पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में गोवंश के बीच लंपी संक्रमण के मामले सामने आने के बाद पशुपालकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर कदम उठाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। पशुपालन विभाग की ओर से जुलाई के महीने से ही मवेशियों को सुरक्षा टीका लगाने की मुहिम पूरी रफ्तार से चलाई जा रही है, जिससे घबराने की स्थिति न बने। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशुओं के रहने के स्थान पर स्वच्छता और नियमित निगरानी का विशेष ध्यान रखें।
जिले में 2.09 लाख से अधिक गोवंश, टीकाकरण का आधा पड़ाव पार
मेरठ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी पवित्रजीत सिंह के अनुसार, लंपी वायरस के खतरे को भांपते हुए विभाग जुलाई से ही पूरी तरह सक्रिय है और लगातार टीकाकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिले में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कुल 2 लाख 9 हजार 488 गोवंश मौजूद हैं। इस पूरी आबादी में से अब तक 1 लाख 12 हजार मवेशियों को लंपी रोधी टीका दिया जा चुका है। विभागीय अमले का लक्ष्य आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर शेष बचे सभी पशुओं को सुरक्षित दायरे में लाकर शत-प्रतिशत टीकाकरण पूरा करने का है।
मच्छर और मक्खियों से फैलता है संक्रमण, सुरक्षा के कड़े उपाय जरूरी
पवित्रजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि लंपी एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो एक पीड़ित जानवर से दूसरे स्वस्थ जानवर में आसानी से स्थानांतरित हो सकती है। इस बीमारी के चक्र को तोड़ने के लिए पशुओं के बाड़ों में खास सावधानी बरतना अनिवार्य है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। संक्रमित गोवंश के घावों और फफोलों पर बैठने वाली मक्खियां तथा मच्छर जब किसी अन्य स्वस्थ पशु के संपर्क में आते हैं, तो वे इस संक्रमण के प्राथमिक वाहक बन जाते हैं। बाड़ों के इर्द-गिर्द पानी का जमाव न होने देना और कीटनाशक छिड़काव करना बेहद मददगार साबित हो सकता है।
पारंपरिक उपचार और चिकित्सीय सलाह से बचाव
पशुपालकों को मवेशियों के बाड़े और उनके शरीर की सफाई नियमित बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। घरेलू और पारंपरिक उपायों के तौर पर गोवंश की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय का पानी पिलाने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पशुओं को नीम के पत्तों से उबाले गए पानी से नहलाना त्वचा की सुरक्षा के लिए उपयोगी बताया गया है। यदि किसी पशु की त्वचा पर घाव या चकत्ते उभर आएं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से मशविरा लेकर उन पर बीटाडिन लगाना चाहिए ताकि द्वितीयक संक्रमण का खतरा टल सके।
टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सा विभाग से सीधा संपर्क करें किसान
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने ग्रामीण अंचलों के किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र से सीधा तालमेल स्थापित करें। विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर वैक्सीन लगाने का काम मुस्तैदी से कर रही हैं। जिन पशुपालकों के गोवंश को अभी तक खुराक नहीं मिल पाई है, वे खुद आगे आकर विभागीय अधिकारियों से संपर्क साध सकते हैं और अपने पूरे मवेशी समूह का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित कर सकते हैं।



















