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मोरिंगा यानी सहजन: एक ही पौधे की पत्ती, फली, फूल और बीज से सेहत को इतने फायदेस्वास्थ्य
15 जून 2026, 9:05 am (45 दिन पहले)· 0

मोरिंगा यानी सहजन: एक ही पौधे की पत्ती, फली, फूल और बीज से सेहत को इतने फायदे

आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल होने वाला सहजन यानी मोरिंगा विटामिन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन और हड्डियों तक के लिए लाभकारी माना जाता है।

हर बगिया या खेत के किनारे दिख जाने वाला सहजन का पौधा दरअसल सेहत का एक पूरा खजाना है। इसे मोरिंगा और ड्रमस्टिक के नाम से भी पहचाना जाता है, और इसकी खासियत यह है कि पौधे का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी काम आता है। पत्तियां, फलियां, फूल, बीज और यहां तक कि छाल — इन सभी को घरेलू नुस्खों और पारंपरिक चिकित्सा में बरसों से जगह मिलती रही है। यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे एक बेहद उपयोगी पौधे का दर्जा दिया गया है।

पोषण से भरा एक पौधा

आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति बताते हैं कि सहजन में एक साथ कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। इसमें विटामिन ए और विटामिन सी के अलावा कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम पाया जाता है, साथ ही यह एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। ये तत्व मिलकर न सिर्फ शरीर को पोषण देते हैं, बल्कि कई आम स्वास्थ्य परेशानियों से बचाव में भी मददगार साबित हो सकते हैं।

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रोग प्रतिरोधक क्षमता और थकान में राहत

सहजन का सबसे आम इस्तेमाल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होता है। इसकी पत्तियों के जरिए शरीर को जरूरी पोषण मिल जाता है, जिससे कमजोरी और थकान जैसी शिकायतों में आराम महसूस होता है। बहुत से लोग ताजी पत्तियों की बजाय इन्हें सुखाकर चूर्ण के रूप में लेना पसंद करते हैं।

पाचन के लिए फायदेमंद

पाचन से जुड़ी दिक्कतों में भी सहजन को पारंपरिक रूप से आजमाया जाता रहा है। इसकी फलियों की सब्जी खाने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं, कब्ज और पेट से जुड़ी दूसरी सामान्य परेशानियों में भी कई लोग इसका सहारा लेते हैं।

हड्डियों और जोड़ों के लिए

पत्तियों और फलियों को हड्डियों की सेहत के लिहाज से भी अच्छा माना गया है, क्योंकि इनमें कैल्शियम के साथ-साथ दूसरे खनिज तत्व भी होते हैं जो शरीर की पोषण जरूरत पूरी करते हैं। यही कारण है कि कई लोग सहजन को अपनी रोज की थाली का हिस्सा बना लेते हैं। वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति के मुताबिक आयुर्वेद में सहजन का जिक्र जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में भी मिलता है, और इसके अलग-अलग हिस्सों को पारंपरिक उपचारों में काम में लाया जाता रहा है। हालांकि वे यह भी साफ करते हैं कि किसी गंभीर बीमारी में सिर्फ घरेलू उपायों पर टिके रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

फूल, बीज और तेल का उपयोग

सहजन के फूल और बीज भी कम उपयोगी नहीं माने जाते। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इनके कई इस्तेमालों का उल्लेख मिलता है। बीजों से निकाला गया तेल त्वचा और बालों की देखभाल में काम आता है, और यही वजह है कि कई हर्बल उत्पादों में सहजन को शामिल किया जाता है।

एक जरूरी सावधानी

वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति इस बात पर जोर देते हैं कि सहजन भले ही पोषण से भरपूर हो, लेकिन इसे किसी बीमारी का पक्का इलाज मान लेना ठीक नहीं। यह एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ और पारंपरिक औषधीय पौधा है, जो संतुलित आहार का हिस्सा जरूर बन सकता है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या इसके औषधीय इस्तेमाल से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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