अक्सर कैंसर के इलाज के दौरान या बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रियाओं के बारे में चर्चाएं सुनने को मिलती हैं। कई गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए अस्थि मज्जा को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक होता है। हालांकि, आम लोगों के मन में अक्सर यह असमंजस रहता है कि यह कोई अलग अंग है या किसी जांच का नाम, और यह शरीर में कहां स्थित होता है। इसके कार्य और इसे सेहतमंद बनाए रखने के तरीकों के बारे में सोनीपत के एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार एवं प्रमुख डॉक्टर नेहा गर्ग ने विस्तार से जानकारी दी है।
अस्थि मज्जा क्या होती है और इसकी संरचना कैसी है
डॉक्टर नेहा गर्ग के अनुसार, बोन मैरो को सामान्य भाषा में अस्थि मज्जा कहा जाता है, जो हड्डियों के अंदरूनी हिस्से में पाए जाने वाले बेहद मुलायम और स्पंजी ऊतक होते हैं। यह मुख्य रूप से शरीर के भीतर खून की कोशिकाओं का निर्माण करने का कार्य करता है। यह स्पंजी और रक्त से भरपूर ऊतक मुख्य तौर पर लाल रक्त कोशिकाएं यानी RBC, सफेद रक्त कोशिकाएं यानी WBC और प्लेटलेट्स का उत्पादन करता है। माइक्रोस्कोप के नीचे जांच करने पर इसकी बनावट और स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
कौन सी स्वास्थ्य स्थितियां इसे प्रभावित करती हैं
कैंसर होने पर हमेशा अस्थि मज्जा पूरी तरह खराब नहीं हो जाती है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर, मायलोमा और कुछ प्रकार के लिम्फोमा जैसी बीमारियों में कैंसर की कोशिकाएं सीधे तौर पर बोन मैरो के भीतर पनपने लगती हैं। इसके अलावा जब अन्य प्रकार के ट्यूमर जैसे ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर या फेफड़ों के कैंसर के सेल्स हड्डियों तक पहुंच जाते हैं, तो मैरो की सामान्य रक्त कोशिकाएं बनाने की क्षमता कम हो जाती है। कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के कारण भी अस्थि मज्जा कुछ समय के लिए सुस्त पड़ सकती है, जिससे हीमोग्लोबिन, डब्ल्यूबीसी और प्लेटलेट्स का स्तर नीचे गिर सकता है।
अस्थि मज्जा के प्रभावित होने के लक्षण और जांच प्रक्रिया
जब अस्थि मज्जा ठीक से काम नहीं करती है या प्रभावित होती है, तो मरीज के शरीर में खून की भारी कमी हो जाती है, हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है, बार-बार संक्रमण होने की शिकायत होती है क्योंकि सफेद रक्त कोशिकाएं घट जाती हैं और प्लेटलेट्स कम होने के कारण शरीर पर नील पड़ने या ब्लीडिंग की समस्या सामने आती है। हालांकि, केवल हीमोग्लोबिन, डब्ल्यूबीसी या प्लेटलेट्स कम होने मात्र से यह साबित नहीं हो जाता कि कैंसर अस्थि मज्जा तक फैल चुका है, क्योंकि इसके पीछे अन्य कई वजहें भी हो सकती हैं। स्थिति स्पष्ट करने के लिए जरूरत पड़ने पर बोन मैरो एस्पिरेशन या बायोप्सी की जाती है, और गंभीर मामलों में ब्लड कैंसर होने पर बोन मैरो ट्रांसप्लांट का सहारा भी लिया जाता है।
अस्थि मज्जा का स्वास्थ्य और दैनिक जीवनशैली का संबंध
अस्थि मज्जा की सेहत हमारे रोजमर्रा के खानपान और दिनचर्या पर पूरी तरह निर्भर करती है। यह हमारे शरीर के बाकी तंत्रों से अलग नहीं है। हम प्रतिदिन कैसा भोजन करते हैं, हमारी जीवनशैली कैसी है और हम मानसिक तनाव का सामना किस तरह करते हैं, यह सब रक्त के उत्पादन की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
अस्थि मज्जा को सेहतमंद बनाए रखने के जरूरी उपाय
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शरीर में रक्त कोशिकाओं के निरंतर निर्माण के लिए आयरन, विटामिन बी12, फोलेट और पर्याप्त प्रोटीन की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
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प्रतिदिन शारीरिक गतिविधि करने और स्वस्थ फेफड़ों की कार्यप्रणाली के माध्यम से शरीर के भीतर ऑक्सीजन का स्तर हमेशा बेहतर बना रहना चाहिए.
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हार्मोन का संतुलन सही रहना बेहद जरूरी है, जो अस्थि मज्जा को उचित कोशिकाओं का उत्पादन करने के लिए सही संकेत देते हैं।
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एक सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली का होना आवश्यक है जो अस्थि मज्जा की कार्यक्षमता को न तो अत्यधिक उत्तेजित करे और न ही जरूरत से ज्यादा दबाए।
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स्वस्थ किडनी और लिवर रक्त कोशिकाओं के जीवित रहने और उनके उचित नियमन में भरपूर सहायता प्रदान करते हैं।
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जब शरीर को सही पोषण, पूरा आराम और लंबे समय तक रहने वाली सूजन से सुरक्षा मिलती है, तब अस्थि मज्जा पूरी तरह स्वस्थ तरीके से अपना काम करती है।



















