व्यायाम के दौरान पसीना निकलना एक आम बात है, लेकिन क्या अधिक पसीना आने का यह अर्थ है कि आपका वर्कआउट बेहद प्रभावी रहा है? कई फिटनेस प्रेमी ऐसा मानते हैं कि पसीने की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, शरीर से उतनी ही अधिक कैलोरी और चर्बी कम होगी। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है क्योंकि पसीने और फैट बर्न होने के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। पसीना मुख्य रूप से शरीर के अंदरूनी तापमान को सामान्य बनाए रखने की एक कुदरती क्रियाविधि है। इस स्थिति में यह समझना आवश्यक हो जाता है कि आखिर कसरत की सफलता का सटीक आकलन कैसे किया जाए और किन पैमानों से यह जांचा जाए कि आपका फिटनेस रूटीन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है?
पसीने के पीछे का विज्ञान और शारीरिक तापमान
क्लीवलैंड क्लिनिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब हम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो हमारी मांसपेशियां अधिक तेजी से काम करती हैं जिससे शरीर के भीतर गर्मी उत्पन्न होने लगती है। जैसे ही शरीर का तापमान बढ़ता है, हमारी पसीने की ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं। त्वचा की सतह पर आने वाला यह पसीना जब वाष्प बनकर उड़ता है, तो यह शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है। हालांकि, पसीने की मात्रा हर इंसान में अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोगों को थोड़ी सी मेहनत में ही भारी पसीना आने लगता है, जबकि अन्य लोगों को लंबे समय तक पसीना बहाने के बाद भी बहुत कम पसीना आता है। इसके अलावा मौसम, आसपास का तापमान, हवा में नमी, पहने हुए कपड़े, शरीर की बनावट और हर व्यक्ति की पसीना छोड़ने की प्राकृतिक क्षमता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
क्या अधिक पसीने का संबंध अधिक कैलोरी बर्न होने से है?
यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि पसीने की अधिक मात्रा यह साबित करे कि आपने ज्यादा कैलोरी खर्च कर ली है। पसीना मूल रूप से शरीर को ठंडा करने के लिए निकलता है जिसमें पानी और कुछ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल होते हैं। यदि कसरत के तुरंत बाद आपका वजन तराजू पर थोड़ा कम नजर आता है, तो इसका मुख्य कारण शरीर से पानी का बाहर निकलना हो सकता है। इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि उतनी मात्रा में शरीर की चर्बी घट गई है। जैसे ही आप पानी पीते हैं और शरीर में तरल पदार्थों की भरपाई होती है, वजन फिर से अपनी पुरानी स्थिति में आ जाता है।
एक बेहतरीन वर्कआउट की सही पहचान क्या है?
किसी भी व्यायाम सत्र की सफलता का अंदाजा केवल पसीने की बूंदों से नहीं लगाया जा सकता है। एक्सरसाइज का स्वरूप, उसकी अवधि, तीव्रता और निरंतरता कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा समय बीतने के साथ आपकी शारीरिक ताकत, सहनशक्ति और स्टैमिना में होने वाला सुधार भी बेहतर फिटनेस के पुख्ता प्रमाण हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि कुछ हफ्तों के लगातार व्यायाम के बाद आप पहले के मुकाबले अधिक समय तक पैदल चल या दौड़ पा रहे हैं, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस कम फूल रही है या वही पुराना वर्कआउट अब आपको अपेक्षाकृत आसान लगने लगा है, तो यह आपकी फिटनेस में सकारात्मक बदलाव का साफ संकेत है।
कम पसीना आने पर क्या वर्कआउट को बेकार समझें?
इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। यदि आप किसी एयरकंडीशन या ठंडे कमरे में कसरत कर रहे हैं या फिर आपके शरीर की तासीर ऐसी है कि वह कम पसीना पैदा करता है, तो आपको वर्कआउट के दौरान कम पसीना आ सकता है। इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि आपकी मेहनत बेकार चली गई। इसी प्रकार, केवल अधिक पसीना बहाने के उद्देश्य से बहुत गर्म कपड़े पहनकर या चिलचिलाती गर्मी में वर्कआउट करना एक गलत तरीका है। ऐसा करने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की गंभीर कमी हो सकती है और हीट स्ट्रोक जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
अतिरिक्त पसीना आने पर किन बातों का रखें ध्यान?
व्यायाम करते समय शरीर में पानी की कमी न होने दें और बीच-बीच में पानी पीते रहें, खासकर जब मौसम गर्म हो या आप लंबे समय तक कसरत कर रहे हों। यदि अत्यधिक पसीना आने के साथ-साथ आपको चक्कर आने लगे, सिर में तेज दर्द हो, कमजोरी महसूस हो, जी मिचलाए, उलझन हो या बेहोशी जैसी स्थिति बने, तो बिना देरी किए तुरंत अपनी एक्सरसाइज रोक दें और शरीर को ठंडा करने के उपाय करें। इस तरह के शारीरिक लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
























