मानव शरीर के भीतर काम करने वाले तमाम अंगों में लिवर को सबसे अहम माना जाता है, जो एक तरह से शरीर की मुख्य फैक्ट्री की तरह काम करता है। यह अंग भोजन को सही ढंग से पचाने, पोषक तत्वों को सिंथेसिस करने और शरीर के भीतर बनने वाले तमाम विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का मुख्य कार्य संभालता है। हालांकि, मौजूदा समय में बदलती जीवनशैली, जंक फूड का अधिक सेवन, शराब की लत और अन्य गलत आदतों के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जब तक लिवर अंदर से बुरी तरह प्रभावित नहीं हो जाता, तब तक इसके गंभीर लक्षण खुलकर सामने नहीं आते, जिस वजह से इसे कई बार साइलेंट किलर के नाम से भी पुकारा जाता है।
शुरुआती लक्षणों को क्यों कर देते हैं लोग नजरअंदाज
शुरुआती दिनों में जब शरीर के भीतर छोटे-छोटे बदलाव नजर आने शुरू होते हैं, तो आम लोग उन्हें केवल आम कमजोरी या पाचन से जुड़ी मामूली समस्या मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन बेंगलुरु के अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेश राघवैया ने इस विषय पर विस्तार से बताते हुए कहा है कि शरीर की तरफ से मिलने वाले इन शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लेना और तुरंत डॉक्टर से जांच कराना बेहद आवश्यक होता है।
थकान, सुस्ती और वजन में अचानक गिरावट
अगर किसी व्यक्ति को पर्याप्त आराम करने और अच्छी नींद लेने के बाद भी पूरे दिन शरीर में थकान, कमजोरी या भारी सुस्ती बनी रहती है, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि लिवर अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहा है। जब लिवर की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, तो शरीर के अंदर विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे इंसान का ऊर्जा स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। इसके अलावा, यदि अचानक से भूख लगना बंद हो जाए, खाने की इच्छा न बचे या फिर बिना किसी ठोस वजह के वजन बहुत तेजी से घटने लगे, तो यह भी लिवर की खराबी का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसे संकेत लंबे समय तक बने रहने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
पेट में सूजन और गंभीर एसाइटिस की समस्या
जब लिवर अंदर से बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाता है, तो पेट के अंदर अतिरिक्त तरल पदार्थ इकट्ठा होने लगते हैं, जिसकी वजह से पेट असामान्य रूप से फूला हुआ दिखाई देने लगता है। मेडिकल की भाषा में इस गंभीर स्थिति को एसाइटिस कहा जाता है। यह एक बहुत ही खतरनाक लक्षण माना जाता है और इसके प्रकट होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेने की सख्त जरूरत होती है.
पीलिया और लगातार तेज खुजली की परेशानी
यदि किसी इंसान की त्वचा या फिर आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगे, तो यह इस बात का पक्का संकेत है कि लिवर किसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब शरीर के भीतर बिलीरुबिन नामक अपशिष्ट पदार्थ की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस अवस्था को पीलिया या जॉन्डिस के नाम से जाना जाता है, जबकि एक स्वस्थ लिवर इस बिलीरुबिन को आसानी से शरीर से बाहर कर देता है। इसके अलावा, जब लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है, तो शरीर में पित्त या बाइल से जुड़े पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पूरे शरीर में लगातार और बहुत तेज खुजली महसूस हो सकती है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के त्वचा पर खुजली हो रही हो और किसी भी तरह की दवा या क्रीम लगाने से कोई राहत न मिले, तो इसे साधारण एलर्जी मानकर टालना नहीं चाहिए, क्योंकि यह लिवर की तरफ से दिया जाने वाला एक बहुत बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है.
पेशाब का रंग बदलना और पैरों में सूजन
पेशाब का रंग बदलकर बहुत ज्यादा गहरा पीला या भूरा हो जाना भी लिवर की बीमारी का एक बेहद महत्वपूर्ण संकेत माना गया है। यदि इस तरह का बदलाव लगातार लंबे समय तक बना रहे, तो इसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, जब लिवर की काम करने की क्षमता कम होने लगती है, तो शरीर के भीतर प्रोटीन का निर्माण घट जाता है। इस वजह से पैरों और टखनों के आसपास पानी जमा होने लगता है, जिससे वहां भारी सूजन आ जाती है। ऐसी अवस्था में इंसान को लंबे समय तक खड़े रहने या पैदल चलने में भी काफी कठिनाई महसूस होती है.
मतली, उल्टी और टॉक्सिन्स का जमाव
शरीर के अंदर विषैले पदार्थ यानी टॉक्सिन्स लगातार जमा होते रहने और समय पर बाहर न निकल पाने के कारण बार-बार जी मिचलाने, मतली और उल्टी आने की समस्या परेशान कर सकती है। इन सब समस्याओं के साथ-साथ हमारी पाचन प्रक्रिया भी काफी धीमी पड़ जाती है। इन तमाम संकेतों को समय रहते भांपकर और डॉक्टर से उचित जांच कराकर लिवर को होने वाले बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। यदि आपके शरीर में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।



















