फिल्म और मनोरंजन जगत में कई हस्तियां अपने दिन की शुरुआत खास तरह के पेय पदार्थों से करती हैं, मगर अभिनेत्री समांथा रुथ प्रभु अपने सवेरे के एक विशेष नियम को कभी नहीं छोड़ती हैं। दिनभर की व्यस्तताओं के बावजूद वह अपनी ग्रैटिट्यूड जर्नल के पन्ने भरने के लिए 30 मिनट से लेकर पूरे 1 घंटे तक का वक्त अवश्य निकालती हैं। इस नियम को पूरा करने के पश्चात वह सवेरे की धूप में कुछ वक्त गुजारती हैं और ध्यान लगाती हैं। समांथा के अनुसार, जब उनका जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था, तब इस सामान्य सी दिखने वाली आदत ने उनके दृष्टिकोण को सकारात्मक दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
भारतीय समाज में प्रातःकाल उठकर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और नमन करना सदियों पुरानी जीवनशैली का हिस्सा रहा है। आधुनिक दौर में यह परंपरा पीछे छूटती दिख रही है और अधिकांश लोगों की सुबह मोबाइल स्क्रीन खंगालने तथा सोशल मीडिया पर समय बिताने से शुरू होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिन की ऐसी शुरुआत आज की पीढ़ी में बढ़ते मानसिक तनाव और परेशानियों की एक बड़ी वजह बन रही है। यही कारण है कि कृतज्ञता के भाव के साथ दिन शुरू करने के महत्व को समझना अब बेहद प्रासंगिक हो चुका है।
चेन्नई के कार्यक्रम में अभिनेत्री ने साझा किया अपना अनुभव
चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में समांथा रुथ प्रभु ने अपनी प्रातःकालीन आदतों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सोकर उठने के बाद वह सबसे पहले अपनी डायरी का एक पृष्ठ भरती हैं, जिसमें वह उन सभी बातों और अनुभवों को दर्ज करती हैं जिनके प्रति उनके मन में आभार का भाव होता है। अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब वह अपने जीवन के अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर का सामना कर रही थीं, तब उन्हें यह डायरी लिखने का परामर्श मिला था।
शुरुआती दिनों में जब मन में निराशा और उदासी के भाव थे, तब सकारात्मक बातें लिखना उनके लिए बेहद कठिन था। धीरे धीरे उन्होंने यह अनुभव किया कि बाहरी परिस्थितियां भले ही रातोंरात नहीं बदलीं, मगर उनके सोचने और घटनाओं को देखने का नजरिया पूरी तरह बदलने लगा। इस निरंतर अभ्यास ने उनके मन को भीतर से शांत और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्यों देते हैं आभार व्यक्त करने की सलाह
मानसिक स्वास्थ्य के जानकारों के मुताबिक, नियमित तौर पर आभार डायरी लिखने से व्यक्ति का ध्यान जीवन की अच्छी और अर्थपूर्ण चीजों पर केंद्रित होने लगता है। इसके लिए किसी असाधारण सफलता या बड़े मौके का इंतजार करना बिल्कुल जरूरी नहीं होता है। किसी अपने का साथ, सामान्य भोजन का मिलना या एक कठिन दिन को सफलतापूर्वक बिता लेना भी कृतज्ञ होने के पर्याप्त कारण हो सकते हैं।
विशेषज्ञ यह चेतावनी भी देते हैं कि इस प्रक्रिया में खुद को हर समय खुश या सकारात्मक दिखाने का अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए। यदि मन किसी बात से दुखी या परेशान है, तो उन भावनाओं को सहजता से स्वीकार करना चाहिए। इसके साथ ही उन छोटी छोटी बातों को कलमबद्ध करना चाहिए जो उस कठिन समय में भी आपके जीवन को सहारा दे रही हैं।
साधारण कदमों से कैसे बनाएं अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या
इस स्वस्थ अभ्यास को अपनी जिंदगी में शामिल करने के लिए किसी जटिल तैयारी की जरूरत नहीं है। शुरुआत के दिनों में केवल 5 मिनट का समय निकालें और डायरी में ऐसी तीन बातें लिखें जिनके लिए आप आभारी महसूस करते हैं। इसके बाद सुबह की ताजी धूप और प्राकृतिक रोशनी में कुछ क्षण बिताएं तथा 5 से 10 मिनट तक शांत बैठकर ध्यान लगाएं।
जैसे-जैसे आपकी नियमितता बढ़ती जाए, आप अपनी सुविधा के हिसाब से समय को धीरे धीरे बढ़ा सकते हैं। एक संतुलित और प्रभावी मॉर्निंग रूटीन का अर्थ ढेर सारी गतिविधियों का बोझ उठाना नहीं है, बल्कि ऐसी छोटी आदतों को चुनना है जिन्हें आप बिना किसी तनाव के लंबे समय तक जारी रख सकें।



















