रातभर करवटें बदलने के बाद अगर सुबह आंखों में भारीपन, सिर में हल्का दर्द और शरीर में सुस्ती महसूस हो, तो पूरा दिन बोझिल लगने लगता है। दफ्तर में फोकस करना मुश्किल हो जाता है और मूड भी चिड़चिड़ा रहता है। लेकिन राहत की बात यह है कि एक रात की अधूरी नींद के बाद भी कुछ आसान आदतें अपनाकर शरीर और दिमाग को कुछ ही घंटों में काफी हद तक रिकवर किया जा सकता है।
रोज 7 घंटे की नींद क्यों जरूरी है
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक हर वयस्क को रात में कम से कम 7 घंटे सोना चाहिए। जो लोग लगातार इससे कम सोते हैं, उन्हें कई तरह की दिक्कतें घेर सकती हैं, जैसे किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी, याददाश्त का कमजोर पड़ना, मूड का बार-बार बिगड़ना और सही समय पर सही फैसला न ले पाना। इतना ही नहीं, नींद की लगातार कमी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा देती है, क्योंकि थका हुआ दिमाग सड़क पर या मशीनों के साथ काम करते वक्त उतनी सतर्कता नहीं दिखा पाता जितनी जरूरत होती है। यानी नींद पूरी न होना सिर्फ अगले दिन की थकान का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर सेहत और सुरक्षा दोनों पर पड़ सकता है।
अधूरी नींद के बाद अगली सुबह कैसा महसूस होता है
जिस रात नींद ठीक से पूरी नहीं हो पाती, अगले दिन आंखों में भारीपन, सिरदर्द, सुस्ती, चिड़चिड़ापन और ब्रेन फॉग जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। इनका सीधा असर काम की गुणवत्ता और मूड, दोनों पर पड़ता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि एक रात की खराब नींद का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पूरा दिन भी उतना ही खराब गुजरेगा, बस शरीर को थोड़ी अतिरिक्त मदद और सही आदतों की जरूरत होती है। स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक अगर किसी एक रात नींद अधूरी रह जाए, तो अगले दिन 20 से 30 मिनट की पावर नैप और सुबह की धूप में कुछ देर बैठना जैसी छोटी आदतें शरीर की सतर्कता बढ़ाने और थकान घटाने में असरदार साबित हो सकती हैं। नींद और मानसिक सेहत पर काम करने वाले विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि सही रूटीन अपनाकर शरीर कुछ ही घंटों में दोबारा एनर्जी हासिल कर सकता है। आगे जानिए ऐसे पांच आसान तरीके, जिनकी मदद से रातभर की अधूरी नींद के बाद भी दिन को संभाला जा सकता है।
1. सुबह की धूप और हल्की वॉक से मिलेगी ताजगी
अगर रात ठीक से नहीं कटी है, तो सुबह या दिन में कुछ समय धूप में बिताना काफी फायदेमंद रहता है। धूप में हल्की वॉक करने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। दरअसल सूरज की रोशनी शरीर में सेरोटोनिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ाने में मदद करती है, जो मूड को बेहतर बनाता है और थकान का एहसास कम करता है। इसके साथ ही धूप शरीर की बॉडी क्लॉक यानी आंतरिक घड़ी को भी रीसेट करने में मदद करती है, जिससे दिनभर सतर्कता बनी रहती है और शाम तक शरीर सही लय में लौट आता है।
2. करीब 20 मिनट की पावर नैप ले लें
अगर मौका मिले तो दिन में लगभग 20 मिनट की छोटी झपकी यानी पावर नैप लेना फायदेमंद हो सकता है। इससे ब्रेन फॉग, थकान और नींद की कमी की वजह से आने वाली सुस्ती में कमी आती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह झपकी बहुत लंबी न हो और शाम या रात के बहुत करीब बिल्कुल न ली जाए, वरना इसका सीधा असर उसी रात की नींद पर भी पड़ सकता है और अगला दिन फिर मुश्किल हो सकता है।
3. एक्सरसाइज बंद न करें, हल्की एक्टिविटी जरूर करें
नींद पूरी न होने पर ज्यादातर लोग एक्सरसाइज पूरी तरह छोड़ देते हैं, जबकि हल्की फिजिकल एक्टिविटी उस दिन के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। तेज वॉक, स्ट्रेचिंग, योग या हल्का वर्कआउट शरीर में मेलाटोनिन के प्राकृतिक उत्पादन को सपोर्ट करता है, और यही हार्मोन रात में अच्छी और गहरी नींद लाने में अहम भूमिका निभाता है। यानी दिन में की गई थोड़ी मेहनत रात की नींद सुधारने में भी मदद कर सकती है।
4. कैफीन के सहारे पूरा दिन न निकालें
नींद की कमी होने पर कई लोग बार-बार चाय या कॉफी का सहारा लेने लगते हैं। थोड़ी मात्रा में कैफीन सतर्क महसूस कराने में मदद कर सकती है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा लेने से रात की नींद फिर से बिगड़ सकती है और अगला दिन भी उतना ही थकाऊ हो सकता है। इसलिए दोपहर के बाद कैफीन की मात्रा कम करने की कोशिश करें और इसकी जगह भरपूर पानी पीते रहें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और सतर्कता बनी रहे।
5. अगली रात के लिए बेहतर माहौल तैयार करें
अगर पिछली रात की नींद खराब रही है, तो अगली रात अच्छी नींद लेना सबसे जरूरी हो जाता है। इसके लिए बिस्तर पर साफ चादर बिछाएं, कमरे का तापमान ठंडा और आरामदायक रखें, सोने से ठीक पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें और रोज एक ही तय समय पर सोने की आदत डालें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से शरीर को जल्दी आराम मिलता है और अगली सुबह पहले से कहीं ज्यादा तरोताजा महसूस होता है।
एक रात की खराब नींद को आदत मत बनने दें
विशेषज्ञों के मुताबिक कभी-कभार नींद खराब हो जाना सामान्य बात है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे और साथ में खर्राटे, सांस थमने या दिनभर बहुत ज्यादा नींद आने जैसी शिकायतें भी दिखें, तो डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी सेहत संबंधी दिक्कतें खड़ी कर सकता है। कुल मिलाकर, अच्छी और भरपूर नींद ही बेहतर मानसिक और शारीरिक सेहत की सबसे मजबूत बुनियाद है, और इसे बनाए रखना रोजाना की प्राथमिकता होनी चाहिए।



















