उत्तराखंड के पहाड़ी पर्यटन स्थल नैनीताल में इन दिनों मौसम के बदलाव और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते जलजनित बीमारियों का खतरा चरम पर पहुंच गया है। शहर के प्रमुख बीडी पांडे जिला अस्पताल की आउटपेशेंट डिपार्टमेंट यानी ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज पेट दर्द, बुखार, टाइफाइड, डायरिया और पीलिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। बारिश के मौसम में पीने के पानी में दूषित पदार्थों के मिलने से संक्रमण की स्थिति बिगड़ती जा रही है। केवल शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों और शैक्षणिक संस्थानों में भी इस बीमारी के लक्षण तेजी से फैल रहे हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज हो गई है।
बीडी पांडे अस्पताल की ओपीडी में बढ़ी मरीजों की कतार, डॉक्टर ने दी सतर्क रहने की सलाह
नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आने वाले मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल के अनुसार, बरसात का मौसम शुरू होने के बाद से ही पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित मरीज लगातार इलाज के लिए आ रहे हैं। प्राथमिक लक्षणों के अलावा कई मरीज शरीर में सुन्नता, हाथों और पैरों में तेज दर्द, झनझनाहट तथा अत्यधिक शारीरिक कमजोरी की शिकायत भी दर्ज करा रहे हैं। जिन मरीजों की शारीरिक स्थिति अधिक गंभीर पाई जा रही है, उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आपातकालीन उपचार दिया जा रहा है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉ. एमएस दुग्ताल ने आम जनता से अपने खान-पान और पीने के पानी की स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने सलाह दी है कि इस मौसम में केवल उबले हुए या पूरी तरह से फिल्टर किए गए पानी का ही सेवन करें। बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही भोजन को हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं और अपने घर व आसपास के माहौल में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पेट से जुड़ी परेशानी, कई दिनों से लगातार बुखार या डायरिया के लक्षण महसूस हों, तो वे घरेलू इलाज पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें।
गांव-गांव फैल रहा बुखार, जल संस्थान की पानी आपूर्ति पर उठे सवाल
नैनीताल के निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलजनित बीमारियों का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। गांवों में एक के बाद दूसरे व्यक्ति तक बुखार और पेट की बीमारियां फैल रही हैं। बीडी पांडे अस्पताल में अपना इलाज करा रहे मरीज हितेश कुमार ने अपनी स्थिति साझा करते हुए बताया कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार, सिरदर्द, पेट में मरोड़, शरीर में जकड़न और अचानक चक्कर आने की समस्या हो रही है। उनके मुताबिक, गांव में पहले एक व्यक्ति बुखार की चपेट में आया था, जिसके बाद देखते ही देखते अन्य ग्रामीणों में भी ये लक्षण फैलने लगे।
दूसरी तरफ, अस्पताल में भर्ती मरीज हेम चंद्र जोशी ने पीने के पानी की शुद्धता और उसकी आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि जल संस्थान की ओर से नलों में आने वाले पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसके कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। दूषित पानी की वजह से छोटे बच्चों में भी पेट का संक्रमण और पीलिया तेजी से फैल रहा है। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जलापूर्ति लाइन में लीकेज या दूषित जल के मिश्रण के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई है।
ज्योलिकोट के आवासीय स्कूल में 20 छात्र बीमार, स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा
नैनीताल के समीप ज्योलिकोट क्षेत्र के वीरभट्टी में स्थित पार्वती प्रेमा जगाती आवासीय विद्यालय में दूषित पानी के कारण 20 छात्रों के बीमार होने की घटना से हड़कंप मच गया। विद्यालय परिसर में अचानक इतनी बड़ी संख्या में छात्रों में जलजनित रोगों के लक्षण मिलने की खबर सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने तत्काल संज्ञान लिया और एक विशेष डॉक्टरी टीम को जांच के लिए स्कूल परिसर रवाना किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देशों पर स्वास्थ्य टीम ने विद्यालय पहुंचकर प्रधानाचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश से बीमार छात्रों की सेहत और इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल की।
प्रधानाचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को अवगत कराया कि इस आवासीय विद्यालय में लगभग 630 छात्र रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को सबसे पहले एक छात्र में वायरल बीमारी के लक्षण देखे गए थे। इसके बाद संक्रमण धीरे-धीरे फैलता गया और 10 अगस्त तक कुल 20 छात्रों में ऐसे ही लक्षण सामने आ गए। विद्यालय प्रशासन ने इन सभी छात्रों की आवश्यक शारीरिक और पैथोलॉजिकल जांच स्कूल से अनुबंधित एक निजी पैथोलॉजी लैब और निजी अस्पताल के माध्यम से करवाई थी।
अस्थायी रूप से बंद किया गया विद्यालय, 31 अगस्त को दोबारा खुलने की संभावना
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम जब पार्वती प्रेमा जगाती आवासीय विद्यालय के परिसर में पहुंची, तो वहां कोई भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 13 अगस्त को ही स्कूल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। इसके तुरंत बाद सभी छात्रों को उनके सुरक्षित घर भेज दिया गया था। वर्तमान में विद्यालय परिसर पूरी तरह से बंद है और वहां कोई भी छात्र मौजूद नहीं है। प्रधानाचार्य के अनुसार, परिसर को पूरी तरह सैनिटाइज करने और जलापूर्ति की स्थिति सुधारने के बाद 31 अगस्त को विद्यालय को दोबारा खोलना प्रस्तावित किया गया है।
नैनीताल शहर में एक तरफ बीडी पांडे अस्पताल की ओपीडी में रोजाना मरीजों का तांता लग रहा है, तो दूसरी तरफ ज्योलिकोट के प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय में घटी इस घटना ने पेयजल की गुणवत्ता और संक्रामक रोगों की रोकथाम की व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान हालातों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की कड़ी निगरानी और आम नागरिकों की व्यक्तिगत सतर्कता दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं। मॉनसून के इस दौर में उबले पानी के सेवन, ताजा भोजन और आसपास की स्वच्छता को अपनाकर ही जलजनित बीमारियों के खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।



















