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा अपने चरम पर होता है। ऐसे में क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हीरालाल बौद्ध ने आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी नागरिकों को सख्ती से आगाह किया है कि वे अपने दैनिक खानपान और स्वच्छता में अत्यधिक सावधानी बरतें ताकि इस फैलाव को रोका जा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपनी सलाह में स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मौसम में संक्रमण से बचने के लिए केवल अच्छी तरह से पका हुआ भोजन ही खाएं और पीने के पानी को हमेशा अच्छी तरह उबालकर ही पिएं। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने भी स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में वॉटर फिल्टर का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। प्रशासन का दृढ़ता से मानना है कि पानी को उबालने और फिल्टर करने जैसे बुनियादी लेकिन बेहद जरूरी एहतियाती कदमों से ही इस भयंकर बीमारी की प्रभावी रोकथाम संभव है।




















