आमतौर पर अधिकांश लोग ब्लड प्रेशर की जांच के लिए केवल हाथ पर ही कफ बांधने के आदी होते हैं। क्लीनिक हो या अस्पताल, उच्च या निम्न रक्तचाप का स्तर देखने के लिए हाथ का ही सहारा लिया जाता है। हालांकि शरीर की संवहनी प्रणाली यानी रक्त वाहिकाओं में किसी रुकावट की प्राथमिक पड़ताल करने के लिए पैरों के रक्तचाप का आकलन भी किया जाता है। घर में मौजूद सामान्य डिजिटल या मैनुअल बीपी मशीन के जरिए टखने के हिस्से का रक्तचाप मापकर यह जाना जा सकता है कि कहीं धमनियों में रुकावट तो पैदा नहीं हो रही है। इस जांच की गणना के लिए पैर के टखने के ऊपरी ब्लड प्रेशर को दोनों हाथों में से जिस हाथ का ऊपरी ब्लड प्रेशर अधिक आया हो, उससे भाग दिया जाता है।
घरेलू उपकरण से पैर का रक्तचाप मापने की सही विधि
घर में मौजूद सामान्य ब्लड प्रेशर मशीन से ही यह परीक्षण पूरा किया जा सकता है। सबसे पहले आरामदायक स्थिति में बैठकर दोनों हाथों का ब्लड प्रेशर बारी-बारी से जांचें। मशीन के स्क्रीन पर दिखाई देने वाली रीडिंग को अच्छी तरह नोट कर लें और लिखकर सुरक्षित रख लें। दोनों हाथों की कम से कम दो रीडिंग दर्ज करना बेहतर रहता है ताकि सटीक माप मिल सके। इसके बाद उसी कफ को टखने यानी एंकल के ठीक ऊपर वाले हिस्से पर लपेटें। कफ सही तरीके से बंध जाने पर मशीन चालू करें और पैर की रीडिंग भी दर्ज कर लें। इस पूरी प्रक्रिया में हाथ और पैर दोनों के रक्तचाप के आंकड़े सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।
हाथ और पैर के दबाव से रुकावट का गणितीय आकलन
शरीर में रक्त वाहिकाओं की रुकावट परखने के लिए केवल ऊपरी रीडिंग यानी सिस्टोलिक प्रेशर का ही उपयोग किया जाता है। इस पूरी गणना में नीचे वाली रीडिंग यानी डायस्टोलिक प्रेशर का कोई उपयोग नहीं होता है। इसके बाद पैर के ऊपरी रक्तचाप को हाथ के उच्चतम ऊपरी रक्तचाप से विभाजित किया जाता है।
- सामान्य दायरा: जब यह विभाजन अनुपात 1.0 से 1.3 के बीच आता है, तो इसे बिल्कुल सामान्य स्तर माना जाता है।
- सख्त धमनियों का संकेत: यदि यह गणना 1.4 से अधिक दर्ज की जाती है, तो धमनियों के सख्त होने अथवा उनके कैल्सीफाइड होने का अंदेशा बढ़ जाता है।
- ब्लॉकेज की आशंका: यदि प्राप्त अनुपात 0.9 से कम आता है, तो शरीर या दिल की धमनियों में कहीं न कहीं रुकावट मौजूद होने की प्रबल संभावना बन जाती है।
पैर में दबाव कम आने के चिकित्सकीय मायने
जब कभी पैर का ब्लड प्रेशर हाथ के रक्तचाप की तुलना में काफी कम निकलकर सामने आता है, तो यह धमनियों में रुकावट का एक साफ संदेश हो सकता है। यह परीक्षण केवल एक नेगेटिव रूल आउट टेस्ट के रूप में कार्य करता है। इसका अर्थ यह है कि यदि टेस्ट का परिणाम सामान्य दायरे में आ भी जाए, तो यह पूरी तरह से रुकावट की संभावना को खारिज नहीं करता है। हालांकि, यदि अनुपात तय मानक से कम आता है, तो यह सीधे तौर पर संवहनी रुकावट की ओर इशारा करता है। ऐसी स्थिति सामने आने पर इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क कर गहन चिकित्सीय परीक्षण कराना चाहिए।



















